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उम्मीदों का बजट: कुछ दरियादिली दिखाई गई सरकार तो तुरिज्म, उद्योग, शिक्षा और एग्रीकल्चर सेक्टर को मिल सकती है संजीवनी


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जबलपुर7 घंटे पहले

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सेंडेकटिक फोटो

वैक्सीन के बाद अगर राहत भरी उम्मीद का कोई दूसरा मुद्दा है तो वह राज्य का बजट है .. कोरोना से राहत के लिए जिस तरह लोगों ने वैक्सीन के आने का इंतजार किया था। कराहती, लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को भी ठीक इसी तरह आर्थिक डोज यानी विशेष पैकेज का इंतजार है …। हालांकि चुनौतियों के बीच बैलेंस शीट को बुलेंस करना प्रदेश सरकार के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं है।

जबलपुर शहर और जिला ही नहीं बल्कि पूरे महाकोशल को विकास की दरकार है। ऐसे में बजट के जरिए तुरिज्म, उद्योग, इलेक्ट्रिसिटी, एजुकेशन और एग्रीकल्चर सेक्टर पर अगर थोड़ी सी भी दरियादिली दिखाई देती है तो प्राकृतिक संसाधनों से लबरेज इस क्षेत्र को नई संजीवनी मिल सकती है। जब के साथ कदमताल मिलाते हुए विकास की राह में वह आगे बढ़ सकता है।

जब की मांग: तुरिज्म के सेन्ट्रल पॉइंट के रूप में जबलपुर का हो विकास, ब्रांडिंग भी आवश्यक है

नर्मदा नदी और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ जबलपुर और इसकी इर्दगिर्द आत्माओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जगहें जबलपुर में हैं। लेकिन इसके बावजूद आज तक यहां का विकास को सही लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया है। कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना और नौरादेही जैसे राष्ट्रीय पार्कों के अलावा अमरकंटक और पचमढ़ी जैसे विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल की जबलपुर से सीधी कनेक्टिविटी है।

  • राज्य सरकार को बजट में तुरिज्म की सुविधाओं पर ध्यान देकर जबलपुर को सेन्ट्रल पाइंट के रूप में विस्तारक केंद्र बनाना होगा।
  • अब केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल भी केन्द्र में जबलपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिसका फायदा सीधे तौर पर जबलपुर को मिल सकता है।
  • टूरिस्ट डेस्टिनेशन को जोडने वाली सड़कों को बेहतर करने की आवश्यकता है। इसके अलावा सार्वजनिक ट्रांस्पोर्ट को बढ़ावा मिलना चाहिए।
  • नर्मदा नदी पर बने बर्गी डेम और भेड़ाघाट के आसपास खंडवा के हनुवंतिया जैसे केंद्र स्थापित होने चाहिए, जहां देश भर के तुरिस्ट आकर रुकें।

शिक्षकों को वेतन के लाले: रादुविवि ने माँगे 64 करोड़, ताकि नए पाठ्यक्रम भी शुरू हो सकें

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के नियमित और अतिथि शिक्षकों के आगे वेतन का बडा संकट है। रिटायर्ड हो चुके प्रोफेसरों की पेंशन भी अटक रही है। कुल मिलाकर बजट में अगर विवि की ओर से माँगी गई 64 करोड की राशि मिल जाती है तो तो वेतन और पेंशन की टेंशन तो खत्म होगी ही साथ साथ साथ नए सिरे भी शुरू हो जाएंगे।

फंड हासिल करने से विवि में छात्रों की संख्या बढ़ेगी। विकास के नए अवसर बनेंगे। इतना भर नहीं स्किल डव्ल्प्मेंट जैसी दिशा में बढावा मिलेगा।

बजट में डिजिटल टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। विवि कुलपति प्रो। कपिल देव मिश्र मानते हैं कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को इसका लाभ होगा।

महँकाई कम करने का प्रयास करे सरकार- बजट में मप्र सरकार को अपने हिस्से का वेट टैक्स कम करने का प्रयास करना चाहिए। इससे पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों में गिरावट आएगी और महँगाई पर कुछ हद तक लगाम कसी जागीगी।

-प्रो। मुकेश शाह, अर्थशास्त्री

सरकारी अनुसंधान पर ध्यान देवें- एक समृद्ध राज्य बनने के लिए शोध आवश्यक होता है। इसलिए सरकार को अनुसंधान कार्य को बढ़ावा देना चाहिए। अनुसंधान पर चालान करना चाहिए ऑफ़लाइन स्टडीज की महता बढी है इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार आवश्यक है।

-प्रो। पीके सिंघल, रादुविवि

कब होगी खेती की खेती: 2.75 लाख हेक्टेयर का रकबा फिर भी नहीं

कृषि के क्षेत्र में हर फसल जिले में भरपूर मात्रा में होता है। 2 लाख 75 हजार हेक्टेयर से ज्यादा कृषि रकबा फिर भी किसानों को सुविधाओं के लिए नहीं मिल रहा है। बिजली, पानी सहित उचित प्लेटफॉर्म जिले के किसानों को नहीं मिल रहा है। मटर की फसल यहां बहुतायत में होती है और यहां का मटर विदेशों तक जाता है। इसके बाद भी यहां प्रोसेसिंग यूनिटें नहीं लग रही हैं, कोल्ड स्टोरेज नहीं हैं।

  • बजट में इस दिशा में ध्यान देने की ज़रूरत है कि यहां भी मटर के लिए प्रसंस्करण इकाइयों को लगें और कोल्ड स्टोरेज बनाए रखें।
  • एग्रो हब की दिशा में समय-समय पर घोषणाएं होती रही है उम्मीद है कि इस बजट में किसी बडे निवेश को आकर्षित करने की योजनागी।

अधूरे हैं ये वादे …

  • नर्मदा रिवर लाइन का बजट 10 करोड़
  • शास्त्री ब्रिज नए निर्माण बजट प्रावधान 150 करोड़
  • कैंसर इंस्टीट्यूट में राज्य का बजट नहीं मिला
  • पल्मोनरी इंस्टीट्यूट, न्यूरो इंस्टीट्यूट में बजट का रोना
  • 80 करोड़ से पक्के नालों का योजना बजट अधूरा है
  • डुमना नेचर क्रेडिट प्रोजेक्ट जहां का तन

पॉवर सेक्टर: अब क्वालिटी इम्प्रूवमेंट के लिए जरूरी एक झटका है

पॉवर सेक्टर नए सब स्टेशन निर्माण से लेकर सब्सिडी और नई योजनाओं के लिए राशि मिलने की आस लगाए बैठा है। पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगवाने की योजना है, इसके अलावा निर्बध आपूर्ति के लिए पॉवर सेक्टर को और अधिक मजबूत होने की आवश्यकता है। सरप्लस बिजली के बाद अब क्वालिटी में सुधार की सख्त जरूरत है और इसके लिए भी फंड जरुरी होगा।

  • निजीकरण की स्थिति को देखते हुए प्रदेश सरकार को नई निधि बनाना चाहिए, जिसका बजट में प्रावधान किया जाना चाहिए।
  • पॉवर जनरेटिंग कंपनी की भविष्य की परियोजना श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह में 6 सौ मेगावॉट की दो यूनिटें बनाने का प्रस्ताव है, बजट में राशि मिलने की उम्मीद है।

ट्रैफ़िक प्लान: बना और गायब

शहर की फैलती सीमाओं और यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए लगभग एक दशक पहले शहर के लिए ट्रैफिक प्लान तो तैयार किया गया लेकिन लागू नहीं हो पाया। इसके लिए सभी विभागों की मदद में ट्रैफिक कंप्यूटर के हिसाब से खाका बनाया गया। आगे चलकर बजट की समस्या सामने आई और योजना भी मानो जाम में फंसकर रह गई। इस संबंध में योजना को अमलीजामा पहनाने की कवायद करने वाले तत्कालीन अधिकारियों का कहना था कि बजट के अभाव में योजना लागू नहीं की गई थी। उनका मानना ​​था कि यह केवल संभव हो सकता है जबकि ट्रैफिक प्लान के लिए अलग से बजट में प्रावधान किया जाए।

हैल्थ सेक्टर: अधीर में कई काम हैं

शहर के जिला अस्पताल विक्टोरिया में तकरीबन साल भर पहले कांग्रेस सरकार के समय 200 बिस्तर बढ़ाने की घोषणा हुई थी, जो अब तक घोषणा ही हुई है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज में बरसों से कई प्रोजेक्ट्स लंबित हैं। सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन न्यूरो सर्जरी, सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट सहित मेडिकल अस्पताल की बिल्डिंग का एक्सटेंशन जैसे प्रोजेक्ट्स में कहीं बिल्डिंग बनकर तैयार है तो उपकरण नहीं है, तो स्ट्रक्चर का काम चल रहा है।

लॉ यूनिवर्सिटी: 100 करोड़ चाहिए

जबलपुर के पिपरिया क्षेत्र में 125 एकड़ में बनने वाली धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की भागीदारी के लिए राज्य सरकार ने 338 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए हैं, बिल्डिंग निर्माण का काम शुरू करने के लिए 100 करोड़ रुपए की पहली किश्त का आवंटन भी कर दिया गया है। , लेकिन अभी तक पहले किश्त की राशि रिलीज नहीं की गई है। इसके कारण लॉ यूनिवर्सिटी को प्रतिवर्ष 6 करोड़ रुपए किराया देना पड़ रहा है।

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