Home देश की ख़बरें कोरोना काल में छूट 21 लाख कैंशे, अब लगेंगे जानलेवा बीमारियों के...

कोरोना काल में छूट 21 लाख कैंशे, अब लगेंगे जानलेवा बीमारियों के टीके


नई दिलवाली वर्ष 2020 में कोरोना (कोरोना) ने न केवल अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों के इलाज में भी रुकावटें पैदा कर दीं बल्कि बल्कि दक्षिण अफ्रीका को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए लगने वाले जरूरी और नियमित टीके भी नहीं लग पाए। इसकी वजह से पिछले साल करीब 21 लाख कैंचे इन टीकर से वंचित रह गए। हालांकि केंद्र सरकार ने कोविद काल में नियमित वैक्लाइन (वैक्सीन) से छूटे इन कैंसिलन के लिए मिशन इंद्रधनुष 3.0 शुरू (मिशन इंद्रधुनष 3.0) किया है।

मिशन कोको 3.0 में 90 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्‍य रखा गया है। साथ ही 2020 में टीकाकरण में आई 26 प्रति कमी को भरने का उद्धरणेश बनाया गया है। इसमें वैक्सीन ड्रापआउड बच्चों को पुनः मिशन से जोड़ा जाएगा। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 की अपेक्षा वर्ष 2020 में टीकाकरण में 26 प्रतिशत की कमी देखी गई। हालांकि अब कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए एक बार फिर जरूरी जीवन रक्षक वैक्सीन दी जाएगीगें।

स्वास्तथ मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले साल ही स्वास्थ्य सेवाओं पर लॉकडाउन के असर को देखते हुए गृह मंत्रालय ने 15 अप्रैल 2020 को जारी आदेश में कहा था कि नियमित टीकाकरण एक अनिवार्य प्रक्रिया है, इसपर लॉकडाउन का असर नहीं पड़ना चाहिए। इसके बावजूद साल 2020 में 21 लाख देशों की टीके से वंचित रह गए थे।

कोरोना काल में कुछ स्थानों पर स्वास्थ्य कर्मियों की कमी, मज़दूरों का पलायन और संक्रमण के जोखिम की वजह से टीकाकरण नहीं हो पाया था। स्वास्थ्य प्रबंधन इन्फारमेशन सिस्टम (एचएमआईआईएस) की ओर से नौ अक्टूबर 2020 को जारी आंकड़ों में बताया गया कि वर्ष 2019 में मार्च से जून के बीच कुल 8,440,136 बच्चों का टीकाकरण हुआ, जबकि वर्ष 2020 में मार्च से जून के बीच 6,276,798 बच्चों का टीकाकरण किया गया। । ऐसे में वर्ष २०१ ९ के मुकाबले वर्ष २०२० में २१,६३,३३ बच्चों कम बच्चों का टीकाकरण किया गया या किसी कारण से वह टीकाकरण के लिए उपलब्ध नहीं हुए।अब सर्विलांस से चरण बच जाएंगे

मंत्रालय के अनुसार कोविड के कारण वैक्सीन ड्रापआउट बच्चों को सर्विसेजलांस के जरिए दोबारा जोड़ा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन कार्यक्रम के तहत महिला और बच्चों की 10 जानलेवा बिमारियों से रक्षा की जाती है। ये दस जानलेवा बिमारियां, डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, खेसरा, रूबेला, बच्चों का टीबी, रोटावायरस, डायरिया, हेपेटाइटिस बी, मेनिनजाइटिस, हीमोफिलिक इन्फ्लूजा, न्यूमोकॉकल और जैपनीज इंसेफलाइटिस।

दो फेज में एक महीने चलेगा मिशन इन्द्रधनुष

सरकार की ओर से तय किए गए वैक्सिनेशन को पूरा करने के लिए सरकार दो चरणों में इंटेंसिफाइड मिशन इन्द्रधनुष (आईएमआई) शुरू कर रही है। पहला चरण 22 फरवरी से शुरू हो चुका है और दूसरा चरण 22 मार्च से शुरू होगा। प्रत्येक चरण पन्द्रह दिन के लिए होगा। इस अवधि के दौरान शिक्षा का टीकाकरण किया जाएगा।

जानें, क्या नियमन है

स्वास्थ्य मंत्रालय ने वर्ष 1985 में यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) शुरू किया था। इसमें ऐसी बिमारियों को शामिल किया गया था जिनसे वैक्सीन से रक्षा कवच बनाया जा सकता था। वर्तमान में 2.6 करोड़ बच्चे और 2.9 गर्भवती महिलाओं को हर साल नियमितीकरण के तहत वैक्सीन दी जाती है। हालांकि जेपीनीज इंसेफेलाइटिस (जेई) की वैक्सीन इन्फ जिलों में ही दी जाती है। वर्ष 2014 में नियमितीकरण कार्यक्रम को मिशन इन्द्रधनुष के साथ नए कलेवर में शुरू किया गया। जिसके बाद देशबंदी में वृद्धि के बाद तेजी से वृद्धि हुई। मिशन इन्द्रदर्शन के अब तक आयोजित दो कैंपेन की मदद से 3.76 करोड़ बच्चों और 94.6 लाख गर्भवती महिलाओं को जोड़ा गया है।

ईविन उपकरण से मधुमक्खीकरण की देखरेख

इलेक्ट्रानिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (ईविन) प्लेटफॉर्म के जरिए राज्यों से टीकाकरण की जिले की सूचना एकत्र की जाएगी। जिसमें वैक्सीन संरक्षण के अलावा वैक्सीन की उपलब्धता का भी पता लगाया जा सकेगा। सेफवैक के जरिए वैक्सीन लेने के बाद किसी तरह के एडवर्स इवेंट फॉलोविंग इम्यूजाइजेशन (एईएफआई) के मामलों की जानकारी तुरंत दी जा सकेगी।

2019 में हुआ 91 प्रतिशत टीकाकरण था

कोरोना काल से ठीक पहले वर्ष 2019 में देश के मिशन इन्द्रधनुष ने 91 प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को प्राप्त किया था। डब्लूएचओ / वर्दीसेफ के अनुसार वर्ष 2019 में भारत की पेंटा थ्री राष्ट्रीय टीकाकरण कवरेज की दर 91 प्रतिशत देखी गई। वर्ष 2006 में 65, वर्ष 2007 में 64 और वर्ष 2017 में 89 प्रतिशत टीकाकरण हुआ।





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments