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ई-कॉमर्स पर बढ़ती जा रही रिटेलर्स का भरोसा: अंबानी-बेजोस की जंग में रिटेल स्पेस में बड़े बदलाव हो रहे हैं, रिटेलर्स के डिजिटाइजेशन से एफएमसीजी फर्मों के लिए बढ़ेगा स्पॉट


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  • अंबानी और बेजोस की लड़ाई के रूप में खुदरा क्षेत्र में बड़े बदलाव, खुदरा विक्रेताओं के डिजिटलीकरण से FMGG कंपनियों के लिए व्यापार के अवसर बढ़ेंगे

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3 मिनट पहले

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  • परिधान भंडार का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन यूनिलीवर और प्रॉक्टर गैंबल और एसबीआई तक को प्रभावित करने वाला है
  • परिधान दुकानदार थोड़े बहुत प्रशिक्षण से स्मार्टफोन के माध्यम से व्यवसायिक-तरीकों को बेहतर बनाने में सक्षम हैं

इंडियन रिटेल सेक्टर पर बादशाहत के लिए मुकेश अंबानी और जेफ बेजोस की जंग के बीच इस स्पेस में कई तरह के बदलाव भी हो रहे हैं। 1.3 अरब उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी करते हुए चीनी भंडार का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन दोनों दिग्गजों से लेकर यूनिलीवर और प्रॉक्टर गैंबल और देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई, सबको प्रभावित करने वाला है।

कंज्यूमर इकोनॉमी पर दबदबा बनाने में मददगार होगा फ्यूचर ग्रुप

वर्तमान में अंबरी और बेजोस फ्यूचर ग्रुप को लेकर भिड़े हुए हैं। फ्यूचर ने पैसे बेजोस से के लिए लेकिन कोविड -19 का कम बढ़ने पर कर्ज से दबा अपना बिजनेस अंबरी को बेच दिया। ग्रुप अंबानी के हाथ लगा तो भारतीय कंज्यूमर इकोनॉमी पर उनका दबदबा अटूट हो जाएगा।

दिग्गजों की जंग में एफएमसीजी कंपनियों की अलग कहानी चल रही है

इन दिग्गजों की जंग के बीच एफएमसीजी कंपनियों की अलग कहानी चल रही है। उनके लिए 6,60,000 गावों और 800 शहरों की छोटी दुकानों तक पहुंचना मुश्किल काम है। 100 साल से ज्यादा समय से मौजूदा यूनिलीवर की पहुंच ऐसी 15% दुकानों तक सीधी पहुंच है। वह 80% दुकानों तक पहुंचने के लिए होलसेलर की मदद लेती है। यह आंकड़ा इनवेस्टमेंट रिसर्च और एसेट मैनेजमेंट कंपनी सैनफोर्ड सी बर्नस्टीन एंड कंपनी का है।

900 शहरों के 17 लाख रिटेल स्टोर्स को एक्सेस करने के लिए डैकान पहुंचे

इस तरह ब्रांड्स का अधिकांश कारोबार होलसेलर और रिटेलर के रिलेशन पर चलता है, जो महँगा पड़ता है। रिटेलर्स के कामकाज के डिजिटाइजेशन से एफएमसीजी कंपनियों के लिए कारोबार फैलाने के बड़े मौके मिलेंगे। इस मामले में पांच साल पुरानी उड़ान काफी बढ़ गई है। B2B बिजनेस स्पेस में कारोबार वाली उड़ान देशभर में मौजूद गोदामों से 900 शहरों के 17 लाख रिटेल स्टोर्स को सामान पहुंच रहा है।

उड़ान पर 30 लाख बायर और सेलर रेजर्ड हैं

उड़ान भरने को पिकअप पर पेमेंट बीट है जबकि रिटेलर को उससे क्रेडिट मिल जाता है जो होलसेलर हाई रेट पर देता है। सब स्मार्टफोन पर हो जाता है जिससे छोटे दुकानदारों को हिसाब-किताब रखने में मदद मिलती है। बैंकों और फाइनेंसर्स को वर्किंग कैपिटल लोन के भरोसेमंद ग्राहक मिलते हैं और ब्रांड को बेहतर एक्सेसरी मिलती है। उड़ान पर प्रदर्शनी से लेकर किसान, हर्बलिस्ट, होटल, रेस्टोरेंट, ग्रोसरी स्टोर के रूप में 30 लाख बायर और सेलर regord।

इंटरनेट वाणिज्य पर भरोसे की समस्या दूर हो रही है

इस यूनिकॉर्न के तीन को-एक्टिवर में एक वैभव गुप्ता कहते हैं, ‘हमने इंटरनेट पर भरोसा की समस्या दूर है।’ दूसरे को-एक्टिवर सुजीत कुमार कंपनी की सफलता का श्रेय 2017 में लागू जीएसटी को देते हैं। अलग अलग रेट हैं और कंपला विज्ञान एक्सपर्ट लेकिन देशभर में एकसमान होने से अब तरह की लोकल लेवी के मकड़जाल से आजाद हो गए हैं।

रिटेल स्पेस में क्रांति को बढ़ावा दे रहा है मोबाइल इंटरनेट

ये सबके केंद्र में मोबाइल इंटरनेट है। अंबानी ने 2016 में 4 जी लाकर महंगे मोबाइल को बिल्कुल सस्ता कर दिया। परिधान दुकानदार थोड़े बहुत प्रशिक्षण से स्मार्टफोन के माध्यम से व्यवसायिक-तरीकों को बेहतर बनाने में सक्षम हैं। फ्लिपकार्ट को अमेजन का भारतीय वर्जन बनाने वाली टीम में कुमार और गुप्ता शामिल थे। तीसरे पार्टनर अमोद मालवीय फ्लकार्ट के शेफ टेक्नोलॉजीज ऑफिसर रहे हैं। लेकिन उड़ान बनाने में इन सबने किसी ग्लोबल कंपनी को कॉपी नहीं किया, क्योंकि ऐसी कोई कंपनी ही नहीं है।

सस्ते के चक्कर में रहते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले कंजुएमर

ऑनलाइन खरीदारी करने वाले कंज्यूमर की पसंद भले ही विदेशियों की तरह हो लेकिन ज्यादातर सस्ते के चक्कर में रहते हैं और बहुत कम सामान मंगा रहे हैं। गुप्ता के मुताबिक, ‘किचन और फ्रिज छोटे हैं और यहां जूतों के बटन की जेब से भी औसतन 200 रुपये ही निकलते हैं।’ डेस्कटॉप पासरे जने की बात होने से पहले भारत में मोबाइल कॉमर्स आ गया, लेकिन बड़ी खरीदारी भी ऑनलाइन सर्च से शुरू नहीं होती।

रिटेलर्स को ट्रांसमिशन में आने वाली रुकावट दूर कर रही उड़ान

बिहार के भभुआ से आईआईटी दिल्ली आकर पढ़ाई करने वाले कुमार सप्लाई चेन विशेषज्ञ हैं और वह लोगों की सोच में बुनियादी बदलाव लाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। वह रुपयों के हस्तांतरण में आने वाली रुकावट दूर कर रहे हैं जो 10% से 12% मार्जिन पर कारोबार करने वाले रिटेलर के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। पश्चिमी देशों में यह दोगुना होता है।

बी 2 सी रिटेल बिजनेस राजनीतिक रूप से संवेदनशील है

भारत में बी 2 सी रिटेल बिजनेस राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और रेगुलेटरी चुनौतियों से भरा है। स्वदेशी के नारों के बीच विदेशी ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर सरकार का शिकंजा कस रहा है। ऐसे में अंबरी को भारतीय बाजार में बढ़त हासिल है लेकिन बेजोस पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। मेक इन इंडिया कैंपेन को सपोर्ट देने के लिए अमेजन ने भारत में फायर टीवी स्टिक का प्रोडक्शन शुरू करने कालान किया।)

दो दिग्गजों की लड़ाई में दुकानदारों को नोट नहीं

अब सवाल यह उठता है कि दो दिग्गजों की लड़ाई में क्या दुकानदारों को नुकसान होगा? ऐसा नहीं होगा। बर्नस्टीन के मुताबिक, दशक के अंत तक रिटेल मार्केट का साइज डेटा रिवोल्यूशन के टाइम का तिगुना में दो लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। इसमें छोटी दुकानों का हिस्सा 65% होगा और उनका आधार डिजिटल होगा। उड़ान जैसी स्टार्टअप उनके बैकएंड को मॉडर्न बना लेगी जबकि अंबानी और बेजोस अपने स्टोर एमई के जरिए बड़ा मार्केट हासिल कर लेंगे।

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