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टोल कलेक्शन का नया रिकॉर्ड: 104 करोड़ रुपए रोज पर पहुंचा फास्टैग से टोल कलेक्शन, 64 लाख से ज्यादा ट्रांसजेक्शन


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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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फास्टैग एक प्रकार का टैग या स्टिकर होता है जो वाहन की विंड डॉट पर लगा होता है।

  • फास्टैग के जरिए यूजर फीस कलेक्शन में 27% की ग्रोथ
  • बीते दो सप्ताह में 20 लाख से ज्यादा नए फास्टैग यूजर जुड़े

फास्टैग के जरिए टोल कलेक्शन रिकॉर्ड तोड़ स्तर पर पहुंच गया है। अब हर रोज फास्टैग के जरिए 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का टोल कलेक्शन हो रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने यह जानकारी दी है।

25 फरवरी को 103.94 करोड़ रुपए का कलेक्शन हो रहा है

NHAI ने शुक्रवार को बताया कि इस सप्ताह फास्टैग के जरिए टोल कलेक्शन 100 करोड़ रुपए से ज्यादा रहा है। 25 फरवरी को फास्टैग के जरिए 103.94 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन हुआ है। फास्टैग के जरिए टोल कलेक्शन का यह रिकॉर्ड है। यह कलेक्शन 64.5 लाख ट्रांसजेक्शन के जरिए हुआ है।

फास्टैग से उपयोगकर्ता शुल्क कलेक्शन में 27% की ग्रोथ

NHAI ने कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन ट्रांसजेक्शन में 20% की ग्रोथ हुई है, जबकि फास्टैग से यूजर फीस कलेक्शन के मामलों में 27% की ग्रोथ दर्ज की गई है। हाईवे यूजर्स के लिए चलाई गई फास्टैग ड्राइव से बड़ा लाभ मिला है। बीते दो सप्ताह में लगभग 20 लाख नए फास्टैग यूजर जुड़े हैं। अब देश में कुल फास्टैग यूजर्स की संख्या 2.8 करोड़ हो गई है।

टोल प्लाजा पर वेटिंग टाइम में कमी आई

NHAI का कहना है कि फास्टैग के इस्तेमाल से टोल प्लाजा पर वेटिंग टाइम में कमी आई है। इसके इस्तेमाल से लोगों को एक बेहतर अनुभव मिल रहा है। इसके इस्तेमाल से टोल ऑपरेशन में काफी विस्तार आया है। इससे रोड असेट्स का सही वेल्यूएशन होगा और भविष्य में निवेश आकर्षित होगा। इस निवेश से देश का हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर बनाया जा सकता है।

16 फरवरी से अनिवार्य हो गया है फास्टैग

देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन को बढ़ाने के लिए फास्टैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 16 फरवरी से फास्टैग के जरिए टोल कलेक्शन को अनिवार्य कर दिया है। अब बिना फास्टैग टोल पार करने पर यूजर्स को दोगुना टोल टैक्स देना पड़ रहा है।

क्या होता है फास्टैग?

फास्टैग एक प्रकार का टैग या स्टिकर होता है। यह वाहन की विंड @ पर लगा होता है। फास्टैग रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन या आरएफआईडी तकनीक पर काम करता है। इस तकनीक के माध्यम से टोल प्लाजा पर लगे कैमरे स्टिकर के बार-कोड को स्कैन कर लेते हैं और टोल शुल्क अपने आप फास्टैग के वॉलेट से कट जाता है। फास्टैग के इस्तेमाल से वाहन चालक को टोल टैक्स के भुगतान के लिए रूकना नहीं पड़ता है।

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