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कृषि क्षेत्र में बजट पर मोदी: पीएम ने कहा- समय आ गया है कि खेती में केंद्रीय क्षेत्र का योगदान बढ़ेगा, किसान गेहूं-चावल उगाने तक सीमित रहेगा।


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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे यहां कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग लंबे समय तक किसी न किसी रूप में की जा रही है। हमें किसानों को इस तरह के उपलब्ध उपलब्ध करवानी है, जो जमीन के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग हमारे देश में पहले से होता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एग्रीकल्चर सेक्टर में रिसर्च एंड डेवलपमेंट को लेकर ज्यादातर योगदान पब्लिक सेक्टर का है। अब समय आ गया है कि इसमें केंद्रीय क्षेत्र का योगदान भी बढ़ेगा। होलिस्टिक अप्रोच चाहिए, पूरा साइकल होना चाहिए। हमें किसानों को ऐसा विकल्प देना चाहिए कि वे गेहूं-चावल उगाने तक ही सीमित रहें। प्रधानमंत्री कृषि क्षेत्र में बजट लागू करने को लेकर हुए वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ‘हमें किसानों को ऐसी टीमें, ऐसे बीज उपलब्ध करवाने हैं जो जमीन के लिए उपयोगी हों और जिनमें न्यूट्रिशन की मात्रा हो सकती हैं। हमें एग्रीकल्चर सेक्टर से जुड़े स्टार्टअप को बढ़ावा देना होगा, युवाओं को जोड़ना होगा। कोरोना के समय हमने देखा है कि कैसे स्टार्टअप्स ने पैरों और सब्जियों को लोगों के घरों तक पहुंचाया। देखा गया है कि ज्यादातर स्टार्टअप युवाओं ने ही शुरू किया है। ‘

भारत को खाद्य प्रसंस्करण क्रांति की जरूरत है
मोदी ने कहा, ‘लगातार बढ़ते हुए कृषि उत्पादन के बीच 21 वीं सदी में भारत को खाद्य प्रसंस्करण क्रांति और वेल्यू एडिशन की आवश्यकता है। देश के लिए बहुत अच्छा होता है, अगर ये काम 2-3 दशक पहले ही कर लिया जाता है। अब जो समय बीत गया है, उसकी भरपाई तो करनी ही है, आने वाले दिनों के लिए अपनी तैयारी और तेजी को भी बढ़ाना है।

माइक्रो इरिगेशन फंड की राशि बढ़ाकर दोगुनी कर दी गई है। देश की 1000 और मंडियों को ई-नाम से जोड़ने का फैसला लिया गया है। इन सभी फैसलों में सरकार की सोच झलकती है, टाइप महसूस होता है और सरकार के विजन का पता चलता है।)

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ‘हमें एग्रीकल्चर के हर क्षेत्र में प्रसंस्करण पर सबसे ज्यादा फोकस करना है। इसके लिए जरूरी है कि किसानों को अपने गांव के पास ही स्टोरेज की सुविधा मिले। खेत से प्रसंस्करण इकाई तक पहुंचाने की व्यवस्था सुधारनी ही होगी। हम सब जानते हैं कि खाद्य प्रसंस्करण क्रांति के लिए किसानों के साथ ही सार्वजनिक केंद्रीय को-ऑपरेटिव सेक्टर को पूरी ताकत से आगे आना होगा।

हमें देश के एग्रीकल्चर सेक्टर का संपूर्ण खाद्य के वैश्विक बाजार में विस्तार करना ही होगा। ऑर्गेनिक क्लस्टर, एक्सपोर्ट क्लस्टर की भी बहुत बड़ी भूमिका होगी। अभी भी लाखों माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट चल रहे हैं, लेकिन उनकी सामर्थ्य को बढ़ाना आज की जरूरत है। ‘

फिशरीज सेक्टर में प्रोसेसिंग का स्कोप
उन्होंने कहा कि सिर्फ खेती ही नहीं, यहाँ तक कि फिशरीज सेक्टर में प्रोसेसिंग का भी बहुत बड़ा स्कोप है। भले ही हम दुनिया के बड़े फिश एक्सपोर्टर में से हैं, लेकिन वैश्विक बाजार में उपस्थिति बहुत सीमित है। ये स्थिति बदलनी होगी। इसके लिए आवश्यक रिफॉर्म्स के अलावा लगभग 11000 करोड़ रुपये की प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव स्कीम सरकार ने बनाई है, जिसका लाभ आप उठा सकते हैं।

50% तय किया जा रहा है
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के तहत किसान रेल के लिए सभी पैरों और सब्जियों के परिवहन पर 50% सब्सिडी दी जा रही है। किसान रेल भी आज देश के कोल्ड स्टोरेज का सशक्त माध्यम बनी हुई है। बीते 6 महीने में ही लगभग 275 किसान रेलें चलाई जा चुके हैं। इन छोटे किसानों के लिए बहुत बड़ा माध्यम तो हैं ही, कंज्यूमर और इंडस्ट्री को भी इसका फायदा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर अभियान के तहत लाखों छोटी खाद्य और प्रसंस्करण इकाइयों को मदद की जा रही है। खाद्य प्रसंस्करण के साथ ही इस बात पर ध्यान देना है कि छोटे से छोटे किसान को भी आधुनिक तकनीक का लाभ कैसे मिले। क्या कनेक्टर और दूसरी मशीनों को शेयर करने का एक सस्ता विकल्प किसानों को दिया जा सकता है। आज जब हवाई जहाज को घंटों के हिसाब से किराए पर ले जा सकते हैं, तो किसानों के लिए भी ऐसी व्यवस्था की जा सकती है।

सोइल हेल्थ कार्ड गाँव-गाँव तक पहुँचाने वाले होंगे
उन्होंने कहा कि खेती से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पहलू सॉयल टेस्टिंग का है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं। हमें सॉयल हेल्थ कार्ड की टेस्टिंग की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचानी है। इसमें मुख्य पार्टी बहुत बड़ी मात्रा में जुड़ सकती हैं। एक बार किसानों को सोइल टेस्टिंग की आदत हो जाएगी, अपनी जमीन की सेहत को लेकर वे जागरूक होंगे, तो उन्हें फायदा होगा।

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