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ब्रेन सर्जरी में श्लोक शक्ति: 36 साल की महिला ऑपरेशन के दौरान गीता के श्लोक बोलती रही, डॉ। बोले- 9 हजार ऑपरेशनों में ऐसा पहला मामला


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  • मस्तिष्क की खुली सर्जरी, रोगी, डॉक्टरों के स्मरणीय गीता श्लोकों का जप करते हुए, एक घंटे तक गीता के छंदों को लगातार सुनकर चौंक जाते हैं

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अहमदाबाद18 मिनट पहलेलेखक: शायर रावल

ओपन सर्जरी के दौरान गीता के श्लोकों का जाप करती हुईं मरबेन। उनके दिमाग में गांठ बन गई थी, जिसका ऑपरेशन कामयाब रहा।

श्रद्धा में शंका नहीं होती, इस कहावत को चरितार्थ करने वाला मामला अहमदाबाद में सामने आया। यहां 36 वर्षीय महिला मरीज दया भरतभाई मरेलिया की सफल ओपन सर्जरी की गई। चौंकाने वाली बात यह हो रही है कि सर्जरी के वक्त दयाबेन गीता के श्लोकों का जाप कर रहे थे। सर्जरी लगभग सवा घंटे तक चली और एक घंटे बाद तक डॉक्टर्स उनके मुंह से गीता से श्लोक सुनते रहे।

दिमाग में गांठ पड़ गई थी
सूरत में रहने वाली दयाबेन बुधेलिया के मस्तिष्क में खिंचाव आ गया था। मेडिकल जांच में उनके मस्तिष्क में गांठ होने की बात सामने आई। गांठ उस जगह थी, जिससे लकवा का खतरा था। इसके बाद सर्जरी की तैयारी की गई। 23 दिसंबर को न्यूरो सर्जन डॉ। कल्पेश शाह और उनकी टीम ने ऑपरेशन किया। सर्जरी गंभीर थी, इसलिए मरीज का होश में रहना जरूरी था। जब यह बात दयाबेन को बताई गई तो उन्होंने डॉक्टर्स से गीता के श्लोक बोलने की मंजूरी मांगी। इसके बाद सर्जरी पूरी होने तक दयाबेन श्लोकों का जाप करती रही और उनकी सफल सर्जरी भी हो गई।

सफल सर्जरी के तीन दिन बाद ही दयाबेन को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

‘ऐसा पहली बार देखा’
डॉ। कल्पेश शाह ने बताया कि मैंने अब तक 9 हजार से ज्यादा ओपन सर्जरी की हैं, लेकिन ब्रेन सर्जरी के दौरान मरीज द्वारा गीता के श्लोक गुनगुनाने का यह पहला ही मामला देखा। मस्तिष्क से गांठ निकालने में हमें लगभग सवा घंटे का वक्त लगा दिया। इस दौरान उन्हें अवेक एनेस्थेसिया दिया गया, जिससे वह होश में रही। सर्जरी के तीन दिन बाद ही दयाबेन को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था।

ऐसा लगा, स्वयं भगवान दया के पास आकर खड़े हो गए थे: भरतभाई
दयाबेन के पति भरतभाई ने बताया, ‘ब्रेन ट्यूमर की बात सुनते ही पूरा परिवार घबरा गया था, लेकिन हमें ईश्वर पर श्रद्धा थी। जब दयाबेन सर्जरी के दौरान गीता के श्लोकों का जाप कर रहे थे, तो ऐसा लगा, जैसे कि स्वयं भगवान उनके पास आकर खड़े हो गए थे। ‘ दयाबेन कहती हैं कि गीता का ज्ञान तो बचपन में ही माता-पिता से मिल गया था। ईश्वर में मेरी पूरी आस्था है। यही संस्कार मैंने अपने बेटों को भी दिए हैं।





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