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बाड़मेर न्यूज़: बीमारी के कारण घर में चमक खो रही है क्रिकेट का यह सितारा, बहिन भी हुआ लचार


क्रिकेट खिलाड़ी बाबूलाल जाखड़ को बीते 10 साल और उनकी बहनली जाखड़ को 13 साल की इस बीमारी ने जकड़ रखा है।

प्रदेश का एक बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी (क्रिकेटर) बीमारी के कारण घर में कैद होकर रह गया है। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी (मस्कुलर डिस्ट्रॉफी डिजीज) से ग्रसित बाबूलाल जाखड़ क्रिकेट में बाड़मेर जिले का एक दर्जन से ज्यादा बार प्रतिनिधित्व कर चुका है।

बाड़ लगाने वाला। क्रिकेट (क्रिकेट) की दुनिया में अंडर -17, अंडर -19, काल्विन शील्ड और लक्ष्मणसिंह ट्रॉफी में उमदा प्रदर्शन कर चुके सरहदी बाड़मेर जिले का एक बेहतरीन खिलाड़ी (खिलाड़ी) अब तिल तिलकर जीने को मजबूर है। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी (मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी) के कारण इस खिलाड़ी की जिंदगी घर में कैद होकर रह गई है। केवल इस खिलाड़ी की नहीं बल्कि उसकी बहिन भी इस बेदार बीमारी की चपेट में है।

बीमारी के कारण दोनों भाई बहिन की जिंदगी लाचार हो गई है। वे ना तो चल सकते हैं और ना ही उठ पाते हैं। घर में ही दिन व रात गुजारने को मजबूर हैं। भाई-बहन का दर्द मां-बाप ही नहीं रिश्तेदारों से भी देखा नहीं जा रहा है। लेकिन इलाज किसी के भी हाथ में नहीं है। यह खिलाड़ी बबलू जाखड़ है। कभी क्रिकेट के मैदान का हरफनमौला खिलाड़ी रह चुके बाबूलाल और उनकी बहिनली जाखड़ आज बेबसी के आलम में है। कभी अपनी लड़ाई से शतक जाने वाले बाबूलाल के हाथ अब रीढ़ भी सही तरीके से नहीं थम पाते हैं। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि उनकी जिंदगी में भी कभी आशा का सवेरा होगा।

10 साल से जकॉडे इस बीमारी से हैं
बाड़मेर जिला मुख्यालय के नेहरू नगर में रहने वाले बाबूलाल जाखड़ के घर में आई बीमारी ने दोनों भाई-बहिन को बेबस कर दिया है। क्रिकेट खिलाड़ी बाबूलाल जाखड़ को बीते 10 साल और उसकी बहनली जाखड़ को 13 साल इस बीमारी ने जकड़ रखा है। यह बीमारी का देश में इलाज संभव नहीं है। विदेशों में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का इलाज संभव है लेकिन बाबूलाल का पारिवारिक खर्च इलाज करवाने की स्थिति में नहीं है।इलाज स्पष्ट होने के कारण वह सामान्य परिवार के बूते की बात नहीं है

बाबूलाल और बाली का एम्स दिल्ली, जोधपुर और स्टर्लिंग अस्पताल अहमदाबाद से इलाज करवाया गया, लेकिन डॉक्टर्स ने एक्सरसाइज की सलाह दी है। इसके साथ ही दर्द से राहत देने वाली की दवाईयां दी है। इस बीमारी की चपेट में आये भाई व बहिन की जिंदगी मानों बोझ सी बन गई है। हालांकि परिवार के सदस्यों ने अभी तक हिम्मत नहीं हारी है और इलाज के प्रयास जारी हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ। महिपाल चौधरी इसे लाइलाज बीमारी मान चुके हैं। लेकिन उनका कहना है कि विदेशों में इसका इलाज संभव है। इलाज स्पष्ट होने के कारण वह सामान्य परिवार के बूते की बात नहीं है।

लगातार 15 साल तक बाड़मेर की क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया
बाबूलाल जाखड़ अच्छे क्रिकेटर रह चुके हैं। जाखड़ ने लगातार 15 साल तक बाड़मेर की क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया है। खेल में ही नहीं राजनीति में भी जाखड़ की भूमिका सक्रिय रही है। वे एनएसयूआई के जिला महामंत्री, यूथ कांग्रेस के महासचिव और कांग्रेस आईटी सेल के ब्लॉक समन्वयक रह चुके हैं। इतना ही नहीं सामाजिक सरोकार के कार्यों में भी सक्रिय भूमिका रही है। बस अब एक ही उम्मीद है कि सरकार कोई भी पहल करे तो भाई-बहिन की जान बच सकती है।







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