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आत्मनिर्भर: पंजाब, हरियाणा से नहीं बुलाना हार्वेस्टर चालक को, जिले के 10 वें पास आवेदक काे कृषि शिक्षा भेपाल में निशुल्क पढ़ाते हुए हार्वेस्टर चल रहा है।


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बैशांग33 मिनट पहले

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फाइल फोटो।

जिले के किसानाें काे अब कंबाइन हार्वेस्टर ऑपरेटर (हार्वेस्टर ड्राइवर) के लिए पंजाब-हरियाणा पर निर्भर नहीं हाेगा। जिले ने कंबाइन हार्वेस्टर के ऑपरेटर काे जिले में ही तैयार कर लिया है। इसके लिए कृषि संस्थान, देवीबाग भाेपाल में एक महीने का आवासीय प्रशिक्षण संभाग के बेराजगारों को दिलाया है। अभी तक 100 लोगों ने यह पाठयक्रम पूरा कर लिया है। जिले के 10 वें पास अावेदक काे कृषि उद्यान भाेपाल में चयनित आवेदकें काे हार्वेस्टर मशीन चलाने का निशुल्क प्रशिक्षण दिया गया।

लॅकडाउन में हाे गया था समस्या
पिछले साल लाॅकडाउन के दाैरान खेतों में खड़ी फसल, कटाई न होने से खरीदी-बिक्री पर पड़ रहे असर को देखते हुए सरकार ने मशीनाें की आवाजजही पर प्रतिबंध हटाए गए पंजाब से ऑपरेटर नहीं आए थे। इसके बाद जिले से ही ऑपरेटर तैयार करने का निर्णय लिया गया है। कृषि एवं कौशल विकास केंद्र में बेरोजगार युवकों को ट्रैक्टर मैकेनिक के साथ कंबाइन हार्वेस्टर ऑपेटर की ट्रेनिंग दी।

इसके लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनर (पीसीबीपी) के रूप में एक निजी कंपनी ने प्रशिक्षण कार्य नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉउंसिल के तहत व एग्रीकल्चर स्किल्स काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तय मानकों के अनुसार दिया गया है। जिले में बहुत से किसानों ने कंबाइन हार्वेस्टर क्रय कर रखा है, लेकिन ये पंजाब, हरियाणा, से ऑपरेटर बुलानेते हैं।

दक्ष कर्मचारियों के अभाव में उन्हें मनमुताबिक वेतन भी देना पड़ता है, लेकिन अब प्रशिक्षण होने से जिले के युवा किसान स्वयं हार्वेस्टर चलना सीखकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाएंगे। पिछली बार कोरोना के कारण कई कंबाइन हार्वेस्टर पर अन्य राज्य के श्रमिकों को नहीं मिला और किसानों को फसल काटने में परेशानी भी हुई।

मजदूर कम मिलने से हार्वेस्टर से कटाई
जिलें में कृषि श्रमिकों की बैठक कम हुई हैं और मजदूरी भी बढ़ी है। इस कारण से खेती में मशीनों पर निर्भरता बढ़ी है। गेहूं और धान के बड़े हिस्से की कटाई अब कंबाइन हार्वेस्टर से ही होती है। धीरे-धीरे चना, मूंग और सोयाबीन की कटाई भी इससे शुरू हुई है। जिले में 1 हजार हार्वेस्टर चलते हैं। ये अधिकांश पंजाब और हरियाणा से आते हैं। संचयकों को पहले से बुकिंग करनी पड़ती है।

^ राष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम के तहत मशीन और निरीक्षक के लिए हार्वेस्टर की कंपनियों से अनुबंध किया गया है। प्रशिक्षण मिलने के बाद न केवल रोजगार मिलेगा बल्कि आत्मनिर्भरता भी बन जाएगी।
जितेंद्र सिंह, उपसंचालक

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