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इस बिजनेस को शुरू करने के लिए सरकार से लेनी पड़ती हैं 2000 मंजूरियां, जानिए इसके बारे में सबकुछ


देश में मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनी शुरू करने के लिए दर्जनों या सैकड़ों नहीं हजारों मंजूरियों की जरूरत पड़ती है.

उद्योग संगठन फिक्‍की (FICCI) ने बजट से पहले सरकार के शीर्ष अधिकारियों को बताया कि देश में नई मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनी (Manufacturing Companies) शुरू करने के लिए 122 केंद्रीय (Central) और राज्य कानूनों (State Law) के तहत अनुमोदन (Compliance), फाइलिंग (Filing) समेत मंजूरियों (Approvals) की जरूरत होगी. इससे समय के साथ कारोबार शुरू करने की लागत (Cost) भी बढ़ जाएगी.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 29, 2020, 3:10 PM IST

नई दिल्‍ली. भारत में मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनी (Manufacturing Companies) शुरू करने के लिए केंद्रीय और राज्‍य कानूनों के तहत 1,984 मंजूरियां (Approvals) लेने की जरूरत पड़ सकती है. उद्योग संगठन फिक्‍की (FICCI) ने बजट 2020 से पहले शीर्ष अधिकारियों से कहा कि ये समय खपाऊ प्रक्रिया है. साथ ही इससे कारोबार शुरू करने की लागत भी काफी बढ़ जाएगी. फिक्‍की ने इस मुद्दे को बजट पूर्व सलाह-मशविरा के दौरान वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के सामने भी उठाया था. इस दौरान शीर्ष अधिकारी भी मौजूद थे.

फिक्‍की ने बजट पूर्व बैठक में उठाया मुद्दा
फिक्‍की के एक अध्‍ययन के मुताबिक, मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनी शुरू करने के लिए 122 केंद्रीय (Central) और राज्य कानूनों (State Law) के तहत अनुमोदन (Compliance), फाइलिंग (Filing) समेत मंजूरियों की जरूरत होगी. इनमें पर्यावरण (Environment), श्रम कानून (Labor Laws), जीएसटी (GST) और कंपनी कानून (Companies Act) के तहत मंजूरियां शामिल हैं. बजट पूर्व बैठक में फिक्‍की की ओर से इस मुद्दे को उठाने पर उद्योग प्रोत्‍साहन और इंटरनल ट्रेड डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने मामले को देखने का भरोसा जताया.

फार्मास्‍युटिकल और फूड प्रोसेस कंपनी को पूरे देश में कारोबार करने के लिए कई अन्‍य मंजूरियां भी लेनी पड़ती हैं.

‘समय और पैसे दोनों की होती है बर्बादी’
हिंदवेयर (Hind-ware) के वाइस-चेरयमैन और एमडी संदीप सोमनी का कहना है कि इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सकता है, क्योंकि कंपनी शुरू करने वाले व्‍यक्ति को मंजूरियां लेने के लिए बार-बार एजेंसियों के पास जाना पउ़ता है. इसमें उसका पैसा और समय दोनों बर्बाद होता है. टाइम्‍‍‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, फिक्‍की के पूर्व अध्‍यक्ष सोमनी ने यह भी कहा कि विभिन्‍न कानून के तहत कई तरह की पर्यावरण मंजूरी ही लेनी पड़ती हैं. वहीं, फार्मास्‍युटिकल और फूड प्रोसेस कंपनी को पूरे देश में कारोबार करने के लिए कई अन्‍य मंजूरियां भी लेनी पड़ती हैं.

सरकार की ओर से मंजूरियों की संख्‍या कम करने पर विचार किया जा रहा है.

मंजूरियां घटाने पर विचार कर रहा केंद्र
शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि सभी मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनियों को सभी मंजूरियों की जरूरत नहीं होती है. उन्‍होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इंजीनियरिंग सेक्‍टर से जुड़ी मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनी को बॉयलर्स एक्‍ट के तहत मंजूरियों की जरूरत होता है, लेकिन उसका फूड सेफ्टी एंड स्‍टैंडर्ड एक्‍ट से कोई लेनादेना नहीं होता है. एक अधिकारी ने कहा कि समय के साथ इन मंजूरियों की संख्‍या कम करने पर विचार किया जा रहा है. इसके अलावा सरकार कई तरह के लाइसेंस को बार-बार रिन्‍यू कराने के झंझट को खत्‍म करने की दिशा में काम कर रही है.

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