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चुनावी राज्यों में कांग्रेस की राह आसान नहीं, सीएए, किसान आंदोलन को भुनाने की कवायद में जुटी पार्टी


TN में कांग्रेस को पूरा भरोसा है कि पुरानी सहयोगी द्रमुक के साथ मिलकर वह अन्नाद्रमुक को सत्ता से बाहर कर फाउंडगी। फाइल फोटो

राज्य विधानसभा चुनाव 2021: कांग्रेस का मानना ​​है कि कांग्रेस को कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ाने और राहुल गांधी की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए कम से कम एक राज्य में शानदार प्रदर्शन करना होगा।

नई दिल्ली। कांग्रेस (कांग्रेस) एक तरफ जहां चुनावी राज्यों में सत्ता विरोधी लहर के साथ ही नागरिकता संशोधन काननू (सीएए) और नए कृषि कानूनों (फार्म कानून) के खिलाफ लोगों के विरोध को भुनाने की कोशिश में हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी की राह में रोड़े हैं। भी हैं। ऐसे में कांग्रेस चुनीवी राज्यों में जनता के उग्र की आंच पर वोट की रोटी सेंकने की कवायद में जुटी हुई है। पार्टी को लगता है कि केरल में वह सत्तारूढ़ एलडीएफ पर भारी पड़ने जा रहा है। हालांकि, अन्य राज्यों असम, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के अलावा पुडुचेरी में उसे गठबंधन सहयोगियों की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस गठबंधन सहयोगियों भारतीय सेक्युलर एमक्यू और वाम दलों के बीच अब सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है, जिसके निगाहें राज्य के 30 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं पर है। असम में कांग्रेस का बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ के साथ प्रतिबद्धता अंतिम रूप नहीं ले गई है, जोकि चुनाव में उसका प्रमुख सहयोगी है। वहीं, तमिलनाडु में कांग्रेस को पूरा भरोसा है कि पुरानी सहयोगी द्रमुक के साथ मिलकर वह अन्नाद्रमुक को सत्ता से बाहर कर फाउंडगी।

पुडुचेरी में हाल ही में सरकार गिरने के बाद कांग्रेस पार्टी कमजोर पड़ी है और अब उसे आक्रामक भाजपा का मुकबला करना है, जोकि जीत का रास्ता बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। हालांकि, TN में सीट बंटवारे की बातचीत शुरू हो गई है और कांग्रेस इस बार 50 सीटों की मांग कर रही है, जिसे देने में द्रमुक हिचक रही है। सूत्रों का कहना है कि द्रमुक वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव के साथ ही हालिया चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन का हवाला दे रहा है। 2016 में हुए चुनावों में कांग्रेस ने 41 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें वह केवल आठ सीटों पर जीत पाई थी।

विशेलषकों का मानना ​​है कि कांग्रेस को कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ाने और राहुल गांधी की विश्वसनीयता के लिए कम से कम एक राज्य में शानदार प्रदर्शन करना होगा। इससे पहले शनिवार को ही जम्मू में कांग्रेस के असंतुष्ट वरिष्ठ नेताओं ने पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में अविश्वास जाहिर किया था। इन नेताओं ने दावा किया था कि पार्टी कमजोर पड़ रही है।अराहुल गांधी और उनके रणनीतिकारों को भरोसा है कि वे तमिलनाडु और केरल में सत्ता पर काबिज हो सकते हैं, क्योंकि इन राज्यों में अमूमन हर पांच साल बाद सत्ता परिवर्तन देखा गया है। उन्हें असम में भी सत्तारूढ़ भाजपा को राष्ट्रस्त करने का पूरा भरोसा है।

उधर, पश्चिम बंगाल में हाल यह है कि जहां भाजपा और तृणमूल कांग्रेस अपने चुनावी नारे जारी कर चुके हैं, वहीं, कांग्रेस और वाम दल संयुक्त रणनीति पर मंथन कर रहे हैं।

(डिस्क्लेमर: यह खबर सही सिंडीकेट ट्वीट से पब्लिश हुई है। इसे News18Hindi की टीम ने साझा नहीं किया है।)







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