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चर्चित चेहरा, चर्चित शब्द: इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और नारी शक्ति की असली मिशाल को बयां करता है यह लेख


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3 घंटे पहले

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चर्चित चेहरा

द्रक्षायणम्

कर्नाटक में एक ग्राम पंचायत चिक्का यम्मीगुरु की प्रधान हैं द्रक्षयनम्मा। उम्र 88 वर्ष। रोज़ सुबह पाँच बजे उठकर कामकाज का पालन करती हैं और ग्रामीणों की समस्याएं सुनती हैं। अपने इलाक़े की हर महिला को शौचालय उपलब्ध कराने और ग्रामीणों के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था उनके प्रमुख लक्ष्य हैं। ख़ुद 1940 के दशक में सातवीं कक्षा तक पढ़ी थीं, अब बालिकाओं की शिक्षा के लिए विशेष प्रयत्नशील हैं। उनके तीन बेटों बैंक के निवास क्षेत्रीय महाप्रबंधक, इंजीनियर और वकील हैं, जबकि तीन बेटियां गृहिणियों हैं। द्रक्षायनम्मा गांव में दोनों रहते हैं और सभी काम ख़ुद करते हैं। कुछ समय पहले तक अपने अंगों में काम भी करती थीं, हालांकि बढ़ती उम्र के साथ अब कामकाज की निगरानी ही करती हैं। उन्हें सेवा कार्यों के लिए पद की जरूरत भी नहीं है। 2016 में जब गांव में पानी की क़िल्लत हुई, तो उन्होंने अपने आंगन में बोरवेल करवाकर पूरे गांव में अपने ख़र्च पर पानी की लाइन बिछवाई थी। एक ऐसे समय में जब ‘सरपंच पतियों के का बोलबाला है, द्रक्षयनम्मा नारी शक्ति के असली मिसल।’

चर्चित शब्द
संदेश

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) ने ‘संदेश’ (सैंड्स) नामक एक इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जो वॉट्सएप की तरह कार्य करता है। यह उपकरण स्वदेशी रूप से विकसित उत्पादों का एक परमित्त बनाने के लिए भारत निर्मित सॉफ्टवेयर के उपयोग को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति का हिस्सा है। संदेश एक सरकारी इंस्टेंट मैसेजिंग सिस्टम (जीआईएमएस) है, जिसमें ग्रुप बनाने, मैसेज भेजने, फॉरवर्ड करने और इमोजी जैसी प्रचलित सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसा नहीं है, उपयोगकर्ता इस एप पर किए गए चैट का बैकअप अपनी ईमेल आईडी पर भी ले सकते हैं। इसका इस्तेमाल के लिए एक वैध मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी ज़रूरी होगा। यदि उपयोगकर्ता बाद में फोन नंबर या ईमेल बदलना चाहते हैं, तो उन्हें नए उपयोगकर्ता के रूप में फिर से पंजीकरण करना होगा। एक विशेष सुविधा यह भी है कि यदि आप किसी मैसेज को आत्मविश्वास के रूप में चिह्नित करते हैं, तो पाने वाला उसे अन्य के साथ शेयर नहीं कर पाएगा। ग़ौरतलब है कि आधिकारिक संचार में विदेशी सामान के इस्तेमाल से सुरक्षा व गोपनीयता संबंधी चिंताओं से बने रहते हैं। यह उपकरण भारतीय आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क़दम है।

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