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तो वैक्सीनेशन शुरू होने पर समस्या न हो: राजधानी में अगले सप्ताह तीन स्थानों पर ड्राय रन होंगे, वैक्सीनेशन की तैयारियों को परखा जाएगा


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भोपाल5 मिनट पहले

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भोपाल में कोविक्सीन का थर्ड फेज का ट्रायल चल रहा है और इसका दूसरा डोज लगाया जा रहा है।

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को वैक्सीनेशन की तैयारियां परखने के लिए ड्राय रन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं

मध्य प्रदेश में कोविद -19 की वैक्सीन लगाए जाने की मुहिम शुरू करने से पहले की तैयारियां चालू कर दी हैं। इसके तहत अब ड्राय रन होंगे। राजधानी भोपाल के तीन पॉइंट पर ड्राय रन होंगे। इससे पहले देश के चार राज्यों- असम, आंध्र प्रदेश, गुजरात और पंजाब में विभाजित -19 वैक्सीन का ड्राय रन 28-29 दिसंबर को हुआ था। आज यानि गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को वैक्सीन को लेकर ड्राय रन उपलब्ध कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्यों की राजधानी के कम से कम तीन प्वाइंट पर ड्राय रन बनाए जाएंगे।

को-विन प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण होगा
राजधानी भोपाल के फिक्शुदा केंद्रों पर लोगों को इस वैक्सीन की डोज देने की मॉक ड्रिल होगी। इसके लाभार्थियों का को-विन आईटी प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कर दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें मैसेज के जरिए कोविड -19 वैक्सीनेशन के लिए कब और जगह के बारे में बताया जाएगा। इस ड्राय रन के लिए एक विस्तृत चेक लिस्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तैयार की है और इसे राज्यों के साथ साझा किया गया है।

वर्कशॉप और पंजीकरण
ड्राय रन शुरू करने से पहले वैक्सीनेशन के काम में लगने वाले कर्मचारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण वर्कशॉप होगा। इसके अलावा, को-विन ऐप की भी जांच-परख की गई कि यह ऐप ठीक से काम कर रहा है या नहीं। ड्राय रन उपलब्ध कराने के केंद्र सरकार के निर्देश आ गए हैं। एक जनवरी को इसकी योजना और प्रशिक्षण होगा। इसके बाद ड्राय रन बनाए जाएंगे। जगह भी निश्चित है।

राज्य के अधिकारी डॉ। संतोष शुक्ला ने बताया कि, “ये चीज़ों पर काम शुरू हो गया। हमारे पास वैक्सीनेशन के लिए पहले से कोल्ड स्टोरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद हैं, जो कि जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।”

डॉ। शुक्ला ने कहा कि कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दी जा चुकी है और अब इन तैयारियों को जांचने-सिखानेने की जरूरत थी क्योंकि वैक्सीन कभी भी आ सकती है। इसलिए ड्राय रन के जरिए वैक्सीनेशन के काम में लगने वाले कर्मचारियों की तैनाती, कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्थाओं, ट्रांसपोर्टेशन के काम और अन्य व्यवस्थाजामों का भी परीक्षण किया जा रहा है। इसलिए जब असली वैक्सीनेशन शुरू हो तो किसी तरह की दिक्कत न आए। वैक्सीनेशन के लिए किस तरह के प्रोटोकॉल रहेंगे और इनका कैसे पालन होना है, इसका भी परीक्षण किया जा रहा है। पूरी योजना ये है कि वैक्सीनेशन को लॉन्च करने से पहले इसकी पूरी व्यवस्थाओं और अन्य पहलुओं को जांच लिया गया, इसलिए बाद में इसमें मुश्किलें ना आएं।

ड्राय रन क्या है?
यह एक रिहर्सल की तरह है। इसमें कोविड -19 वैक्सीन आने के बाद किस तरह से लगाया जाना है? इसकी क्या तैयारियाँ हैं? इन तमाम चीज़ों का परीक्षण किया जाना है। इसके माध्यम से यह भी देखा जाएगा कि वैक्सीनेशन के दौरान क्या-क्या अड़चनें आ रहे हैं और उन्हें किस तरह से दूर जाना पड़ता है। इसे मॉक ड्रिल भी कहा जा रहा है।

सबसे पहले हेल्थकेयर वर्कर्स को यह वैक्सीन लगाई जानी चाहिए। इसके बाद 50 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों और उसके बाद पहले से दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को यह वैक्सीन लगाई जानी चाहिए। मध्य प्रदेश में इसे लेकर डेटाबेस बन रहे हैं। लोगों का पंजीकरण होगा और फिर उन्हें मैसेज भेजकर वैक्सीन लगाने की तारीख, जब और केंद्र की जानकारी दी जाएगी।

ऐसा होगा वैक्सीन का ट्रांसपोर्टेशन
डॉ। संतोष शुक्ला ने बताया कि ट्रांसपोर्टेशन से पहले वैक्सीन मध्य प्रदेश के चार स्टेट स्टोर- इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर आएगी। इंदौर-भोपाल में एयरवेज और ग्वालियर-जबलपुर में रेलवे और रोड-वे के जरिए लाई जाएगी। फिर यहां से जिला मुख्यालयों और फिर स्वास्थ्य केंद्रों तक उन्हें पहुंचाया जाना है। को-विन नाम से एक आईटी प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। इसी प्लेटफॉर्म के जरिए वैक्सीन लगाने का पूरा काम को अंजाम दिया जाएगा।

दो दिन में पूरे होने वाले इस मॉक ड्रिल का पूरा ब्योरा और आंकड़े केंद्र को भेजा जाएगा। अभी तक जो जानकारी है उस हिसाब से इस मॉक ड्रिल में कोई दिक्कत नहीं आई है। वैक्सीनेशन के इस अनुवाद रन में समकालीन वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। वैक्सीन को छोड़कर इससे जुड़ी पूरी प्रक्रियाओं का वास्तविक आधार पर परीक्षण किया जाएगा।

ऐसे लोगों का पंजीकरण होगा
डॉ। शुक्ला ने बताया कि कोरोना की वैक्सीन जिन्हें दी जानी चाहिए, उनका पंजीकरण को-विन प्लेटफॉर्म पर होगा। को-विन एक वेबसाइट और ऐप दोनों की शक्ल में रहेगा। जिन लोगों को सबसे पहले ये वैक्सीन लगाई जानी चाहिए, उनका डेटा हमारे पास तकरीबन तैयार है। इसकी संख्या लगभग 4 लाख है। पंजीकरण में एक मोबाइल नंबर और एक फोटो आईडी जरूरी होगी। आईडी में कई विकल्प दिए जा रहे हैं।

इस मॉक ड्रिल में लाभार्थियों का को-विन एप पर पंजीकरण कराया जा रहा है। इसके ज़रिए इस एप में पंजीकरण के दौरान कहीं कोई समस्या नहीं आई। इन चीज़ों को देखा जा रहा है। वैक्सीनेशन के बाद इसी ऐप पर सर्टिफिकेट भी जनरेट हो जाएगा। इसके अलावा, ड्राय रन में वैक्सीनेशन कहां किया जाएगा और इन केंद्रों को कैसे चिह्नित किया जाएगा, इसकी भी गिरनेनल हो रही है। ” इस ड्रिल के जरिए वैक्सीनेशन करने की पूरी प्रक्रियाओं को जांचा और परखा जा रहा है।

ऐसे केंद्र होंगे
जिन केंद्रों में वैक्सीन लगाई जाए उनमें तीन कमरे होंगे। पहला कमरा वेटिंग रूम होगा, जहाँ परिवर्तन की प्रक्रिया होगी। दूसरे कमरे में वैक्सीन लगाई जाएगी और तीसरा कमरा ऑब्जर्वेशन रूम होगा। जहां पर वैक्सीन लगने के बाद लाभार्थी को कुछ देर रुकना होगा, ताकि किसी तरह की दिक्कत होने पर चिकित्सीय सहायता दी जा सके। वैक्सीनेशन के काम के लिए हर साइट केंद्र पर पांच लोग रहेंगे।





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