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कंटेट के लिए साहित्य का नया बाजार: बॉलीवुड-ओटीटी में साहित्य के समुद्र से कहानियां निकालने का नया ट्रेंड, राइट्स की अवतरण


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मुंबई41 मिनट पहलेलेखक: मुंबई से मनीषा भल्ला

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फिल्मी कहानियों में लौटा साहित्य का दौर, लोकेशन्स से संपर्क में तेजस्वी हाउस।

भारत में ओटीटी (ओवर द टॉप स्ट्रीमिंग) के बढ़ते बाज़ार के चलते अरजनल कंटेंट की माँग ज़ोर पकड़ रही है। नया, ऑरिजनल, सहज, मासूम, छोटे गांव-कस्बे, क्राइम थ्रिलर, सस्पेंस की कहानियां ओटीटी का नया बाजार है। इसके लिए प्रसादयूसर-डायरेक्टर ने अब फिल्म राइटर को दो लाइन देकर बेजान कहानी डेवलपर करवाने के बजाय साहित्य के समुद्र से कहानियां निकालने का नया ट्रेंड शुरू किया है।

एक जमाना था जब गाइड, तीसरी कसम, नौकर की कमीज, शतरंज के खिलाड़ी, रजनीगंधा, सारा आकाश जैसी सुपरहिट फिल्में साहित्य की देन थीं। अरिजनल और क्वालिटी कंटेंट की कमी से जूज़ रहे ओटीटी और बॉलीवुड ने एक दफा फिर से किताब जगत में गोते लगाकर बेहतरीन कहानियों की तलाश शुरू की है। हाल ही में कई प्रोड्यूसर-डायरेक्टर्स ने कुछ किताबों के रेन्स के लिए हैं और कुछ प्रोडक्शन हाउस की पब्लिशिंग हाउस से डील के लिए बातचीत जारी है। सूत्रों का कहना है कि खादुसर डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने रुपहले पर्दे के लिए श्रीलाल शुक्ला के उपन्यास रागदरबारी के रेक्स ले के लिए हैं।

नेटफ्लिक्स की टॉपहिट फिल्म ‘शी’ के निर्देशक अविनाश दास बताते हैं कि हाल ही में उन्होंने खुद निखिल प्रमुख के अंग्रेजी नॉवेल दि कोल्ड ट्रुथ के राइट्स हैं। उनके अनुसार जिस तरह से किताबों के रेक्स लेने का काम चल रहा है, कहा जा सकता है कि यह लंबी किताबें फिल्मी कहानियों का बड़ा स्रोत बन रही हैं।

वाणी प्रकाशन की डायरेक्टर अदिति महेश्वरी का कहना है कि मुंबई के प्रधानजान हाउस ने जिन किताबों के लिए संपर्क किया है उनमें मनोहर श्याम जोशी और नरेंद्र कोहली के उपन्यास शामिल हैं। उनके अलावा वाणी ने हॉरर सीरीज में कई उपन्यास छापे थे जिसमें कई प्रोडक्शन हाउस ने इंटर की है। साहित्यकार गीताश्री भी एक प्रोडक्शन हाउस के लिए यूपी पर आधारित कहानी लिख रही हैं।

वह बताती हैं कि उन्हें खासतौर पर उत्तर प्रदेश आधारित कहानियां पूछी गई हैं। ओटीटी के लिए भारत न केवल नया बल्कि सबसे तेजी से बढ़ते हुए संस्करणों में से एक है। वर्ष 2024 में भारत ओटीटी के लिहाज से दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश बन जाएगा। क्वालवाटरहाउस कूपर्स (पीडब्लसी) की एक रिपोर्ट बताती है कि कोविड की वजह से ओटीटी के बिजनेस को चंद्रमा मिला है और यह लगातार जारी रहेगा।

वर्ष 2024 तक इसकी 5 बिलियन डॉलर तक होने की संभावना है। इस वक्त देश में अंदाजन 40 ओटीटी प्लेटफॉर्म हैं। इतनी बड़ी तादाद में ओटीटी प्लेटफॉर्म हैं और बहुत ही लगभग पाइपलाइन में हैं तो इसके लिए अरजनल कंटेंट भी चाहिए। जाहिर है जब प्लेटफॉर्म इतने हैं तो गलाकाट कंटेट भी चाहिए, जिसमें किताबें काम करेंगी।

महाश्वेता देवी के ‘जंगल के दावेदार’ से सत्य व्यास के ‘बागी बलिया’ तक सबके उल्लुओं को ले जाने वाली फिल्मकार
नीलोत्पल मृणाल के उपन्यास ‘द डार्क हाउस’, शशिकांत मिश्रा के उपन्यास ‘नॉन रेजिडेंट बिहारी’ और सत्य व्यास के उपन्यास ‘बागी बलिया’ के राइट्स भी ले लिए गए हैं। राजकमल प्रकाशन के डायरेक्टर अलिंद माहेश्वरी बताते हैं कि फिल्मों के लिए उनकी कई कालजयी रचनाओं के राइट्स ले लिए गए हैं लेकिन इसकी घोषणा प्रोडक्शन हाउस ही करें तो अच्छा है।

अलिंद के अनुसार जिन किताबों पर अग्रज हाउस से लगभग बात फाइनल है, वे हैं- महावेशेता देवी का उपन्यास ‘जंगल के दावेदार’, नव चौधरी का ‘सार्वजनिक स्टोर’, अनुराधा बेनीवाल का ‘आजादी’ ब्रांड, अवधेश प्रीत का ‘अशोक राजपूत’ ‘, मनोहरश्याम जोशी का’ कसप ‘उपन्यास।

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