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बेंगलुरु ITAT का नंबर: बेटी के नाम खरीदे मकान पर कैपिटल टैक्स से छूट, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 54-F में ‘प्रावधान है


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  • आप बेटी के नाम पर खरीदी गई आवासीय संपत्ति पर धारा 54 एफ के तहत पूंजीगत कर छूट का दावा कर सकते हैं

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9 मिनट पहले

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  • असेसिंग ऑफिसर ने कहा था, अस्सीसी को छूट अपने नाम मकान खरीदने पर ही मिलेगी
  • ट्राइब्यूनल के मुताबिक कानून में असेसी के अपने नाम मकान खरीदने की बाध्यता नहीं है

अगर आपने मकान बेचने से मिली रकम से बेटी के मकान पर खरीदा है तो आप अपने मकान के खरीदने में हुए कैपिटल गेंस पर निवेश की रकम के बराबर टैक्स डिडक्शन का लाभ पा सकते हैं। यह टैक्स छूट का लाभ इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 54 एफ के तहत उठाया जा सकता है!

इसको लेकर हाल ही में इनकम टैक्स एपीलेट ट्राइब्यूनल (ITAT), बैंगलोर का एक नंबर आया है। इस मामले में इनकम टैक्स ऑफिसर ने एक शख्स (असेसी) को विधवा बेटी के नाम रिहायशी मकान में किए गए निवेश पर टैक्स छूट क्लेम करने से रोक दिया था।

असेसी ने मकान विधवा बेटी के नाम को जोड़ा था जो उसकी कानूनी वारिस थी

मामला कुछ ऐसा है। असेसी ने एक प्रॉपर्टी को दूसरे वेरिसों के साथ मिलकर 2,60,46,754 रुपये में बेचा था। असेसी ने असेसिंग ऑफिसर को बताया कि प्रॉपर्टी उसको परिवार बंटवारे में मिली थी और उस पर उसके अलावा उसकी पत्नी, बेटे और विधवा बेटी का मालिकाना था।

मकान बेचने से मिली पूरी रकम बेटी के नाम एक रिहायशी मकान खरीदने में लगा दी गई थी। असेसी ने अपने रिटर्न में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 54 एफ के तहत कर कटौती का लाभ मांगा था, जिसको असेसिंग ऑफिसर ने नामंजूर कर दिया था।

असेसिंग ऑफिसर ने कहा था, अस्सीसी को छूट अपने नाम मकान खरीदने पर ही मिलेगी

असेसिंग ऑफिसर का कहना था कि असेसी ने मकान बेचने से मिली रकम बेटी के नाम रिहायशी मकान खरीदने में लगा दी, जिस पर टैक्स में छूट की इजाजत नहीं है। ऑफिसर के मुताबिक, असेसी को टैक्स छूट उसी सूरत में मिल सकती है जिसमें वह पुराने मकान बेचने से मिली रकम के नाम पर मकान खरीदने में लगा दिए गए हैं।

ट्राइब्यूनल के मुताबिक कानून में असेसी के अपने नाम मकान खरीदने की बाध्यता नहीं है

हालांकि इस मामले में ट्राइब्यूनल के जूडिशियल मेंबर्स ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 54 में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि इसके तहत टैक्स छूट के लिए असेसी को अपने नाम पर मकान खरीदने का होगा। उनके मुताबिक इनकम टैक्स एक्ट के इस सेक्शन में सिर्फ इतना कहा गया है कि मकान की खरीदारी या उसका निर्माण असेसी के जरिए होना चाहिए।)

ट्राइब्यूनल ने यह भी कहा कि प्रावधान आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए हैं, इसलिए इसको उदार तरीके से लिया जाना चाहिए। पाबंदियों को भी मकसद में अड़ंगा लगाने वाला नहीं बल्कि पूरा करने वाला होना चाहिए।

जू दिशात्मक मेंबर्स ने कहा, असेसी से मकान पाने वाली लड़की उसकी कानूनी वारिस है

जूडिशियल मेंबर्स ने कहा कि असेसी ने अपने मकान को बेचने से मिली रकम अपनी विधवाश्रित बेटी के लिए न्यू रिहायशी मकान खरीदने में लगाई जो असेसी की कानूनी वारिस भी है। असेसी की बेटी की आमदनी का अलग से कोई जरिया नहीं है और वह पति की मौत के बाद पूरी तरह से पिता पर निर्भर है।

इसलिए असेसिंग ऑफिसर को असेसी की तरफ से बेटी के नाम मकान में किए गए निवेश की राशि पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 54 एफ के तहत टैक्स छूट देने का आदेश जारी किया गया।

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