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जैकिंग पर भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट: कभी साइकिल पर मछली पकड़ने में मुर्गा तस्कर लाला था, आज उसकी 20 हजार करोड़ रु। की संपत्ति


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झकझोरपुर9 घंटे पहले

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धनबाद पुलिस ने केक से लदे ट्रक पकड़े थे। इसी के माध्यम से इस लेख से जुड़े बहुत बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ। इसका सरगना मुर्गा तस्कर अनूप मांझी यानी लाला है।

चार राज्य झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश कोयले की काली कमाई के इस साम्राज्य का मालिक यानी अनूप मांझी उर्फ ​​लाला अभी पूरे देश में सुर्खियों में बना हुआ है। इस चर्चा की मुख्य वजह यही है कि संगठनों की कालिख पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा तक पहुंच गई है।

चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में जिस शख्स के कारण यह बावंडर मचा है, उस लाला को बंगाल के पुरुलिया का भामुरिया गांव कभी मछली बेचने वाले के तौर पर जानता था। 15 साल पहले तक लाला गाँव में साइकिल पर मछली बिक्री थी। लेकिन आज लाला न सिर्फ 20 हजार करोड़ की संपत्ति का मालिक है, बल्कि देश का सबसे बड़ा मुर्गा तस्कर भी है। कई शेल कंपनियों का कर्ता-धर्ता भी है।

कैसा है लाला का काला साम्राज्य?
यह जानने के लिए भास्कर उसके गांव भामुरिया में पहुंचा। ऐसा गाँव, जहाँ लाला का नाम ही लोगों के चेहरों के रंग फीके पड़ जाता है। घबराहट नजर आती है। चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी है। ये सब लाला की अपनी व्यवस्थाएं हैं, ताकि लाल पड़ जाए तो संभलने का मौका मिल जाए। वहाँ जो दिखा, वह चौंकाने वाला था।

पुरुलिया के भामुरिया गांव के इसी झाेपड़ौन घर में लाला का जन्म हुआ था।  आज यहां लाला का इतना खौफ है कि उसका नाम ही लोगों के चेहरों के रंग फीके पड़ जाते हैं।

पुरुलिया के भामुरिया गांव के इसी झाेपड़ौन घर में लाला का जन्म हुआ था। आज यहां लाला का इतना खौफ है कि उसका नाम ही लोगों के चेहरों के रंग फीके पड़ जाते हैं।

दुर्गा पूजा के लिए प्रसिद्ध भामुरिया अब कोयले के अवैध खनन के लिए कु प्रसिद्ध
प.बंगाल के पुरुलिया से 64 किलोमीटर दूर स्थित भामुरिया गाँव। प्रवेश करते ही सामने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा। सीमेंट की मजबूत सड़क। जगमग स्ट्रीट लाइट्स और डेराएँ दो मंजिला बड़े घर गांव की समृद्धि दिखाते हैं। गांव के हर कोने पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।

20 साल पहले तक दुर्गापूजा का मुख्य स्थल रहा यह गांव आज कोयले के अवैध खनन के लिए कुख्यात है। यहीं 5,500 करोड़ के तेल घाटेले के मुख्य आरोपी लाला का काला साम्राज्य है। लाला का नाम प्राधिकरणधारी टीएमसी से जोड़ा जा रहा है। जिनकी सरपरस्ती में शेल कंपनियां चल रही हैं।

लाला गांव में एक झाेपड़ी में जन्मा। वह 22 साल की उम्र में यहां साइकिल पर फेरी लगाकर मछली बेचती थी और 43 साल की उम्र का होते-होते अवैतनिक कोयले के काम में देश का सबसे कुख्यात नाम बन गया था।

शाम के 7 बजे हम गांव में पहुंचे। लगा कि हमारे आने की खबर लोगों को हो गई है। हमारी सभी कार देख रही है। हमने वहां खड़े दो युवकों से पूछा- अनूप मांझी को पता हो? नाम सुनते ही उनके चेहरों पर सलवटें पड़ गईं। दोनों एक साथ बंगाली में बोले- किछो होना ना। (कुछ नहीं पता) हम आगे बढ़े। लोगों से पूछते रहे, सब हमसे कन्नी काटते रहे।

एक बुजुर्ग बुदबुदाया- चसपाड़ा जाओ। हम चसपाड़ा मोहल्ले में पहुंचे। यहां लाला के पैतृक घर का पता चला। लगभग डेढ़ हजार वर्गफीट में मिट् टी की दीवारें और खपरैल छत का पुराना मकान। अब इसे नई चाहरदीवारी से घेर दिया गया है। यहाँ कोई नहीं रहता है। इस मकान के पास ही बड़ी कोठी है। इसमें बड़ा दरवाजा, ऊंची दीवारें हैं। कई सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।

चसपाड़ा में बने यह लाला की कोठी है।  उसका एक बंगला कोलकाता में भी है।

चसपाड़ा में बने यह लाला की कोठी है। उसका एक बंगला कोलकाता में भी है।

लाला ने अवैध कोयले से कमाए पैसे नेताओं तक पहुंचाकर राजनीतिक संरक्षण पाया

  • कई बड़ी पार्टियों के साथ नेताओं की फंडिंग संभालता लाला थी। अवैध कोयले के धंधे में लाला को जयदेव मंडल के रूप में एक बड़ा सहयोगी मिला।
  • पशु तस्कर इनामुल के नेटवर्क का इस्तेमाल किया, यहीं से TMC कनेक्शन जुड़ा, लाला और विनय मिश्रा फरार हैं।
  • ईसीएल अफसरों की मिलीभगत से समानांतर कंपनी चलाने लगा। सवाल यह है कि यह अवैध मुर्गा कारोबार कितना बड़ा है?

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