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भोजपुरी स्पेशल: भोजपुरी सिनेमा के कॉमेडियन हँसावेले कम, फुहड़ता लउकेला सिनेमा …


कॉमेडी सीन आ लाफ्टर रिलीफ कवनो भी फिलिम के जान होला। हिंदी, साउथ चाहे भोजपुरी इंडस्ट्री होके, कॉमेडी के बहुते स्कोप होला। हालांकि कई बार निर्देशक-लेखक मर्यादा भूल गए अलेर उड़ेता के हद तक पहुँच जालें। स्वस्थ कॉमेडी एगो चैलेन्ज ह। केहू के हँसावल मजाक ना ह। भोजपुरी के पुरनका फिलिम में हरी शुक्ला हँसावत रहलें, ख़ास के के अपना तकिया कलाम आ बोले के स्टाइल से। गंगा किनारे मोरा गांव में उनकर तकिया कलाम ढकनेवाला बड़ा फेमस भाइल रहा। बाद के समय में नाड़ा लटका के अलूल जलूल भाव भंगिमा वाला कॉमेडियन भी नज़र अइलेंद। अश्लील आ द्विअर्थी संवाद आ दृश्य से भी हास्य पैदा करे के प्रयास भायल। हम एकरा के कॉमेडी में बेहूदगी कहेनी। अइसन कॉमेडी में हँसी ना बरेला, मुँह से गारी निकलेला। अभी भी भोजपुरी सिनेमा में कॉमेडी कहानी के हिस्से कम आ फिलर ज्यादा बाबा।

दरअसल ध्यान से देखल जाव त सिनेमा तीन चीज, स्टार पावर, कॉमेडी अउर गाना से चले गए। तीनों के काम की कहानी में दर्शक के इंटरेस्ट पैदा कइल ह। हम ई त ना कहे कि भोजपुरी सिनेमा में अइसन होते हैं बा लेकिन इहो ना कहेब कि भोजपुरी में कॉमेडी हयाल वही नइखे। बा, अच्छा कॉमेडी भी बा, अच्छा कॉमेडियन भी बच्चा। कुछ लोग त हिंदी आ दोसरा क्षेत्रीय भाषा के बड़े प्रोजेक्ट में काम करके भोजपुरी में इल बा। त, आईं भोजपुरी सिनेमा के कुछ प्रमुख कॉमेडियन के सफर अउर उनकी बेहतरीन कॉमेडी के बात कइल जाओ।

हरी शुक्ला, पुरनका दौर के सबसे अधिक लोकप्रिय कॉमेडियन-
पुरनका दौर के भोजपुरी सिनेमा के सबसे अधिक लोकप्रिय हास्य अभिनेता के नाम ह हरि शुक्ला। पचास से ज्यादा फिल्म में कॉम किरदार निबेलें बाड़ें। कॉमेडी के साथ साथ ऊ अपना तकिया कलाम खातिर फेमस रहलें। उनकर पहिला भोजपुरी फिल्म रही बिदेसिया। बिदेसिया में ऊ एगो तकिया कलाम के प्रयोग कइले रहलें “तोरे का नाउ से”। तब तक यूपी बिहार के सिनेमा प्रेमी उनकर नामे रख दिहल तोरे का नाउ से। आगे के सफ़र में उनकर नाम बदलत रहल जाइसे की ढकनेवाला, का हो दर्दनाक शौचालय के, काेन कि ओह समय के सिल्वर जुबली फिल्म गंगा किनारे मोरा गाँव में उनकर तकिया कलाम ढकनेवाला अचर फिल्म दगाबाज बलमा में उनकर तकिया कलाम (गीत के लिए) लोग के। जुबान पर चढ़ गइल रहे.अह सब तकिया कलाम के अइसन असर भाइल कि आगे के अधिकांश फिल्म जइसे कि दंगल, ठकुराईन आदि में हरी शुक्ला के तकिया कलाम एगो जरूरी शर्त बन गइल रहे। ई सब तकिया कलाम संवाद लेखक ना लिखत रहलें, उन द डिस्प्ले हरी शुक्ल खडे जोड़त रहलें। ओह समय के कुछ कॉमेडियन लोग जाइसे कि सीएस दुबे आदि उनकर नक़ल कइल लेकिन हरी शुक्ला वाला प्रभाव ना छोड़ सकल। हरी शुक्ल के समय में आ ई कहीं कि पुरनका भोजपुरी फिल्म में कॉमेडी कहानी के हिस्से रहे अउर आज कल के तरह नाड़ा हैंवे आ अश्लील हरकत कर के हास्य पैदा करने वाला कोशिश ना होके। अउर अब बात कइल जाना भोजपुरी सिनेमा के आधुनिक युग के कॉमेडियन के।

आधुनिक सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कॉमेडियन मनोज टाइगर –

निरहुआ के फिल्मन के जान बाशन बताशा चाचा। दिनेशलाल यादव निरहुआ 2006 में फिलिम “चलत मुसाफिर मोह लियो रे” से भोजपुरी फिल्मन में डेब्यू कइले रहलन। एही फिलिम से एगो अउर अभिनेता के डेब्यू भाइल रहे जे आगे चलके भोजपुरी के सबसे सफल हास्य कलाकार बनले, जेकरा के भोजपुरी के दर्शक बताशा चाचा के नाम से जानेवाला। बताशा चाचा के असली नाम मनोज सिंह टाइगर हवे। मनोज टाइगर उत्तरप्रदेश के आज़मगढ़ के रहे हुए हउवन। उनकर निरहुआ से एही फिलिम के दौरान दोस्ती भइल अउर ई दोस्ती काफी रंग ले आइल। मनोज टाइगर निरहुआ के साथे काफी सफल फिलिम देले बापन, हालांकि ऊ रविकिशन आ खेसारीलाल के साथे भी कईगो फिलिम कइले बालपन, लेकिन पवन सिंह के साथे उनकर 15 गो से ऊपर फिलिम बा।

रामलीला से फिल्मन तक के सफर आसान ना रहल। मनोज टाइगर अपना प्रदर्शन के शुरुआत गांव के रामलीला से कइले। हालांकि ऊ ऊँ हरमन सीरियस किरदार करत रहले। एक बार आरएसएस के कैंप में ऊ कॉमेडी स्क्रिप्ट के प्रदर्शन कइले, उतन वर्णन के ठहाकेदार हंसी उनके अंदर के कॉमेडियन से उनकर परिचय करवलस। मनोज जइसे-तइसे मुम्बई अइलें अउर उ प्रसिद्ध धरती निर्माता जवइन कइ लिहले। उंस “नेताजी के प्लेटफॉर्म शो” नाटक में उनकर बउवा के रोल काफी प्रसिद्ध भईल।

उनकर ओह समय के साथी निर्देशक मनोज ओझा उनकर काम देख के उनके के भोजपुरी डायरेक्टोरियल फिलिम “चलत मुसाफिर मोह लियो रे” में चांस दिहलन। मनोज के काम से प्रभावित निर्माता, निर्देशक उनका के एह फिलिम के रिलीज से पहिलही आगे चल के सुपरहिट रहल कई गो फिलिम जाइसे कि निरहुआ रिक्शावाला, हो गइल बा के प्यार ओढनिया वाली अउर श्रीमान ड्राइवर बबू में आपकी कर लेले रहलन। फिलिम “निरहुआ रिक्शावाला” में उनकर किरदार बताशा चाचा अमर हो गइल।

अब कॉमेडियन हूर के पिछलग्गू हो गइल बेबनेस
मनोज भोजपुरी के कई गो कोमेडियन से खासा नाराज रहेलें। उनकर मानते बा कि आज के कोमेडियन-एक्टर में ऊ ठसक नइके रह गइल जवन पहिले होइल रहल। अब ऊ स्क्रिप्ट के डिमांड के कारण से अनलाइन हर के पिछलग्गू हो गइल बाबड़े। कैमरा ऑफ होते हैं ओ ऑफ डॉट भी स्टार के खुशामद में लगे जालन कि उनकरा के अगिला फिलिम में काम मिल जाए। मनोज के यकीन बा कि जल्दीये भोजपुरी के ई दौर समाप्त हो जाई अउर सेंसिबल लोग एकरा के पासचर कर ली, तब जाके भोजपुरी सिनेमा के अस्मिता लव।

मनोज के कुछ बेतुका फिलिम कइला के अफ़मा बा
मनोज टाइगर के दस बेहतरीन किरदारन में उनकर “निरहुआ रिक्शावाला” में बताशा चाचा के किरदार जे हूर के मौसी के बेटे रहल, ऊ सबसे ज्यादा पसंद कइल गइल। इहे किरदार उनका के बताशा चाचा के नाम से प्रसिद्ध कइलस। ऊ फ़ारूक़ सिद्दीक़ी के फिलिम “प्रेम के रोग भाइल” में पांच अलग-अलग किरदार कइले रहलन। एह फिलिम के पीवीआर में स्क्रीनिंग के टाइम उदित नारायण के हंसत-हंसत कुर्सी से गिरे के हालत हो गइल, तब हंसते-हंसत उदित नारायण मनोज के दिल से शुभकामना देले रहलन। उनकर निरहुआ के फिलिम “दीवाना” में लव गुरु के रोल फुल कॉमेडी से भरल रहल, जे लोगन की शादी करावे खातिर हिंत देत बा। मनोज के आपन अभी तक के करियर में कुछ बेतुका फिलिम कइला के अल भी होला, हालांकि ऊ अइसन फिल्मन के नाम ना बतावेले।

मनोज पवन सिंह के साथे “पवन पुरवाईया” में कॉमेडी हूर के रोल कइले रहले। तब लोगन केजेल रहे कि ऊ मुख्य किरदार में भी जम कर संभल जाएं। फिलिम “पटना से पाकिस्तान” में उनकर नेगेटिव शेड्स चिंता चिंता चौबे के किरदार अभियो वर्णन के ज़ेहन में ताज़ा रहीला, जे खूब कॉमेडी कइले रहल। “ेजल होने बताशा “उनकर हालिया रिलीज लीड रोल वाला फिलिम रहा, जे कुछ खास ना चल पावल। मनोज के बेहतरीन रोल वाले फिल्मन में वाह खिलाड़ी वाह, राऊडी रानी, ​​मृत्युंजय, बताशा चाचा, हल्फा मचा के गाइल, कच्चे माल अउर दयावान आदि प्रमुख बा।

मनोज टाइगर के फिल्मी करियर में 15 साल के हो गइल बा। बकौल मनोज, “ऊ अभी ले कॉमेडी में आप 20 प्रतिशत ही देखवले बाड़े, बाकी 80 परसेंट देखावे खातिर ऊ मौका के तलाश में बाड़न। ऊ कई गो फिल्मन के स्क्रिप्ट लिखे अउर निर्माण करे में लागल बाबरे। साथ ही उ भोजपुरी कलाकारन के लेके वर्कशॉप भी कइल चाहत बाशन अउर ओह लोग खातिर थिएटर प्ले के प्लानिंग भी बा। ”
(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के वरिष्ठ स्तंभकार हैं।)





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