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मेडिकल कॉलेज एडमिशन ठगी मामला: भोपाल में गोल्ड मेडिस्ट आरोपी ने 3 हजार रुपए में छात्रों का ऑफलाइन डेटा खरीदा था; 50 हजार रुपए तक की कमाई के लिए खर्च किए गए महज 17 रुपए


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  • एमपी भोपाल कॉलेज मेडिकल एडमिशन चीटिंग केस अपडेट; गोल्ड मेडलिस्ट अरविंद कुमार ने स्टूडेंट्स डेटाबेस खरीदा

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भोपालएक मिनट पहलेलेखक: अनूप दुबे

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पुलिस ने उनके कब्जे से 15 कंप्यूटर, 12 लैपटॉप, 27 मोबाइल फोन, 13 एटीएम कार्ड सहित अन्य दस्तावेज जब्त किए। एक दिन पहले प्रेस कांफ्रेंस कर पुलिस ने इसकी जानकारी दी थी– फाइल फोटो

  • ठगी के शिकार का पता लगाने आरोपी के बैंक खाते की जानकारी निकाली जा रही है
  • डेटा उपलब्ध कराने वाली अगली साइट को अवरुद्ध करने की ऑब्सांसा पुलिस करेगी

भोपाल में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाला गोल्ड मेडलिस्ट अरविंद कुमार उर्फ ​​आनंद राव सिर्फ 3 हजार रुपए में छात्रों का डेटा प्राप्त करता था। इसके लिए वह इंटरनेट के माध्यम से डेटा उपलब्ध कराने वाली साइट से संपर्क करता था। आरोपी ने महज 17 रुपए खर्च कर 50 हजार रुपए एक छात्र से कमाए है।

उसी की मदद से वह छात्र का डेटा ले लेता था। इस डेटा में छात्र से जुड़ी हर जानकारी होती है। जैसे उसका मोबाइल नंबर, शहर, मोहल्ला, पता, माता पिता के नाम और क्या पढ़ाई कर रहा है। आरोपी मोबाइल नंबर के आधार पर छात्र से संपर्क करता था।

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मनचाहे कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर उसे फार्म भरने और अन्य संपूर्ण उपलब्ध कराने के लिए 50 हजार रुपए लगते थे। रुपए खाने में आने के बाद आरोपी अपना फोन स्विच ऑफ कर लेता था। इसका खुलासा आरोपी ने सायबर क्राइम भोपाल की पूछताछ में किया। रिमांड खत्म होने के बाद आरोपी को जेल भेजा जा चुका है।

साइट से निकाली जा रही जानकारी है

डीएसपी नीतू ठाकुर ने बताया कि अरविंद ऑनलाइन स्टोर के माध्यम से 3 हजार रुपए में डेटा खरीदता था। उसने इसी तरह की कुछ सूचियों की जानकारी दी है। हम उन लोगों की साइट के सभी पहलुओं से निकल रहे हैं। जांच में इस बिंदु को मुख्य रूप से शामिल किया गया है कि आखिर उन तक स्टूडेंट का डेटा कैसे पहुंचता था?

कहीं वह कॉलेज या किसी कंपनी के माध्यम से डेटा इकट्ठा तो नहीं था? यह डेटा इन सूचियों को उपलब्ध है कौन कौन है? इसके साथ ही हम शासन को भी इस संबंध में एक अनुशंसा पत्र लिखकर इस तरह की सूचियों को अवरुद्ध करने के लिए लिखेंगे। आरोपी के बताए बैंक खाते की जानकारी निकलवाई जा रही है। उसने कहां-कहां से किस तरह से कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया है।

इस तरह जाल में फांसता था

अरविंद ने पुलिस को बताया कि डेटा के माध्यम से संबंधित छात्र को फोन लगाता था। सबसे पहले छात्र से उसकी निजी जानकारी उसको शेयर करता था। इसके बाद उन्होंने संबंधित कॉलेज का नाम लेते हुए इसमें छात्र के एप्लाई किए गए या इंटरेस्टेड कॉलेज के बारे में बताते थे।

इसकी जानकारी उसके डेटा में होती थी। उसी संबंध में बात करता था। इसके कारण छात्र और उसके परिवार झांसे में आ जाते थे। रुपए आने के बाद वह नंबर बंद कर देता था। उसके बाद दूसरे नंबर से दूसरे छात्र को कॉल करता था।

अब तक की जानकारी के अनुसार अरविंद करीब पौने दो सौ लोगों को ठगी का शिकार बना चुका है। इन सभी का डेटा उसने सिर्फ 3 हजार में खरीदा था। कुल टोटल 176 लोगों से उसने रुपए ऐंठे थे। इस गणना से उसने 17 रुपए खर्च कर 50 हजार रुपए कमाए। अब पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि और कितने ऐसे लोग हैं जो उसको रुपए देने के लिए तैयार हो गए थे।





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