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बिजली बिल ने ली किसान की जान: सांसद में किसान ने फांसी लगाई, सुसाइड नोट में लिखा- बॉडी सरकार को दे दो, जिससे अंग बेचकर 88 हजार दे चुके


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छतरपुर14 मिनट पहले

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छतरपुर में रहने वाले 35 साल के मुनेंद्र का शव खेत में आम के पेड़ से लटका मिला।

  • मध्य प्रदेश के छतरपुर में पेड़ से लटका मिला शव, वहीं पड़ा था सुसाइड नोट
  • बिजली बिल वसूलने टीम पहुंची तो मौके पर 15 हजार देने को तैयार थी किसान

मध्य प्रदेश के छतरपुर में 35 साल के किसान ने गुरुवार को फांसी लगा ली। वह आटा चक्की मशीन थी और बिजली का 88 हजार का बिल नहीं था पा रहा था। कुछ दिन पहले ही विभाग ने उसकी चक्की, मोटर और बाइक रखने कर ली थी। खुद को अपमानित महसूस कर रहे किसान ने खुदकुशी कर ली। एक औसाइड नोट मिला है, इसमें उसने लिखा है कि मेरा शरीर सरकार को सौंप देना, जो अंग-अंग बेचकर 88 हजार दी थी।

ये घटना जिले के मातगुवां कस्बे की है। चक्की चलाने वाले मुनेंद्र राजपूत का शव खेत में आम के पेड़ से लटका मिला। उसके घर सोमवार को बिजली विभाग के कर्मचारी बिल की वसूली करने पहुंचे थे। कर्ज नहीं चुकाने पर कुर्की की कार्रवाई कर दी। विभाग का कहना है कि मुनेंद्र पर 2018 से बिजली का बिल बकाया था। कई बार नोटिस के बावजूद वह बिल नहीं रहा था।

3 पेज का क्यूडाइड नोट, लिखा- लॉकडाउन में काम ठप हुआ, 3 भैंसेंड चोरी हो गए
मौके पर पुलिस को 3 पेज का क्यूड नोट मिला है। इसमें मुनेंद्र ने लिखा, ‘लॉकडाउन में काम ठप होने, एक भैंस की करंट से मौत, तीन भैंस चोरी होने और खेती से भी आमदनी नहीं होने के कारण बिल नहीं पड़ा है। शरीर के अंग बेचकर कर्ज दिया था। सभी को नमस्कार। ‘

मुनेंद्र ने खुदकुशी से पहले 3 पन्नों का कुसाइड नोट लिखा।  इसमें लिखा की लॉकडाउन की वजह से आमदनी नहीं हो रही थी।

मुनेंद्र ने खुदकुशी से पहले 3 पन्नों का कुसाइड नोट लिखा। इसमें लिखा की लॉकडाउन की वजह से आमदनी नहीं हो रही थी।

15 हजार जमा कर रहा था, पर महकमा ने माना नहीं
मुनेंद्र के भाई लोकेन्द्र ने बताया कि भाई ने बिजली विभाग की टीम से कहा था कि सामान क्लिक ना करें। अभी 10-15 हजार रुपये जमा कर देता है, बाकी फसल आने पर जमा कर दूंगा, लेकिन टीम ने एक नहीं सुनी। सामान निकालने वाले कर मुनेंद्र के अस्थयन दस्तखत करवा के लिए। इससे वह इमेजिंग में आ गया है। मुनेंद्र के परिवार में पत्नी, 3 बेटे और एक बेटा है।

विभाग की दलील- वह किसान नहीं था, बिलियन था

महकमे के अधिकारियों का कहना है कि मुनेंद्र को बिल चुकाने के कई मौके दिए गए हैं। बिजली कंपनी के छतरपुर संभाग के कार्यपालन अभियंता आरके पाठक ने कहा कि मुनेंद्र किसान नहीं था, उसकी कंपनी उद्योग थी। कमर्शियल कनेक्शन लिया गया था दो-तीन नोटिस के बावजूद बिल नोटेडाया के बावजूद। फिर आरआरसी जारी की गई। इसके बाद भी कई बार उसे दिया गया। 8 दिसंबर को पुनः आरआरसी जारी की गई, लेकिन फिर बिल जमा नहीं किया गया। तब तक पुलिस के साथ कुर्की की कार्रवाई की गई।

एसपी सचिन शर्मा और डीआईजी विवेकराज सिंह भी इस घटना की सूचना पर मौके पर गए। एसपी का कहना है कि बिजली कंपनी के बकाया और एंड्राइड नोट की जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।





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