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भारत बंद: भारत बंद के समर्थन में उज्जैन के व्यापारी बोले- व्यापारियों ने खुद के व्यापार के लिए किया बंद, तीन करोड़ का व्यापार


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अजान11 मिनट पहले

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कलेक्टर के प्रतिनिधि कोन्यनेस रीडकर सुनाते हैं

  • जीएसटी की जटिलताओं को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा

वस्तु एवं सेवा कर यानि जीएसटी (जीएसटी), ई-कॉमर्स और खाद्य सुरक्षा कानूनों की जटिलताओं के विरोध में आयोजित देशव्यापी भारत बंद के समर्थन में उज्जैन में भी व्यापारियों ने भी दोपहर तक बाजा बंद रखा। बंद का आह्वान कंफेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की ओर से बुलाया गया था। बंद सेजैन में लगभग तीन करोड़ के व्यापार के प्रभावित होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वर्ण आयोजनों ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन कलेक्टर को दिया है।
कैट के जिलाध्यक्ष सुनील गुप्ता ने कहा कि व्यापारियों ने खुद के व्यापार के लिए भारत बंद किया है। उन्होंने बताया कि हाल में हुए संशोधनों ने व्यापारियों को न केवल भ्रष्टाचार के बजाय बेइमानी करने के लिए मजबूर कर दीदया है। जीएसटी की कानूनी जटिलताओं के कारण व्यापारी ईमानदारी से व्यापार नहीं कर पा रहा है।
जीएसटी में नए संशोधनों से व्यापारियों को व्यापार करने के परेशानी आ रही है। संशोधनों को खत्म किया जाना चाहिए। जीएसटी को सरल बनाया जाए। मार्कर जीएसटी भरना चाहता है। इसके लिए उसे वकील से लेकर सीए तक को अप्वाइंट करना पड़ता है। जीएसटी को इतना सरल बनाया जाए कि छोटे से छोटे व्यापारी भी अपना व्यापार आसानी से कर सकें और जीएसटी भर सके।
मार्कर राजेश अग्रवाल ने कहा कि चार साल में जीएसटी में 950 संशोधन किए गए हैं। भारत बंद कोjain में 19 संस्थाओं ने समर्थन दिया। ड्रगिस्ट एड केमिस्ट एसोशिएशन, चैंबर ऑफ कामर्स, दौलत गंज मार्कर एसोसिएशन, औटो मोबाइल एसोसिएशन, फ्रीगंज व्यापारी महासंघ ने बंद के समर्थन में दुकानें बंद रखीं।
ये विसंगतियां हैं
लक्षणसिटी को जीएसटी रिटर्न दाखिल करने से रोकना, आईटीसी से वंचित करना, परीक्षण का अवसर दिया बिना चरित्र की अनुज्ञप्ति निरस्त करना, अकृतियुक्त ब्याज व शास्ति आरोपित करना, कर जमा करने के बाद भी दंडात्मक करना, कागजी आचार समितियों को बढ़ावा देना, डिजिटलाइजेशन के नाम। पर डेटा को बार-बार अलग-अलग-अलग स्वरूपों में प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करना, व्यापारी की गलतियों की सजा सीए व वकीलों को देना, मांग से अधिक जमा टैक्स की वापसी पर देरी करना, माल व वाहन की मरम्मत, छोटे-छोटे विवादों के लिए न्यायालय या अपीलीय अधिकारी के पास जाने को बाध्य करना, प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों के विपरीत परीक्षण का अवसर नहीं देना, मॉड्यूल एपिसोडों में एफआईआर करना, मीडिया ट्रायल को स्पष्ट करना, व्यापारी की कार्यशील पूंजी को बाधित करना, बैंक खाते सीज करना व्यापार को प्रभावित कर मार्कर की वापसी को धूमिल करना।

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