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प्रवर्तन निदेशालय ने हवाला कारोबारी नरेश जैन के मामले में की बड़ी कार्रवाई, कई राज्‍यों में संपत्तियां कीं अटैच


प्रवर्तन निदेशालय ने हवाला कारोबारी नरेश जैन के एक मामले में संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई की है.

हवाला कारोबारी नरेश जैन (Naresh Jain) से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छानबीन में कई आरोपियों का नाम सामने आया. इसके बाद अब सभी आरोपियों की प्रॉपर्टी अटैच (Property Attached) करने की कार्रवाई की गई है. मामले की शुरुआत में दिल्‍ली पुलिस (Delhi Police) की आर्थिक अपराध शाखा ने एफआईआर दर्ज की थी.

शंकर आनंद

नई दिल्‍ली. केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हवाला कारोबारी नरेश जैन से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने कई अन्य आरोपियों की कुछ राज्यों में करीब 65.75 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों (Movable & Immovable Assets) को अटैच कर लिया है. ईडी के एक अधिकारी के मुताबिक, दिल्ली (Delhi), राजस्थान (Rajasthan) और मध्य प्रदेश (MP) में जांच एजेंसी ने ये कार्रवाई की है. ईडी की अटैच की गई संपत्तियों में कई आवासीय संपत्ति और प्रोजेक्ट वाली जमीन है तो कई इंडस्‍ट्रीज के लिए पड़ी जमीन हैं. आरोप है कि ये संपत्तियों गलत तरीके से जुटाए गए पैसे से खरीदी गई हैं.

ईडी ने जांच के बाद इन सभी को बनाया आरोपी
ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में की जा रही छानबीन में कई अन्य आरोपियों का नाम सामने आया था. इसके बाद सभी आरोपियों की प्रॉपर्टी को अटैच करने की कार्रवाई की गई है. ईडी ने जांच के बाद मेसर्स बिमल कुमार जैन, सुनिता जैन, विजय अग्रवाल, मेसर्स जयना इंफ्राटेक्चर लिमिटेड, मेसर्स ग्राफिक बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स एरो बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स सीजन बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स कोनार्क क्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड का नाम आरोपियों में शमिल किया है. ईडी के मुताबिक, इन कारोबारियों का सीधा कनेक्शन हवाला कारोबारी नरेश जैन के साथ रहा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी नरेश जैन और उससे जुडे कई अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रि्ंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज करके जांच कर रही है.ये भी पढ़ें- 5 साल बाद 7 फ्रीक्‍वेंसी बैंड में 3.92 लाख करोड़ के स्‍पेक्‍ट्रम की नीलामी शुरू, मिलीं 77 हजार करोड़ से ज्‍यादा की बोलियां

कौन है हवाला कारोबारी नरेश जैन
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने नरेश जैन और उसके हवाला कनेक्शन के मामले में एफआईआर दर्ज की थी. इसके बाद इसी मामले को आधार बनाते हुए ईडी ने भी मामला दर्ज किया था. शुरुआती दौर में ये मामला आपराधिक साजिश रचने, फर्जीवाड़ा और वित्तीय धोखाधड़ी का लग रहा था. बाद में ईडी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की तो देश के बड़े हवाला कारोबार का मामला सामने आया. आरोपी नरेश जैन ने सैकड़ों लोगों के मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड (PAN Card), जन्म प्रमाण पत्र, शौक्षणिक प्रमाण पत्र, फर्जी हस्ताक्षर के जरिये फर्जी शैल कंपनियां बनाई थीं. इन फर्जी कंपनियों के जरिये वह देश के सैकड़ों लोगों की ब्लैकमनी को लीगल करने में जुट गया.

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जैन ने कमिशन से कमाए 565 करोड़
जैन ने करीब 565 करोड़ रुपये कमिशन से हासिल किए थे. ईडी के वरिष्ठ जांच अधिकारी की मानें तो इस मामले में अभी जांच का दायरा बहुत बड़ा है. इस हवाला मामले में बहुत गहराई है. कहा जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ आने वाले समय में इस मामले में कई सफेदपोश ब्यूरोक्रेट और राजनेता भी ईडी के राडार पर आ सकते हैं. पिछले साल ही ईडी ने नरेश जैन को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद उसके बयानों के आधार पर जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है.








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