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कुछ समय पहले बहू ने पीटा भी था: जीवन भर शान से जिए थे, पर बरकरार होने के बाद बहू के पल-पल बेइज्जत करने से घोण में रिटायर्ड एसडीओ थे।


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  • वह दयापूर्वक अपना सारा जीवन जीते थे, लेकिन सेवानिवृत्त होने के बाद, सेवानिवृत्त एसडीओ को कानून में बेटी का अपमान करने के कारण पीड़ित किया गया।

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गोलमाल करनेवाला10 मिनट पहले

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रिटायर्ड एसडीओ का विनय नगर स्थित घर, यही वह प्रॉपर्टी है जिसके बारे में सारा विवाद था

  • ठान लिया था कि खुदकुशी कर इस घोण से आजाद होंगे
  • एक दिन पहले लिखित नोट, जल्द उठकर मार ली खुद को गोली

खुद को गोली मारकर खुदकुशी करने वाले रिटायर्ड एसडीओ के बारे में पता लगा दिया है कि वह काफी जिंदादिल इंसान थे। नौकरी से लेकर जीवन के हर पल को उन्होंने शान से जिया, लेकिन उनकी जिंदगी में तूफान उनके बनाए रहने के बाद आया। रिटायर्ड होने के बाद जब वह बिलासपुर से ग्वालियर आया तो बड़ी बहू ने उन्हें पल-पल पर बेइज्जत किया। कई बार वह इसलिए चुप रहा कि समाज में उनकी क्या इज्जत रहेगी, लेकिन बहू के बार-बार उन्हें बेइज्जत करने की बात कहने से वह घुटन में रहने लगे थे। कुछ समय से उनका यह घुटन चेहरे पर दिखने लगा था। यही कारण था कि उन्होंने निर्णय लिया था कि अब वह इस तरह जीवन नहीं जिएंगे। बहू को समझाना मुश्किल था इसलिए उन्होंने खुद की जान देना ही मुनासिब को समझा।

रात को ही लिखकर रखा गया था सुसाइट नोट

यह तो तय था कि 62 वर्षीय रिटायर्ड एसडीओ राजेन्द्र सिंह राजपूत ने पहले ही तय कर लिया था कि वह यह आत्मघाती कदम उठाने वाले हैं। रात को ही वेसाइड नोट लिख लिया गया था, क्योंकि मंगलवार सुबह उठने के बाद 8.15 बजे उन्होंने अलमारी से अपना 12 बोरॉन हटाकर उसमें कारतूस लगाया और खुद को गोली मार ली। यूसाइड नोट उनके पजामे की जेब से मिला है। गोली की आवाज सुनकर पत्नी बेड रूम में पहुंची तो घटना का पता लगा। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को निगरानी में लेकर मर्ग कायम कर लिया है।

कुछ दिन पहले ही साफ करवाया गया था

एसडीओ के दिमाग में बनाए रखा गया काफी समय से यह कदम उठाने का विचार चल रहा है। उनके एक रिश्तेदार से पता लगा है कि कुछ समय पहले ही उन्होंने अलमारी से अपनी अनुप्रयोगोंेंसी 12 बोर की दोनाली बंदूक की सफाई कर उसे बाहर रखा था। मंगलवार की घटना के बाद जब फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची तो बंदूक की जांच में उसने दोनों कमरों में गोली चलाई थी। एक स्पिन में जिंदा कारतूस था तो दूसरे में गए हुए गोली का खोयाका फांसा था। इससे साफ है कि रिटायर्ड एसडीओ ने बंदूक को अच्छी तरह लोड किया था।

कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं

मृतक नेसाइड नोट में बड़ी बहू प्रीति, समधी परिमल सिंह, बहू के भाई प्रमोद उर्फ ​​चिंटू और मनीष को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया है। जिस मकान में उन्होंने यह कदम उठाया है उसी को बहू अपने नाम पर करना चाहती थी। पर घटना से लेकर शाम तक इस मामले में कोई बोलने को तैयार नहीं था। घर में माहौल गमगीन है। रिश्तेदारों का आना जाना लगा हुआ है। पुलिस भी अभी तक पूछताछ नहीं कर पाई है।

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