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ज़रा ग़ौर करें: बीमार व्यक्ति से मिलने जाते समय कुछ बातों का ख़ास ख़्याल रखने की ज़रूरत होती है, आइए जानते हैं कि इस तरह क्या है


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  • मधुरिमा
  • एक बीमार व्यक्ति से मिलने के लिए जाते समय, कुछ बातों को दिमाग में रखना चाहिए, आइए जानते हैं इसके बारे में

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स्नेहलता मिश्रा2 घंटे पहले

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  • जब आप भी शुभचिंतक के तौर पर किसी बीमार से मिलने जाते हैं, तो यह ज़रूर याद रखें कि आप शुभचिंतक हैं और हौसला बढ़ाने आए हैं।

सुख-दुख तो मानव जीवन के साथ जुड़ा हुआ है। दूसरों के दुख-दर्द में काम आना ही सच्ची मानवता है। जब भी कोई परिचित परिचित हो जाता है तो उससे मिलने, उसकी हौसला बढ़ाने या उसकी मदद करने हम ही जाते हैं। एक और कारण है जाने की – शिष्टाचारवश। यदि इस कारण से जाना हो, तो केवल फोन पर ही हाल ले लें, तो बेहतर है। इससे बीमार व्यक्ति को कोई आस नहीं रहेगी। अगर वास्तव में परवाह की वजह से मिलने जा रहे हैं, तो चंद बातों का ख़्याल रखें। 1 यदि आपके परिचित अस्पताल में भर्ती हैं, तो इन दिनों फोन द्वारा ही बेहतर होगा। यह भी पता कर लें कि उन्हें किसी बड़ी मदद की ज़रूरत है तो नहीं। 2 बीमार व्यक्ति से मिलने जाने का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी होता है कि बीमार को ऐसा नहीं लगे कि वह दुख-दर्द में अकेला है, वरन जब भी आप उससे मिलने जा रहे हैं तो इससे बीमार की हिम्मत बढ़ती है। 3 अस्पताल में मिलने का समय ज्ञात कर लें। पूरी कोशिश करें कि आप सही समय पर अस्पताल पहुंचें और उचित समय पर वहाँ से वापस लौट सकें। हड़बड़ी में मिलने से ना तो मदद करोगे और ना ही कोई बात हो फाउंडगी। 4 जहां तक ​​संभव हो बीमार के पास भीड़ नहीं है। डॉ की यात्राओं का समय हो, तो चुपचाप बाहर निकल आएं। तीमारदार और डॉ को ही बीमार के पास रहने दें। राष्ट्र राय तो कतई ना दें। 5 बीमार को ज्यादा बोलने के लिए ना उकसाएं। हंसी-मज़ाक द्वारा माहौल को हल्का करने की गलतीफहमी ना रखें। अस्पताल में और भी मरीज़ होते हैं, जो हो सकता है गंभीर स्थिति से जूज़ हो रहे हैं। उनका भी ख़याल रखें। 6 फल ले जाने से पहले पूछें कि मरीज़ को उनका सेवन करने की अनुमति है या नहीं। फूल अस्पताल ले जाना प्रभावी नहीं रहता है घर पर देखने जाना, तो उन्हें गुलदान में रखने से किया जा सकता है। 7 यदि आप बीमार महिला से मिलने जा रहे हैं, तो विशेष ध्यान रखें। बिना पूछे हरगिज कमरे में प्रवेश ना करें। बीमार के पास बहुत ज्यादा देर ना बैठें। इलाज के दौरान कई तरह के उपकरण महिला की मदद को लगे रहेंगे, जिनके कारण उनकी स्थिति अस्त-व्यस्त हो सकती है, ऐसे में हो सकता है कि वे ख़ुद और उनके परिजन पुरुषों की उपस्थिति में कुछ स्पष्ट महसूस करें। इसलिए मदद के लिए भी जाना हो, तो कुछ पल बैठें और बाहर आ जाएं। बाहर परिजनों से बात कर सकते हैं। 8 बीमार व्यक्ति के अलावा परिजनों को भी उनका घर संभालने, बच्चों की देखभाल, खान-पान आदि की सुविधाएं पाने की जरूरत होती है। उनकी मदद करना, उनके लिए स्थितियों को आसान बनाना भी एक तरह से बीमार की मदद करना ही है।

खुले हुए पुराने हैं, लेकिन याद रखना ज़रूरी है
– डॉ। से फिज़ूल बात ना करें, ना पहचान निकालने की कोशिश में उनका समय बर्बाद करें।
– अस्पताल के स्टाफ के साथ विनम्रता से पेश आओ और नियमों के पालन में पूरा सहयोग करें।
– घर से बनाकर चाय-नाश्ता ले जाओ। तीमारदार को इसका सख़्त ज़रूरत होती है।
– अपनी तरफ से किसी नुस्खे या दवा की सलाह ना दें।
– किसी अन्य बीमार का उदाहरण ना दें।

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