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फ्रैंकलिन टेंपलटन मामला: स्कीमें बंद होने से पहले अधिकारियों और रिश्तेदारों ने ऋणले थे पैसे, मार्च और अप्रैल में 23 बार में बेची गई कुल 56 करोड़ रुपए की यूनिट


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  • शीर्ष अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं ने मोचन बंद होने से पहले 56 करोड़ रुपये वापस ले लिए थे

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9 मिनट पहले

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डूबते जहाज के कप्तान से उम्मीद की जाती है कि वह उसको सबसे अंत में छोड़ेगा, लेकिन फ्रैंकलिन टेंपलटन की डेट स्कीमों के मामले में ऐसा नहीं हुआ। हम उन छह स्कीमों की बात कर रहे हैं जिनको फंड हाउस ने डेट मार्केट की बदहाली और रिडेम्शन प्रेशर के नेतृत्व में 23 अप्रैल 2020 को बंद करने का फैसला किया था। सेबी की ओर से इस पूरे मामले की कराई गई फोरेंसिक जांच में फंड हाउस के टॉप ऑफिसर्स की तरफ से कथित तौर पर ‘इनसाइडर बी’ होने की बात का पता चला है।

शीर्ष एग्जिक्यूटिव्स और उनसे जुड़े लोगों ने मार्च-अप्रैल में कुल 56 करोड़ बजट की थी

निधि हाउस के टॉप एग्जिक्यूटिव, उनके रिश्तेदारों और ट्रस्टी ने डेट स्कीमों में रिडेम्शन बंद किए जाने से पहले उनसे बिकवाली की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, टॉप एग्जिक्यूटिव्स और उनके रिलेटर्स और उनसे जुड़े संस्थानों ने मार्च और अप्रैल में 23 बार में कुल 56 करोड़ रुपए के बजट में थे। ये निष्कर्षण तब हुआ जब उन स्कीमों के रिडेम्शन प्रेशर को देखते हुए फंड हाउस ने बैंकों से जमकर उड़ी ली थी।

फ्रेंकलिन टेंपलटन के एशिया मनीफिक हेड से लेकर ट्रस्टी तक ने बेची यूनिट्स

फंड हाउस के जिन टॉप एग्जिक्यूटिव ने डेट स्कीमों में रिडेम्शन बंद होने से पहले से उनसे पैसे निकाले थे, उनमें फ्रैंकलिन टेंपलटन के एशिया मनीफिक हेडमा कुदवा अहम थे। उनकी पत्नी रूपा कुदवा (ओमिड्यार नेटवर्क इंडिया की एमडी) और मां वसंती कुदवा ने भी मार्च और अप्रैल के शुरुआती दिनों में उन स्कीमों से पैसे निकाले थे। प्रेसिडेंट संजय सप्रे और उनकी पत्नी प्रदीप सप्रे की तरफ से भी रकम निकाली गई थी लेकिन वह मामूली था। स्कीमों से पैसे निकालने वालों में ट्रस्टी अरविंद वासुदेव सोंडे, निर्देशक जयराम एस अय्यर शामिल थे।

20 मार्च और 2 अप्रैल को विवेक कुदवा ने निकासी की थी

टॉप एग्जिक्यूटिव्स की तरफ से पहली निकासी विवेक कुदवा की तरफ से 20 मार्च को हुई थी और दूसरी बार पैसे उन्होंने 2 अप्रैल को निकाले थे। उनकी ओर से निकाली गई कुल राशि 11.60 करोड़ रुपये की थी। इंडिविजुअल में सबसे ज्यादा 17.45 करोड़ रुपए की राशि उनकी पत्नी रूपा ने निकाली थी। रूपा ने अपनी इकाइयों को लगातार दूसरे दिन, 23 और 24 मार्च को बेची थीं। विवेक की मां वसंती ने 64.5 लाख रुपए की यूनिट्स बेची थीं।

पूरे प्रारूप में 20 मार्च और 23 मार्च की बड़ी महत्वपूर्णता है

फंड के प्रेसिडेंट संजय सप्रे ने 2 मार्च को एक लाख रुपये जबकि प्रदीप सप्रे ने 3 अप्रैल को 4.8 लाख रुपये का भुगतान किया था। फंड के ट्रस्टी सोंडे ने 16 अप्रैल को 2.45 करोड़ रुपये की निकासी की थी। उनके अलावा फ्रेंकलिन टेंपलटन की एसोसिएट कंपनी मायविश मार्केटप्लेसेज ने 22 करोड़ रुपए की यूनिट्स 6 और 11 मार्च को बेची थीं। विवेक कंपनी में डायरेक्टर हैं। पूरे विवरण में 20 मार्च और 23 मार्च की बड़ी महत्वपूर्णता है। फंड हाउस ने 20 मार्च को अपनी उधारी सीमा नेटवर्थ के 20% से बढ़ाने की इजाजत सेबी से पूछा था कि जो 23 मार्च को मंजूर की गई थी।

फंड हाउस को कोर्ट में घसीटने वाले अधिकारियों को बनाया जा रहा है

ये सबके बीच बाजार में एक और कहानी चल रही है। स्कीमों की बदियंतजामी के लिए जिस फंड को कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए, अब उनकी साहसुरी के गुण गाए जा रहे हैं। उसके प्रति निवेशकों और बाजार का गुस्सा सहानुभूति में बदल गया है क्योंकि फंड हाउस कमजोर बाजार में 15,000 करोड़ रुपये निकालने में कामयाब रहा है। जिन निवेशकों ने फंड हाउस को कोर्ट में घसीट लिया था, उन्हें स्कीमों के पास मौजूद राशि के बंटवारे में देरी के लिए विलेन माना जा रहा है।

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