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खुद के पैरों पर चलना चाहता है मासूम: गोरखपुर की परी को दुनिया की दुर्लभ बीमारी, बचाने के लिए 22 करोड़ का इंजेक्शन लगाना चाहिए; PM-CM से मदद की गुहार


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गोरखपुर10 मिनट पहले

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अपने माता-पिता के साथ परी।

  • गोरखपुर के शाहपुर आवास विकास कॉलोनी में रहता है परिवार
  • दो साल पहले बीमारी की वजह से पुष्टि हुई थी, शरीर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली छह साल की गरिमा उर्फ ​​परी भी मुंबई की तीरा और मेरठ की की ईशानी की ही तरह लाइलाज बीमारी स्टेटपाइनल मसलकुलर एट्रॉफी (एसएमए) ग्रसित है। वह अपने पैरों पर चलने वाला नहीं है। परी का इलाज एक ऐसा इंजेक्शन से होना है, जिसकी कीमत 22 करोड़ रुपये है। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी ठीक नहीं है कि वह इस बड़ी रकम को जुटा सके। परिवार ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री योगी से इलाज में मदद की गुहार लगाई है।

शाहपुर आवास विकास कालोनी निवासी मुक्तिनाथ गुपता एक प्रमुख डॉ की कार चलाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। 3 अक्टूबर 2014 को उनकी पत्नी ममता गुप्ता ने परी को जन्म दिया था। पांच महीने तक वह एक स्वस्थ बच्ची की तरह थी। लेकिन उसके बाद उसके शरीर के निचले हिस्से ने हलचल करना बंद कर दिया।

दो साल पहले बीमारी का पता चला

मुक्तिनाथ गुप्‍ता बताते हैं कि वे कैंची को इलाज के लिए डाक्‍टर के पास लेकर गए हैं। तब डॉक्टरों ने कैल्शियम और विटामिन की गोली देने के बाद सब कुछ ठीक होने की बात कही। लेकिन इन दवाओं से उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। परी के बड़े होने के साथ ही उसकी समस्या बढ़ने लगी। अब न ही वह अपने पैरों पर चल सकता है और न ही उठ-बैठ सकता है। वह पूरी तरह से माता-पिता पर निर्भर है। परी की मां ममता गुपताता बताती हैं कि बीआरडी मेडिकल कालाज में इलाज चला गया। लेकिन डाक्टर बीमारी पकड़ नहीं सके। साल 2017 में वो दो साल की हुई, तब वे उसे लेकर एम्स दिलनाली गए। वहाँ पर डाक्टरों ने उसके पैर की मांसपेशियों को काटकर जांच के लिए भेजा।

जांच रिपोर्ट में पता चला कि उसे रेयर बीमारी ‘एसएमए टाइप -1’ है। परी एलकेजी में पढ़ती है। नन्यूरो सर्जन दा। अजय कुमार सिंह अपने ड्राइवर मुक्तिनाथ की बेटी गरिमा की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। उनकी मदद से ही वह पढ़ रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से मदद की गुहार लगाते हुए ममता कहती हैं कि वे उनकी बेटी का इलाज कराने में मदद करें। जिससे उनकी बेटी चलने-फिरने और अपना काम करने के साथ ही कामय बना सकती है।

पांच साल से मुफ्त इलाज दे डॉ। सपना सिंह बने रहे

बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ। सपना सिंह बीते पांच साल से परी का इलाज मुफ्त में कर रहे हैं। वे कहती हैं कि परी को प्रोग्रेसिव शोपाइनल मसलकुलर एट्रॉफी की गंभीर बीमारी है। इससे मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है। कामार के नीचे का आधा हिस्सा काम नहीं करता है। उसे बार-बार निमोनिया हो जाता है। उसकी रेस्पायरेट्री कम सर्पोमीज़ है। इसके अलावा वो एलर्जिक भी है। उम्र बढ़ने के साथ बीमारी गंभीर होती जाती है। बार-बार चेस्ट में इंफेक्शन होता है। यही मृत्यु की वजह बन जाती है।

गरिमा उर्फ ​​परी।

गरिमा उर्फ ​​परी।

SMA बीमारी क्या है?
स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी (SMA) बीमारी वाले बच्चों के शरीर में प्रोटीन बनाने वाला जीन नहीं होता है। इससे उत्पन्नियाँ और तंत्रिकाएँ (तंत्रिकाएँ) खत्म होने लगती हैं। दिमाग की मांसपेशियों की ऐक्टिविटी भी कम होने लगती है। ब्रेन से सभी पेटियां संचालित होती हैं, इसलिए सांस लेने और खाना चबाने तक में कठिनाई होने लगती है। एसएमए कई तरह की होती है। टाइप -1 सबसे गंभीर बीमारी है। देश में अभी तक 5 लोगों और दुनिया में लगभग 600 लोगों को एसएमए बीमारी के इलाज के लिए जोल्जेंसमा का इंजेक्शन लगाया गया है। जिन्हें उन्होंने 60% ही फायदा पहुंचाया।

कंपनी की कंपनी बनाती है इंजेक्शन

बताया गया कि स्विट एंड की कंपनी नोवार्टिस जोलगेन्स्मा यह इंजेक्शन तैयार करती है। नोवार्टिस कंपनी सीखने के 50 लोगों को यह दवाई मुफ्त में खाती है, लेकिन वह रेंडमली सेलेक्टेड मरीजों को मिलती है। ईशानी का पंजीकरण मुफ्त मिलने वाले टीके की प्रक्रिया के लिए कर दिया गया है, लेकिन उसके लिए इंतजार करना बेटी की जान के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। ईशानी के पिता अभिषेक ने मदद के लिए सोशल मीडिया पर मदद के लिए कैंपेन शुरू कर दिया है। इसके लिए मिलाप और इम्पैक्ट गुरू जैसी वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाकर लोगों से मदद की गुहार की है।

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