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माघ मेले में पॉलिथिन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए गए जिला प्रशासन और नगर निगम: हाईकोर्ट


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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेला प्रशासन व नगर निगम प्रयागराज को निर्देश दिया है कि माघ मेले के दौरान पॉलिथिन के प्रयोग पर रोक लगा दी और गंगा और यमुना के तट पर पॉलिथिन का कचरा पहुंचुंचने से रोके। कोर्ट ने नगर आयुक्त से 50 माइक्रॉन की पॉलीथिन पर रोक लगाने के संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी पूछी है। कोर्ट गंगा-यमुना प्रदूषण मामले की सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय पर्यावरण अभियंत्रण शोध संस्थान को नोटिस जारी गंगा मे गिरने वाले नालों के शोधन प्रक्रिया की जानकारी पूछी गई है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से गंगा नदी बेसिन संरक्षण परियोजना और आईआई टी कंसोर्टियम द्वारा दी गई रिपोर्ट की जानकारी पूछी है। पूर्व के आदेश में हाईकोर्ट ने आईआईटी को इस पर रिपोर्ट देने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने गंगा यमुना में न्यूनतम 50 प्रति जल प्रवाह बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की भी जानकारी पूछी है। यह भी पूछा गया है कि यदि किसी परियोजना पर काम चल रहा है तो पूरी जानकारी दी जाएगी।

निर्णायक के लिए टीम गठित

गंगा पोल मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पूर्णपीठ ने प्रयागराज में गंगा यमुना मे सही गिर नाल्स और सीवीएस ट्यूशन प्लांट की स्थिति का मौका कायम करना रिपोर्ट पेश करने के लिए अधिवक्ता की टीम का गठन किया। की.थाथा जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को इन्हे सहयोग प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। न्यायालय द्वारा गठित समिति में न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता डाॅ। एच। एन त्रिपाठी, केंद्र सरकार के अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी व राज्य सरकार के अधिवक्ता मनु घिल्डियाल शामिल है।जिन्हें शहर के नालों व एस टी पी की अद्यतन स्थिति पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।

मुख्य एजेंसियां ​​कैसे रोक रही हैं पोल

कोर्ट को बताया गया कि जिन नालों को सीवेज से नहीं जोड़ा गया है, उनका दूषित जल बायो रेमिडियल तकनीक से शोधित किया जाता है। इसकी जिम्मेदारी मुख्य एजेंसियों को दी गई है। इस न्यायालय ने नगर आयुक्त प्रयागराज को जैव -रेमेडियेशन तकनीक के माध्यम से शोधन करने वाली प्राथमिक प्रयोगशालाओं के साथ हुए समझौते की ओर और अब तक किए गए भुगतान का भुगतानरा पेश करने का निर्देश दिया है जिसमें पूछा गया है कि इनकी मानीकरणिंग कैसे की जा रही है। नालों के शोधन के लिए ये माइक्रोवेल कंसोर्टिया की कितनी मात्रा रही। थलाकी कि याची अधिवक्ता ने इसे पेपर वर्क समझौते देते हुए कहा कि कोई शोधन नहीं किया जा रहा, रहा, गंदे नाले ठीक गंगा यमुना-गिर रहा है।

कोर्ट ने याची अधिवक्ता को इस पर विशेषज्ञों की रिपोर्ट पेश करने की छूट दी है कि क्या बायो रेमेडियेशन गंदे नाले शोधित करने में उपयोगी तकनीक है।
जब तक एसटीपी से जुड़ेंगे सभी नाले कोर्ट ने राज्य सरकार से अपर सचिव रैक के अधिकारी के हलफनामे के साथ यह बताने का निर्देश दिया है कि प्रयागराज में बचे 42 नालों को कितने समय में एसटीपी से जोड़ देंगे।साथ ही भी बता रहे हैं कि कितना एसटीपी सही है काम कर रहे हैं और कितने नाले के बिना शोधित गंगा यमुना में गिर रहा है। कोर्ट ने नगर आयुक्त नगर निगम प्रयागराज व मेला प्रभारी माघ मेला प्रयागराज से पूछा है कि पालीथिन पर प्रतिबंध की राज्य सरकार द्वारा जारी 15 जुलाई 18 की अधिसूचना का पालन कैसे किया जा रहा है।क्या कदम उठाए गए हैं। कितने हथियार वसूला गया और कितने के खिलाफ अभियोग चला गया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेला प्रशासन व नगर निगम प्रयागराज को निर्देश दिया है कि माघ मेले के दौरान पॉलिथिन के प्रयोग पर रोक लगा दी गई और गंगा और यमुना के तट पर पॉलिथिन का कचरा पहुंचुंचने से रोके। कोर्ट ने नगर आयुक्त से 50 माइक्रॉन की पॉलीथिन पर रोक लगाने के संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी पूछी है। कोर्ट गंगा-यमुना प्रदूषण मामले की सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय पर्यावरण अभियंत्रण शोध संस्थान को नोटिस जारी गंगा मे गिरने वाले नालों के शोधन प्रक्रिया की जानकारी पूछी गई है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से गंगा नदी बेसिन संरक्षण परियोजना और आईआई टी कंसोर्टियम द्वारा दी गई रिपोर्ट की जानकारी पूछी है। पूर्व के आदेश में हाईकोर्ट ने आईआईटी को इस पर रिपोर्ट देने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने गंगा यमुना में न्यूनतम 50 प्रति जल प्रवाह बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की भी जानकारी पूछी है। यह भी पूछा गया है कि यदि किसी परियोजना पर काम चल रहा है तो पूरी जानकारी दी जाएगी।





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