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प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव: वाल्मीकि समाज सनातन धर्म की रक्षा करने में आज भी आगे बढ़ा है


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रतलाम2 घंटे पहले

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भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए देश के साधु, सन्यासियों और आचार्यों व जितने भी धर्म के लोग हैं वे सनातन धर्म और धरोहर की रक्षा के लिए संकल्पित है। उमां समझती है कि वाल्मीकि समाज अग्रणी पंक्ति में खड़े होकर सनातन धर्म की रक्षा करने में आज भी आगे हैं।

यह बात राष्ट्रीय संत वाल्मीकिधाम के पीठाधीश्वर बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज (अजैन) ने कही। सुभाष नगर में महर्षि श्री वाल्मीकि व वाल्मीकि समाज के आराध्यदेव जाहरवीर श्री गोगादेव जी चौहान के मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में धर्मसभा में उन्होंने कहा कि आज से 100, 200 और दस हजार साल पहले भी लक्ष्मीबाई समाज आगे था, इसमें संज्ञा नहीं है। यह बात आपको संत रैदास महाराज, कबीर दास, नानकजी, गोरखजी, स्वयं महर्षि वाल्मीकि, रामदेवजी, गोगामेड़ी, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप से मिलती है। उन्होंने कहा कि इस देश में वाल्मीकि समुदाय ने अपनी भूमिका रखी है। आज भी देश की रक्षा, सुरक्षा, सनातन धर्म मर्यादा, मंदिर, मठ की रक्षा में अग्रणी है।

जिले के पहले महर्षि वाल्मीकि मंदिर का लोकार्पण बुधवार को हुआ है। इसमें महर्षि श्री वाल्मीकि व श्री गोगादेवजी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की पूर्व संध्या पर मंगलवार को सुंदरकांड व भजन संध्या हुई। बुधवार सुबह विधि विधान से पंडित शिवपाल छप्री रजनी छप्री ने प्राण प्रतिष्ठा करवाई। इसके बाद पूर्णाहुति और कन्याओं का भोजन और भंडारा हुआ। समाजजन को सौंपा मंदिर – मंदिर किन्नू दीवान भाटी व फिरोज मेहना की स्मृति में कमल भाटी ने बनाई थी। महोत्सव में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संत बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज (अजैन) ने समाज को अर्पित किया। महोत्सव में श्री महर्षि वाल्मीकि सनातन धर्मसभा विकास समिति व बाबा किन्नू दीवान भाटी स्मृति सेवा समिति के पदाधिकारी, सदस्य सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।

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