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भोजपुरी विशेष – बंगाल में मुस्लिम वोटन की प्रवृत्ति काअन ओर रही


इ चुनाव में भी अगर इहे हाल रहल त भाजपा के लाभ त होइबे करी। ऊपर से अगर मुलसमानन वोट वोट में खोट होइल त तृणमूल कांग्रेस के अउर नुकसान होइ। ओकर नुकसान मतलब भाजपा क पौधा।

  • News18Hindi
  • आखरी अपडेट:27 फरवरी, 2021, 3:08 PM IST

देस आजाद भाइला के बाद बंगाल में पहली बार मुस्लिम वोटन के लेके एगो नए परयोग हो रहल ह। इ परयोग बंगाल के होवेवाला विधानसभा चुनाव में देखे के मिले। आजादी के समय मुस्लिम लीग के बाद पहली बार बंगाल में मुस्लिमन के लाभ खातिर एगो नए दल भारतीय सेकुलर एमके बनल ह। इ एमके बनावे वाला फुरफुरा शरीफ क मुखिया अब्बास सिद्दकी हउअन। कई चुनावों के बाद बंगाल में ज्यादातर जिला क मुस्लिम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी क पार्टी तृणमूल कांग्रेस के वोट करत रहलें। तबहू हिंदूवादी बहुल मालदा, मुर्शिदाबाद अउर उतरेंनजपुर जिला क अल्पसंख्क वोटर कांग्रेस क साथे रहलें। अब मुस्लिमन क समस्या क निबटावे खातिर एगो नया दल बनला के बाद बंगाल क मिनक वोटरन के मन में जरूर एक तरफ क दुष्म जनम ले लेले ह कि केके वोट करीं केके नाही।

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देस भर में भाजपा क उभार के बाद मानन इ जाला कि मुस्लिम मतदाता ओही दल बा प्रत्याशियन के वोट करेला जे भाजपा के कट्टर संभव। ए बार क चुनाव में भाजपा क मजबूती के चलिते बंगाल क मुसलमानन के दिमाग में भी इहे बात घूम रहल होई कि भाजपा के दुबवे के खातिर ओही के वोट कलाईल जे ओके हरावे में सबसे मजबूत होई। अउर इहे सोच ओकर दुविधा क कारण भी बनल जात ह। अइसे त आज क स्थिति में तृणमूल कांग्रेस ही सबसे मजबूत दल ह जेम बंगाल में भाजपा के रोके क दम रखत ह। लेकिन फुरफुरा शरीफ की ओर से एगो नए दल बनावे के चलते मानल इ जात ह कि अगर मुस्लिमन क थोड़ बहुत वोट भी अब्बास सिद्दकी क भारतीय सेकुलर मे की ओर गाइल त तृणमां कांग्रेस क ही नुकसान होइ अउर भाजपा के सरकार बनावे जइसन लाभ भी हो सके। ला।

मीडिया में आ रहल रपट के अनुसार बंगाल क अबकी क चुनाव में तृणमूल कांग्रेस अउर भाजपा क बीचे ही सत्ता कवर्ड लड़ाई ह। 2019 क लोकसभा चुनाव क परिनाम भी इहे गग्रेशन दे रहल ह जेम भाजपा 42 में से 18 सीट जीत गइल रहे। कांग्रेस के एगो सीट से संतोष करे के पड़ल अउर बाकी पर तृणमूल कांग्रेस की जीत भईल। अउर त अउर 34 साल तक बंगाल क सत्ता पर बियाठल रह वामसनियन के एगो सीट नाही मिलल। कहल इ जाला कि बंगदेस से सटल बंगाल की जिलन में बंगदेसी त्वयान, रोहंगिया मुस्लिमन के बसावे के साथे नागरिकता कानून क मुद्दा उठावे के चलते भाजपा क खाते में वामपंथी की क हिंदू बंगाली वोट भी चल रही गइल जेकरा के साथ भाजपा उ सबका क कई सीट जीत गइल। अउर वामपंथियन के खाते तक न खुलता पाइल। इ चुनाव में भी अगर इहे हाल रहल त भाजपा के लाभ त होइबे करी। ऊपर से अगर मुलसमानन वोट वोट में खोट होइल त तृणमूल कांग्रेस के अउर नुकसान होइ। ओकर नुकसान का मतलब भाजपा क पौंध ।2011 क जनगणना क अनुसार बंगाल में मुस्लिमन क संख्या लगभग 2.5 करोड़ है जउन बंगाल क कुल आबादी क लगभग 27 प्रति ह। एमें से बंगाली मुसलमानन क संख्या 1.9 करोड़ ह। बाकी क संख्या गैर बंगाली मुसलमानन क ह। एमें भी सबका ले अधिका बिहारी अउर पूर्वांचली मुसलमान हउअन। 34 साल क वामपंथी राज के चलिते गांवों में होने वाले बंगाली मुसलमानन की आबादी वामपंथियों के वोट बैंक बन गइल रहे। जाइसे जाइसे वामपंथी बंगाल में कमजोर पड़त गइलन, इ वोट बैंक आस्ते आस्ट तृणमूल कांग्रेस क झोरा में चल रही गइल। ऊपर बतावल दो तीन जिला कंगाली मुस्लिम कांग्रेस के साथे ही बनल रहल। वामपंथी की राज में भी इ कांग्रेस कांग्रेस के साथ रहल। लेकिन भारतीय सेकुलर एमए बन जाइला के बाद बहु गणित बदलल दिखाई पड़त ह। वइसे अइसन मानल जात ह कि फुरफुरा शरीफ क असर गांव गुरबा में बसल बंगाली मुसलमानन पर अधिका पड़ी अउर कलकत्ता बा कल कारखाने वाला इलाकन में बसल गैर बंगाली मुसलमानन – कम। अइसन में एकर परभाव तृणमूल कांग्रेस अउर कांग्रेस दूनों पर पड़ी।
शायद एही के चलिते कांग्रेस अब्बास सिद्दकी क पार्टी से चुनीवी तालमेल क बात चली गई ह। एकरा खातिर वामपंथी भी राजी हो गइल हउअन। लेकिन केक्शन सीट सिद्दकी क पार्टी के महाजोट दे पाइ एके लेके मगजमारी चल रहल ह। कांग्रेस कयर इ कि सिद्दकी की पार्टी मुस्लिम बहुल जिला मालदा, मुर्शिदाबाद अउर उत्तरी हिनजपुर में अधिका सीट ने जहवें ओकर पहिले से ही पर व्यवहार एच। अइसन में इ तालमेल हो पाया कि नाही इ हो सवाल उठ रहल ह। प्रारंभ से जब भारतीय सेकुलर एम। बनल रहे तब ओकर असादुद्दीन ओवेसी क पार्टी एमआईएम से चुनावी तालमेल क बात चल रही है। इ तालमेल गैरकानूनी रिपब्लिकन के अधिका नुकसान पहुंचावत। बाद में कांग्रेस वामपंथी क महाजोट से तालमेल से बात चलेगी। अब फेरो अब्बास सिद्दकी मुस्लिमन से ओवेसी क पार्टी क साथ देबे क बात कहत हउअन। अइसन में मुस्लिमन क दुविधा अउर बढ़ी।

वइसे बंगाल क राजनीतित क नबज जानेवालन क विचार ह कि अगर सिद्दकी क पार्टी क तालमेल कांग्रेस – वामपंथी महाजोट से हो गइल त बंगाल क ग्रामीण इलाकन में लड़ाई तीन तरफा हो सकेला जेमे वामपंथी दल के हिंदू बंगाली वोटर फिर से उनकरा साथे जुड़ाव लून है। अउर अगर अइसन होइल त भाजपा क नुकसान होइ जेकर सोझ लाभ तृणमूल के मिले संभवला। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)







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