Home कैरियर पर्याप्त स्टॉक के बावजूद भी लक्ष्य से कम ही रहेगा चीनी निर्यात,...

पर्याप्त स्टॉक के बावजूद भी लक्ष्य से कम ही रहेगा चीनी निर्यात, कीमतें बढ़ने के भी आसार


नई दिल्ली. शिपमेंट और लॉजिस्टिक्स चुनौतियों की वजह से भारत इस साल चीनी निर्यात के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएगा. इससे अब चीनी के भाव बढ़ने के आसार हैं. भारत चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है. यहां जबरदस्त स्टॉक होने के बावजूद भी सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्य से करीब 20 फीसदी कम चीनी का ही निर्यात हो सकेगा. एक मीडिया रिपोर्ट में ट्रेडर्स और एनलिस्टों के हवाले से यह जानकारी दी गई है. भारत की ओर से सप्लाई में यह कमी एक ऐसे समय पर होने वाली है, जब पहले ही वैश्विक बाज़ार में चीनी के भाव बढ़ रहे हैं.

फरवरी में लगातार 10 दिनों तक कच्चे शुगर के वायदा भाव में तेजी देखने को मिली थी​. पिछले 6 दशक में ऐसा पहली बार हुआ है. थाईलैंड और यूरोपीय देशों में इस साल चीनी का उत्पादन कम हुआ है. ठीक इसी समय एशियाई बाजारों में चीनी की मांग भी बढ़ी है. ऐसे में भारत से चीनी निर्यात का लक्ष्य न पूरा होने से वैश्विक बाजार के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं.

सब्सिडी में देरी ने बढ़ाई मुसीबत
एक मीडिया रिपोर्ट में कमोडिटी ट्रेडर के हवाले से कहा गया है कि भले ही वैश्विक बाजार में चीनी का भाव बढ़ गया हो, लेकिन भारत से चीनी के निर्यात का लक्ष्य नहीं पूरा हो सकेगा. दरअसल, इस बार सरकारी सब्सिडी में देरी की वजह से चीनी का निर्यात भी देर से ही शुरू हुआ है. इसके साथ ही कंटेनरों की कमी और आगामी मॉनसून की वजह से बंदरगाहों पर लोडिंग की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है.यह भी पढ़ें: कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा सकते हैं OPEC+ देश, क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीज़ल? 

वैश्विक बाजार की तुलना में भारत में ही चीनी का भाव ज्यादा है. यही कारण है कि सरकार इस अंतर को कम करने के लिए सब्सिडी का सहारा ले रही है. लेकिन, सरकार द्वारा सब्सिडी के बावजूद भी इस बार लक्ष्य को पूरा करने में मुश्किलें आने वाली हैं.

सरकार ने 60 लाख टन चीनी निर्यात का लक्ष्य रखा था
एक सर्वे के मुताबिक, सितंबर महीने में ख़त्म होने वाले साल तक करीब 49 लाख टन चीनी का ही शिपमेंट पूरा हो सकेगा. सरका ने 60 लाख टन का लक्ष्य रखा है. इंडियन शुगर मिल्स ने भी कुछ ऐसा ही अनुमान भी जताया है. 2019-20 के दौरान भारत से कुल 50.9 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था.

कंटेनरों की कमी और शि​पिंग सर्विसेज़ में प्रतिस्पर्धा भी देरी का एक कारण हो सकता है. शिपिंग सर्विसेज़ की सुविधा देने वाले फर्म्स बड़ी मात्रा में चावल और ऑयलसीड्स निर्यात करने में जुटे हैं.

यह भी पढ़ें: प्राइवेट सेक्टर में 75 फीसदी रिज़र्वेशन देगा हरियाणा, क्या हैं इसके प्रावधान?

भारत में निर्यात के लिए भरपूर स्टॉक
अधिकतर लोगों का मानना था कि 2021 के पहले और दूसरे तिमाही के दौरान तेजी से चीनी का निर्यात करेगा. घरेलू बाजार में पहले ही जबरदस्त फसल की जानकारी आ चुकी थाी. लेकिन, अब इससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता की स्थि​त बन चुकी है. भारत में निर्यात के लिए भरपूर स्टॉक है, लेकिन अब तक इसका बहुत छोटा हिस्सा ही वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहा है.

दिसंबर से अब तक 30 लाख टन तक का कॉन्ट्रैक्ट
अब गन्ने की फसलों की कटाई का समय लगभग ख़त्म होने वाला है, ऐसे में ​चीनी मिलों के पास कच्चे शुगर निर्यात करने के लिए बहुत कम समय भी बचा होगा. ऐसा भी हो सकता है कि ये मिलें कच्चे शुगर की जगह खराब कमतर क्वॉलिटी वाले चीनी पर ज्यादा ध्यान दें. निर्यातकों ने दिसंबर से अब तक करीब 25 से 30 लाख टन चीनी का कॉन्ट्रैक्ट कर लिया है.

2020-21 के लिए चीनी का उत्पादन करीब 10 फीसदी बढ़कर 3.02 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है. बेहतर मॉनसून की वजह से फसल अच्छी रही है. इस सीज़न के शुरुआत तक भारत के पास करीब 1.07 करोड़ टन का रिज़र्व है. इससे करीब 5 महीने तक घरेलू खपत को पूरा किया जा सकता है.





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments