Home खेल जगत क्या टेनिस में अंडर -30 के युवा बेडम हैं: मेन्स सिंगल्स में...

क्या टेनिस में अंडर -30 के युवा बेडम हैं: मेन्स सिंगल्स में क्यों जोकोविच, नडाल और फेडरर ही जीतते हैं ग्रैंड स्लैम; पिछले 20 में 18 खिताब तीनों ने जीते थे


  • हिंदी समाचार
  • खेल
  • क्यों टेनिस खिलाड़ियों की नई पीढ़ी थिअम, मेदवेदेव, त्सित्सिपास, ज्वेरेव, रुबलेव फेडरर, नडाल या जोकोविच को ग्रैंड स्लैम में मात देने में सक्षम नहीं है?

विज्ञापन से परेशान हैं? बिना विज्ञापन खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

नई दिल्ली7 मिनट पहले

  • कॉपी लिस्ट

साल के पहले ग्रैंड स्लैम ट्रांसपेरियन ओपन के फाइनल में 33 साल के नोवाक जोकोविच ने 25 साल के डेनिल मेदवेदेव को हरा दिया। उनकी जीत से एक सवाल जो फिर से उठने लगा, वह यह है कि क्या अंडर -30 के युवा बेडम हैं? क्या उनमें जोकोविच, राफेल नडाल (34 वर्ष) और रोजर फेडरर (39 वर्ष) में हराने का जोश नहीं है?

कौन सी ऐसी चीज है जो मौजूदा जनधन मिस कर रही है? ऐसा इसलिए क्योंकि 2003 विंबलडन से लेकर 2021 तक लगातार ओपन तक 70 ग्रैंड स्लैम खिताबों में से फेडरर, नडाल और जोकोविच ने मिलकर 58 ग्रैंड स्लैम जीते हैं। वहीं, पिछले 20 में से 18 ग्रैंड स्लैम उसी में तीनों हैं। बाकी एक डॉमिनिक थिएम और एक एंडी मरे ने जीता है।

बिग्र थ्री क्यों मजबूत: 3 साधारण से जवाब
बिग थ्री के जीतने के 3 बहुत ही साधारण से जवाब हैं। पहला, शेड्यूल में सुधार और रिकवरी टाइम को मजबूत करना। दूसरा है अनुभव और तीसरा है कई तरह के दौरे के अलग-अलग तरह के फॉर्मेट। इससे युवा खिलाड़ियों के मानसिक और शारीरिक स्ट्रेंथ पर काफी फर्क पड़ता है।

शीर्ष -10 खिलाड़ियों के लेवल में भी काफी समानता है। कोई भी खिलाड़ी किसी भी दिन किसी को भी हरा सकता है। युवा खिलाड़ी बिग-थ्री के मुकाबले कोर्ट पर फास्ट हैं और उन्हें ज्यादा ताकतवर भी हैं। पर उनके पास रिकवर होने के लिए कम समय होता है।

1. शेड्यूल में सुधार, खुद को ज्यादा रिकवरी टाइम देना
पिछले कुछ समय से बिग्र थ्री, यानी फेडरर, नडाल और जोकोविच ने अपने शेड्यूल में सुधार किया है। उसने पहले के मुकाबले अब ज्यादा मैच नहीं खेले। सिर्फ ग्रैंड स्लैम और कुछ एक एटीपी एक्सचेंज में हिस्सा लेते हैं। वहीं, युवा खिलाड़ियों के साथ ऐसा नहीं है।

वे लगभग एक वर्ष में लगभग 15 वर्ष खेलते हैं। एक दौरे में वे कम से कम 2 घंटे खेलते हैं। एक रात की निंद और फिर अगले दिन उन्हें अगला मैच खेलना होता है। वह शेड्यूल एक से दो सप्ताह तक चलता है। इससे उनकी ऊर्जा पर कंट्रोल नहीं होता।

वहीं, बिग थ्री एक दिन में 4 घंटे तक मैच खेल सकते हैं, लेकिन उन्हें रिकवरी के लिए कुछ दिन का वक्त होना चाहिए। वे हर रोज 2 घंटे का खेल अफोर्ड नहीं कर सकते। उनमें वह ऊर्जा नहीं होती है, जो युवा खिलाड़ियों में है और उनकी रिकवरी टाइम भी स्लो है। ऐसे में वे लिमिटेड अभिकर्ताओं को खेलक उनमें अपनी सारी ऊर्जा लगा देते हैं। इसके साथ-साथ एक और बात है जो बिग थ्री को युवा खिलाड़ियों से अलग करता है। उसे अनुभव है।

2. अनुभव: यांग खिलाड़ियों में मैच्योरिटी की कमी
अनुभव का इस्तेमाल ‘मसल मेमरी’ के तौर पर किया जाता है, जो कि शारीरिक और मानसिक दोनों तौर पर प्रभाव डालता है। फेडरर, नडाल और जोकोविच 25 से ज्यादा ग्रैंड स्लैम खेल चुके हैं। इनमें से कई ऐसे अवशेष हैं जिनमें वे क्वार्टर फाइनल से ऊपर पहुंचे। इससे उनकी मसल मेमरी को मजबूती मिलती है। उनमें से एक विश्वास जगा कि वे जीत सकते हैं। जबकि, युवा खिलाड़ियों में इसकी कम दिखती है।

टेनिस के लीजेंड जॉन मैकनरो का कहना है कि मौजूदा दौर के युवा खिलाड़ियों ने खुद को टेक्निकली एडवांस तो कर लिया, पर मानसिक रूप से तैयार नहीं दिखते। उनमें कुछ नए ट्राई करने की भूख नहीं दिखती। अगर वे हार रहे हैं, तो उनके पास कोई प्लान बी या प्लान सी नहीं दिखता है।

मैकनरो का कहना है कि 2000 के दशक में जब फेडरर युवा थे, तो उनका सामना उस वक्त के दिग्गज खिलाड़ी जॉन मिलमैन के साथ हुआ था। फेडरर के अंदर मिलमैन को हराने का जज्बा दिखा रहा था। वे मिलमैन के दिमाग से खेल रहे थे। वे कभी उनकी सेवा को ब्रेक करने का सोचते हैं, तो कभी स्लाइस और शीर्ष स्पिन से मिलमैन को चकमा दे रहे थे। हालांकि, अंत में मिलमैन को जीत मिली, पर फेडरर ने दिखाया कि वे आगे चलकर एक शानदार खिलाड़ी बनने वाले हैं।

वहीं, टेनिस के एक और दिग्गज बोरिस बेकर का कहना है कि थिएम, साइसिपास जैसे खिलाड़ियों में मैच्योरिटी की कमी दिखती है। उनके अंदर के दौरे को जीतने का प्रेशर दिखता है और वह उस प्रेशर में दब जाते हैं। उनके अंदर जीतने का जज्बा नहीं दिखता। युवा खिलाड़ियों को लगता है कि यह सिर्फ टेनिस है, लेकिन यह सिर्फ टेनिस नहीं है। यह एक एटिट्यूड है, जो आपको आगे बढ़ने में मदद करता है। हम नहीं चाहते कि फेडरर, नडाल और जोकोविच 45 साल के होने के बाद भी अपने से आधे उम्र के खिलाड़ियों को आटा।

3. अलग-अलग तरह के फॉर्मेट: 5 सेट और 3 सेट में खुद को

पुरुष वर्ग में ग्रैंड स्लैम को छोड़कर सभी अन्य महाद्वीपों में से 3 सेट्स का खेल चल रहा है। वहीं, ग्रैंड स्लैम में करीब 5 सेट्स का इस्तेमाल होता है। एटीपी संचारकों में एक खिलाड़ी ज्यादा से ज्यादा 5 मैच खेलता है। थिएम, सीसिपास, मेदवेदेव, ज्वेरेव और रुबलेव सहित तमाम युवा खिलाड़ी 3 सेट के 15 खिलाड़ियों को खेलते हैं और इसके अलावा 4 ग्रैंड स्लैम खेलते हैं। युवा खिलाड़ियों का फिजिक और मेंटल लेवल इसी तरह तैयार होता है और रिकवरी टाइम जीरो होता है।

जबकि ग्रैंड स्लैम एक अलग ही टूर्नामेंट है। दो तरह के पैटर्न को अपने खेल में बनाए रखना युवा खिलाड़ियों के लिए मुश्किल होता है। ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ टेनिस में है। दूसरे खेलों में भी इसका प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के तौर पर दिग्गज तैराक माइक फेलेप्स को ही ले सकते हैं। वे अब तक इतिहास के करीब स्विमर रहे हैं। हालांकि, उनका प्रदर्शन सुपर स्प्रिंट (50 मी) और 1500 मीटर में कभी अच्छा नहीं रहा है। 1500 मीटर में तो वे कभी टॉप -20 में भी नहीं पहुंच पाए।

तीन ग्रैंड स्लैम जीत चुके खिलाड़ियों के स्टैन वावरिंका ने कहा कि जब टेनिस खेलना शुरू किया गया था, तो उन्हें बिग थ्री से बहुत ज्यादा टैलेंटेड माना जाता था। उन्होंने खुद को 5 सेट्स स्पेशलिस्ट बनाया। हालांकि, उन्हें 30 साल की उम्र में कामयाबी मिली। वावरिंका तब तक मैच्योर हो गए थे और ऊर्जा को कंट्रोल करने की सीख मिली थी। उनका बिग थ्री के खिलाफ रिकॉर्ड 12-59 का है, लेकिन 5 सेट्स में उनका टैलेंट उनके ऊपर है। 12 में से 6 जीत उन्हें ग्रैंड स्लैम में मिली है।

पिछले साल तक डेविस कप में खिलाड़ियों को 5 सेट तक खुद को तैयार करने का मौका मिलता था। 2007 तक एटीपी मास्टर्स -1000 में भी यही फॉर्मेट था, और कोई भी टाई-ब्रेक नहीं हुआ था। अब ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में टाई ब्रेकर का इस्तेमाल किया जाता है।

इस कारण से फेडरर, नडाल और जोकोविच जैसे खिलाड़ियों को उनके मालिकों के दौर में कठिन परिश्रम करने को मिला। जबकि, मौजूदा खिलाड़ियों में इसकी कमी दिख रही है। अब जब शॉर्टर फॉर्मेट इतने पॉपुलर हो रहे हैं, ऐसे में युवा खिलाड़ियों के लिए पुराने सिस्टम में ढलना मुश्किल हो गया है। इस पर जरूर ध्यान देना चाहिए।

टेनिस इतिहास में पहली बार कम खिलाड़ियों ने ग्रैंड स्लैम जीता
1920 के दशक से लेकर इस दशक तक पहली बार मेन्स टेनिस इतिहास में सबसे कम अलग-अलग खिलाड़ियों ने ग्रैंड स्लैम जीता है। 40 ग्रैंड स्लैम को सिर्फ 7 अलग-अलग खिलाड़ियों ने ही जीता। इनमें सबसे ज्यादा जोकोविच, नडाल और फेडरर ने जीते। इसके बाद इंग्लैंड के एंडी मरे और मंदिर के स्टेन वावरिंका का नाम आता है।

खबरें और भी हैं …





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments