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पाश्चात्य संस्कृति और जीवनशैली का अनुकरण: हमें पुरानी वैभव की ओर लौटना होगा, तभी सच्ची शांति मिलेगी


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खंडवा4 मिनट पहले

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पाश्चात्य संस्कृति और जीवनशैली के अनुकरण ने हमें अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वैभव से दूर कर दिया है। हम अपना खान पान, रहन सहन, पहनावा और सभी संस्कार भूल गए। हम अपने सहज और सम्मानित जीवन से दूर हो गए हैं। घर परिवार और समाज बंटने लगे। हमें पुराने वैभव की ओर लौटना होगा, तभी सच्ची शांति मिलेगी और भारत दिव्य बनेगा। राठौर धर्मशाला में चल रही शिवमहापुराण कथा के दूसरे दिन शनिवार को पं। प्रबल दीक्षित ने यह उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं पर विदेशी सभ्यता तेजी से हावी होते जा रही है। भारतीय संस्कृति को विदेशी तेजी से अपना रहे हैं और हम हमारी सभ्यता को भूलते जा रहे हैं। पाश्चात्य सभ्यता आदमी को बदलने की बात करता है। पाश्चात्य संस्कृति ने तनाव बदलने की शिक्षा दी और भारतीय संस्कृति ने मन को बदलना सिखाया। पं। दीक्षित ने आगे कहा कि शिव परिवार ऐसा है, जो विश्वास पुरुषार्थ से भरा हुआ एक पूरा परिवार है। जिस परिवार में विश्वास हो गया है। वह परिवार सबसे बड़ा परिवार है। क्योंकि भक्ति की पहली धारा ही विश्वास है। जहां विश्वास हो गया वह जीवन में पार हो गया।

कथा से पहले निकाली कलश यात्रा
कथा से पहले कलश यात्रा निकाली गई। जो हाटकेश्वर मंदिर से होते हुए पौराणिक राठौर धर्मशाला पहुंची। इस दौरान महिलाओं के सिर पर कलश धारण कर जा रहे थे। कथा का आयोजन राठौर धर्मशाला ट्रस्ट के सहयोग और नारी शक्ति ग्रुप महिला मंडल के तत्वावधान में किया जा रहा है। समापन पर 4 मार्च को महा प्रसादी का भी आयोजन होगा।

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