Home उत्तर प्रदेश एक साल बाद स्कूलों का सन्नाटा टूट गया

एक साल बाद स्कूलों का सन्नाटा टूट गया


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बांदा। कोरोना संक्रमण काल ​​के दौरान दहशत में बंद कर दिया गया परिषदीय स्कूल लगभग एक साल बाद सोमवार को नए कलेवर के साथ खुला। स्कूलों को मेन गेट से लेकर दुकानों तक किसी समारोह स्थल की तर्ज पर खेल और संवारा गया था। कई स्कूलों में प्रवेश और फूलों की सजावट की गई थी। एक साल बाद उत्साह से भरे परिषदीय स्कूल के बच्चों ने जैसे ही स्कूल के गेट पर दस्तक दी, तो दंडधजा स्कूल देखकर अचरज में पड़ गए। इस दौरान बच्चों का गेट पर तिलक लगाकर इस्तकबाल किया गया। किसी स्कूल में बच्चों को टॉफी दी गई तो कहीं पर फल दिए गए। लंबी अरसे के बाद स्कूल आए बच्चों में भी अलग जोश था। पहले दिन श्रेणियों में गुरुजनों ने पाठ्य पुस्तकों की कहानियों का अध्ययन किया। बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिश्चंद्र नाथ के अनुसार पहले दिन लगभग 40 प्रति बच्चों ने उपस्थिति दर्ज कराई। 50 प्रति बच्चों को ही बुलाने का निर्देश था। पहले दिन, 5 वीं और 6 वीं की कक्षा शुरू हुई।
इन्सेट —
फोटो परिचय -4: कंचन
सजा-संवरा स्कूल अच्छा लगा
परिषदीय विद्यालय, पल्हरी में 5 वीं की छात्रा कंचन स्कूल में बेहद खुश थी। बोली- एक साल बाद वापसी हुई। घर में माता-पिता इत्यादि कोई शिक्षित नहीं है। इसलिए खुद ही पढ़ाई की। सजे-संवरे स्कूल में आज आना अच्छा लगा। अब कठिन पढ़ाई से कोर्स पूरा करेंगे।
इन्सेट —
फोटो परिचय -5: नेहा
कहानियां सुनीं, सहेलियों से मुलाकात की
परिषदीय विद्यालय, छत्रसाल की छात्रा नेहा स्कूल का बदला स्वरूप देखकर काफी गदगद थी। बताया कि पूरे साल घर में अकेले पढ़ाई और खेलकूद कर बिताई। पहले दिन कक्षा में शिक्षिका ने पुस्तक की कहानियां सुनाईं और ब्लैक बोर्ड में लिखकर निर्दिष्ट किया। सहेलियों से मिलकर अच्छा लगा।
इन्सेट —
फोटो परिचय-6-शक
दैनिक हो यही माहौल
प्राथमिक विद्यालय, छावनी में 5 वीं कक्षा के छात्रक पूरे कोर्स की किताबों का बस्ता लेकर आया था। स्कूल की बदली सूरत देखकर अचंभित हुआ। सब कुछ बदला-बदला सा था। रोजाना ऐसा ही स्कूल और माहौल मिला तो स्कूल के छात्र-छात्राओं को भी पठन-पाठन का अच्छा मौका मिलेगा।
इन्सेट —
फोटो परिचय-7-अभय
मैडम नेकेडकर को प्रस्तुत किया फल
प्राथमिक विद्यालय, बलखंडी नाका के छात्र अभय के माथे पर टीका था। पूछने पर बताया कि स्कूल आते ही गेट पर मैडम ने पहले टीका लगाया फिर फल दिया। गेट से लेकर कक्षा तक मीटर लगे हुए हैं। यह सब कुछ पहली बार बहुत अच्छा लगा। दोस्तों से भी काफी दिनों बाद भेंट हुई।
इन्सेट —
फोटो परिचय-17-जिलाई बेगम
अपने स्कूल के बच्चों से एक साल की दूरी अच्छी नहीं शुरू हुई। आज उनकी वापसी हुई तो हम गुरुजनों को भी खुशी हुई। बड़े अफसरों के निर्देश के अनुसार बच्चों का स्वागत किया गया और स्कूल भी बच्चों-संवारा। अब पूरी तरह से पुराने अध्ययनों का माहौल बदल जाएगा।
-जिलाई बेगम, प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक कम्पोजिट स्कूल, बलखंडी नाका।
इन्सेट —
फोटो परिचय-18-सतरूपा देवी
बच्चों को स्कूल में देखकर प्रसन्नता हुई। गाइडलाइन के अनुसार स्कूल को व्यवस्थित किया गया है। कक्षाएं सजाई गई हैं। स्कूल आने वाले बच्चों के अभिभावकों से सहमतिपत्र लिया गया है। वर्तमान में उनका उत्साहवर्धन और रुचि बढ़ाने के लिए कोर्स की कविताओं और कहानियों का अध्ययन और सुनाई जा रही हैं।
– सतरूपा देवी, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, पल्हरी।

बांदा। कोरोना संक्रमण काल ​​के दौरान दहशत में बंद कर दिया गया परिषदीय स्कूल लगभग एक साल बाद सोमवार को नए कलेवर के साथ खुला। स्कूलों को मेन गेट से लेकर श्रेणियों तक किसी समारोह स्थल की तर्ज पर खेल और संवारा गया था। कई स्कूलों में प्रवेश और फूलों की सजावट की गई थी। एक साल बाद उत्साह से भरे परिषदीय स्कूल के बच्चों ने जैसे ही स्कूल के गेट पर दस्तक दी, तो दंडधजा स्कूल देखकर अचरज में पड़ गए। इस दौरान बच्चों का गेट पर तिलक लगाकर इस्तकबाल किया गया। किसी स्कूल में बच्चों को टॉफी दी गई तो कहीं पर फल दिए गए। लंबी अरसे के बाद स्कूल आए बच्चों में भी अलग जोश था। पहले दिन श्रेणियों में गुरुजनों ने पाठ्य पुस्तकों की कहानियों का अध्ययन किया। बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिश्चंद्र नाथ के अनुसार पहले दिन लगभग 40 प्रति बच्चों ने उपस्थिति दर्ज कराई। 50 प्रति बच्चों को ही बुलाने का निर्देश था। पहले दिन, 5 वीं और 6 वीं की कक्षा शुरू हुई।

इन्सेट —

फोटो परिचय -4: कंचन

सजा-संवरा स्कूल अच्छा लगा

परिषदीय विद्यालय, पल्हरी में 5 वीं की छात्रा कंचन स्कूल में बेहद खुश थी। बोली- एक साल बाद वापसी हुई। घर में माता-पिता इत्यादि कोई शिक्षित नहीं है। इसलिए खुद ही पढ़ाई की। सजे-संवरे स्कूल में आज आना अच्छा लगा। अब कठिन पढ़ाई से कोर्स पूरा करेंगे।

इन्सेट —

फोटो परिचय -5: नेहा

कहानियां सुनीं, सहेलियों से मुलाकात की

परिषदीय विद्यालय, छत्रसाल की छात्रा नेहा स्कूल का बदला स्वरूप देखकर काफी गदगद थी। बताया कि पूरे साल घर में अकेले पढ़ाई और खेलकूद कर बिताई। पहले दिन कक्षा में शिक्षिका ने पुस्तक की कहानियों सुनीईं और ब्लैक बोर्ड में लिखकर निर्दिष्ट किया। सहेलियों से मिलकर अच्छा लगा।

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फोटो परिचय-6-शक

दैनिक हो यही माहौल

प्राथमिक विद्यालय, छावनी में 5 वीं कक्षा के छात्रक पूरे कोर्स की किताबों का बस्ता लेकर आया था। स्कूल की बदली सूरत देखकर अचंभित हुआ। सब कुछ बदला-बदला सा था। रोजाना ऐसा ही स्कूल और माहौल मिला तो स्कूल के छात्र-छात्राओं को भी पथन-पाठन का अच्छा मौका मिलेगा।

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फोटो परिचय-7-अभय

मैडम नेकेडकर को प्रस्तुत किया फल

प्राथमिक विद्यालय, बलखंडी नाका के छात्र अभय के माथे पर टीका था। पूछने पर बताया कि स्कूल आते ही गेट पर मैडम ने पहले टीका लगाया फिर फल दिया। गेट से लेकर कक्षा तक मीटर लगे हुए हैं। यह सब कुछ पहली बार बहुत अच्छा लगा। दोस्तों से भी काफी दिनों बाद भेंट हुई।

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फोटो परिचय-17-जिलाई बेगम

अपने स्कूल के बच्चों से एक साल की दूरी अच्छी नहीं शुरू हुई। आज उनकी वापसी हुई तो हम गुरुजनों को भी खुशी हुई। बड़े अफसरों के निर्देश के अनुसार बच्चों का स्वागत किया गया और स्कूल भी बच्चों-संवारा। अब पूरी तरह से पुराने अध्ययनों का माहौल बदल जाएगा।

-जिलाई बेगम, प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक कम्पोजिट स्कूल, बलखंडी नाका।

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फोटो परिचय-18-सतरूपा देवी

बच्चों को स्कूल में देखकर प्रसन्नता हुई। गाइडलाइन के अनुसार स्कूल को व्यवस्थित किया गया है। कक्षाएं सजाई गई हैं। स्कूल आने वाले बच्चों के अभिभावकों से सहमतिपत्र लिया गया है। वर्तमान में उनका उत्साहवर्धन और रुचि बढ़ाने के लिए कोर्स की कविताओं और कहानियों का अध्ययन और सुनाई जा रही हैं।

– सतरूपा देवी, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, पल्हरी।





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