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चीन का नया पैंतरा: हॉन्गकॉन्ग के 7000 साल पुराने इतिहास को मिटाकर दोबारा लिखी गई पुस्तकें; 726 करोड़ रुपए खर्च किए


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12 मिनट पहलेलेखक: अनिवार्य कला

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चीन की जिनपिंग सरकार ने हॉन्गकॉन्ग के स्कूल-कॉलेजो में चीन के प्रति वफादारी का पाठ पढ़ाना शुरू किया है।

  • हॉन्गकॉन्ग में अब ग्रेट वाल ऑफ चाइना और पीपुल लिबरेशन आर्मी के बारे में पढ़ाया जाएगा
  • इतिहास की इन नई किताबों में चीन की प्रमुख बातें और शी जिनपिंग सरकार का ही गुणगान

हॉन्गकॉन्ग में विवादित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू हो गया है। इससे अब चीन को डर है कि हॉन्गकॉन्ग के युवा उससे बगावत कर प्रदर्शन शुरू न कर दें। इसलिए उन्होंने हॉन्गकॉन्ग की नई पीढ़ी को अपने वश में करने की ठान ली है। चीन की जिनपिंग सरकार ने हॉन्गकॉन्ग के स्कूल-कॉलेजो में चीन के प्रति वफादारी का पाठ पढ़ाना शुरू किया है।

ड्रैगन ने हॉन्गकॉन्ग के 7000 साल पुराने इतिहास को हटा दिया है। साथ ही 100 मिलियन डॉलर (726 करोड़ रुपए) खर्च कर इतिहास की नई किताबें लिखी गई हैं। इनमें से एक पुस्तक 800 पेज की है। इसमें चीन ने अपना गुणगान किया है और खुद को हॉन्गकॉन्ग का रक्षक बताया है। इन किताबों में चीन की पीपुल लिबरेशन आर्मी और ग्रेट वॉल ऑफ चाइना सहित प्रमुख पुस्तकों के बारे में बताया गया है।

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि जब 2019 में बड़े पैमाने पर विरोधाभासी विरोध प्रदर्शन हुआ, तो बीजिंग समर्थक अधिकारियों ने उदार मूल्यों को बढ़ावा देने और हॉन्गकॉन्ग को कट्टरपंथी बनाने के लिए शिक्षा प्रणाली को दोषी ठहराया था। उस प्रदर्शन में छोटे बच्चे भी शामिल थे। इसके बारे में चीन हॉन्गकॉन्ग के बच्चों के सामने खुद को ‘हूर’ के तौर पर पेश करना चाहता है।

इन किताबों के जरिए बच्चे देश की सुरक्षा के नाम पर चीन के प्रति देशप्रेम सीखेंगे। यानी वे कुल मिलाकर चीन से विद्रोह न करने की सीख लेंगे। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सिर्फ हॉन्गकॉन्ग ही नहीं, बल्कि मणिक के लोग भी खुद को चीन का हिस्सा मानने का पाठ सीखेंगे। चीन मणिक को भी अपना हिस्सा मानता है। यह चीन का विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है। चीन ने इसे एक समझौते के तहत 1999 में पुर्तगाल को सौंपा था।

तियानमेन नरसंहार को भी हटा दिया गया

1989 में लोकतंत्र आंदोलन को लेकर जन आंदोलन हुआ था। उस दौरान बीजिंग स्थित तियानमेन चौक पर एक लाख से ज्यादा छात्र जुटे थे। इस विद्रोह को तोड़नेने के लिए चीन ने मार्शल लॉ लगाया था। फिर तोपों और टैंकों से प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया गया था। चीन ने इस ऐतिहासिक घटना को भी किताबों से हटा दिया है।

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