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असम में भाजपा को झटका: बोडोलैंड पीपुल्स एम ने भाजपा गठबंधन विज्ञान से छोड़ा, अब कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ेगी पार्टी


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  • असम चुनाव 2021 | बीजेपी अलायंस पार्टनर BPF (बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट) ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होना छोड़ दिया

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गुवाहाटीएक मिनट पहले

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बोडोलैंड पीपुल्स एमई यानी बीपीएफ के चीफ हर्गमा मोहिलिरे ने सोशल मीडिया पर बीजेपी गठबंधन से अलग होने का ऐलान किया है। (फाइल)

असम में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। यहां भाजपा गठबंधन में शामिल बोडोलैंड पीपुल्स एमई यानी बीपीएफ ने गठबंधन विज्ञान छोड़ने का फैसला किया है। BPF अब कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। इसके नेता हर्गमा मोहिलिरे ने सोशल मीडिया पर बीजेपी गठबंधन से अलग होने की जानकारी दी। असम में 27 मार्च से 6 अप्रैल के बीच तीन चरणों में चुनाव होंगे। नतीजों का ऐलान बाकी चार राज्यों के साथ 2 मई को होगा।

महाजठ में शामिल होंगे
मोहिलिरे ने शनिवार शाम सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- विकास, शांति और एकता के लिए स्थिर सरकार जरूरी है। हम करप्शन को भी खत्म करना चाहते हैं। इसलिए बोडोलैंड पीपुल्स क्यू ने महाजठ गठबंधन में शामिल होने का फैसला किया है। अब हम भाजपा से किसी तरह की दोस्ती नहीं रखना चाहते हैं। आने वाले चुनाव हम महाजठ गठबंधन के साथ मिलकर लड़ेंगे।

BPF का गठन 2005 में हुआ था। कोकराझार जिले में इसका प्रभाव है। पिछले चुनाव में यह पार्टी भाजपा के साथ मिलकर लड़ी थी और तब इसने 126 सदस्यीय विधानसभा में 12 सीटें हासिल की थीं।

पिछले साल आई थी रिश्तों में खटास
भाजपा और BPF के रिश्तों में पिछले साल खटास आई थी। तब बोडोलैंड टेरोटैरियल काउंसिल के चुनाव में भाजपा ने एक नया पार्टनर चुना था। हालांकि, सर्बानंद सोनोवाल सरकार में BPF के तीन मंत्री हैं और BTC चुनाव में उन्होंने सबसे ज्यादा जीती थी। 40 मेंबर्स वाली इस लोकल बॉडी में 17 बीपीएफ मेंबर्स चुनाव जीते थे। हालांकि, भाजपा नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ब्रिटेन पीपुल्स पार्टी लिबरल को जीत की जीत दी थी, जिन्होंने 12 सीटों पर चुनाव लड़ा था। शाह ने इस पार्टी को अपना महत्वपूर्ण सहयोगी बताया था।

इस महीने की शुरुआत में असम के फाइनेंस मिनिस्टर हेमंत बिस्व सरमा ने साफ कर दिया था कि भाजपा किसी भी हाल में बीपीएफ के साथ चुनावी गठबंधन नहीं करेगी। तब ही यह तय हो गया था कि BPF या फिर अकेले चुनाव लड़ेगी या फिर कांग्रेस से गठबंधन करेगी।

पांच साल के लिए गठबंधन किया था
सरमा ने साफ कर दिया था कि बीपीएफ से गठबंधन सिर्फ पांच साल के लिए था और अब उनकी मंत्री सरकार में भी है। सरमा ने इसे स्वस्थ राजनीति करार दिया था। अगर वर्तमान विधानसभा की बात करें तो भाजपा के पास 60 विधायक हैं और वो सबसे बड़ी पाटी के तौर पर सरकार चला रही है।

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