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कभी इस शख्स ने शुरू की देश की सबसे बड़ी डेयरी कंपनी, अब रोजाना कमाती है 90 करोड़


कैसे कुरियन ने शुरू किया इतना बड़ा कारोबार

आज देशभर में नेशनल मिल्क डे (National Milk Day) मनाया जाता है. खास बात यह है कि इस दिन भारत में श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन (Verghese Kurien) का जन्मदिन होता है. जानिए वर्गीज के जीवन की 7 अहम बातें..


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 26, 2019, 11:54 AM IST

नई दिल्ली. आज देशभर में नेशनल मिल्क डे (National Milk Day) मनाया जाता है. खास बात यह है कि इस दिन भारत में श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन (Verghese Kurien) का जन्मदिन होता है. वर्गीज देश के जाने माने डेयरी प्रोडक्ट ब्रैंड अमूल (AMUL) के फाउंडर हैं. अमूल अपने बेस्ट प्रोडक्ट क्वलिटी से देश में नंबर वन डेयरी प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी बनी हुई. इसकी रोजाना की आमदनी 90 करोड़ रुपये से ज्यादा है. आइए आपको बताते हैं कि कैसे कुरियन ने शुरू किया इतना बड़ा कारोबार..

(1) अमूल ने 1945-46 में कारोबार शुरू किया था. इसकी शुरुआत Bombay Milk Scheme के साथ हुई थी. सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सहकारी योजना की नींव रखी थी. उसके बाद 14 दिसंबर 1946 को सहकारी सोसाइटी के तौर पर इसका रजिस्ट्रेशन हुआ.

(2) देश को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर करने के साथ ही किसानों की दशा सुधारने के लिए वर्गीज कुरियन ने इसकी शुरुआत की. कुरियन को ‘भारत का मिल्कमैन’ भी कहा जाता है. एक समय जब भारत में दूध की कमी हो गई थी, कुरियन के नेतृत्व में भारत को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम शुरू हुआ. उन्होंने त्रिभुवन भाई पटेल के साथ मिलकर खेड़ा जिला सहकारी समिति शुरू की. साल 1949 में उन्‍होंने गुजरात में दो गांवों को सदस्य बनाकर डेयरी सहकारिता संघ की स्थापना की. भैंस के दूध से पाउडर का निर्माण करने वाले कुरियन दुनिया के पहले व्यक्ति थे. इससे पहले गाय के दूध से पाउडर का निर्माण किया जाता था.

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(3) शुरुआत में कंपनी की क्षमता 250 लीटर प्रति दिन की थी. इस समय अमूल कंपनी के कुल 7.64 लाख मेंबर्स हैं. कंपनी रोजाना 33 लाख लीटर दूध का कलेक्शन करती है. कंपनी की रोजाना 50 लाख लीटर की हैंडलिंग क्षमता है. कंपनी का पूरी दुनिया के दूध उत्पादन में 1.2 प्रतिशत हिस्सा है.

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(4) अमूल की सफलता पर तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने अमूल मॉडल को दूसरी जगहों पर फैलाने के लिए राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (एनडीडीबी) का गठन किया और उन्हें बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया. एनडीडीबी ने 1970 में ‘ऑपरेशन फ्लड’ की शुरुआत की जिससे भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया. कुरियन ने 1965 से 1998 तक 33 साल एनडीडीबी के अध्यक्ष के तौर पर सेवाएं दीं. वह 1973 से 2006 तक गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड के प्रमुख और 1979 से 2006 तक इंस्टीट्‍यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट के अध्यक्ष रहे.

(5) मिल्कमैन ऑफ इंडिया बने कुरियन के निजी जीवन से जुड़ी एक रोचक और दिलचस्प बात यह है कि देश में ‘श्वेत क्रांति’ लाने वाला और ‘मिल्कमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर यह शख्स खुद दूध नहीं पीता था. वह कहते थे, मैं दूध नहीं पीता क्योंकि मुझे यह अच्छा नहीं लगता.

(6) कुरियन का जन्म केरल के कोझिकोड में 26 नवंबर, 1921 में हुआ. उन्होंने चेन्नई के लोयला कॉलेज से 1940 में विज्ञान में स्नातक किया और चेन्नई के ही जी. सी. इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की. जमशेदपुर स्थित टिस्को में कुछ समय काम करने के बाद कुरियन को डेयरी इंजीनियरिंग में अध्ययन करने के लिए भारत सरकार की ओर से छात्रवृत्ति दी गई.

(7) बेंगलूर के इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हसबेंड्री एंड डेयरिंग में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कुरियन अमेरिका गए जहां उन्होंने मिशीगन स्टेट यूनिवर्सिटी से 1948 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में अपनी मास्टर डिग्री हासिल की, जिसमें डेयरी इंजीनियरिंग भी एक विषय था. भारत लौटने पर कुरियन को अपने बांड की अवधि की सेवा पूरी करने के लिए गुजरात के आणंद स्थित सरकारी क्रीमरी में काम करने का मौका मिला.

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