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यह 13 संस्थान देंगे ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग, सर्टिफिकेट के बाद मिलेगी नौकरी या करें खुद का बिजनेस


नई दिल्ली. ड्रोन से जितने फायदे हैं तो उसके कुछ खतरे भी हैं. लेकिन यह तब है जब ऐसे खतरों के बारे में पहले अलर्ट न रहा जाए. यही वजह है कि डॉयरेक्टर जनरल सिविल एविएशन वक्त-वक्त पर ड्रोन को लेकर नियमावली बना रहा है. बिना ट्रेंड ड्रोन पायलट के अब कोई भी ड्रोन नहीं उड़ा पाएगा. इसके लिए डीजीसीए ने देश के 13 फ्लाइंग अकादमी को ड्रोन पायलट तैयार करने की मान्यता दी है. डीजीसीए से मान्यता प्राप्त यह 13 अकादमी ही ट्रेनिंग देंगी. इन्हीं के सर्टिफिकेट के आधार पर ड्रोन पायलट को कहीं भी नौकरी मिलेगी या फिर वो खुद का बिजनेस भी कर सकेगा.

ड्रोन पायलट को मिलेगा लाखों कमाने का मौका?डॉक्यूमेंट्री हो या फिर कॉमर्शियल वीडियोग्राफी, दोनों ही काम में ड्रोन का इस्तेमाल वक्त के साथ बढ़ता ही जा रहा है. इतना ही नहीं रेलवे ने भी अपने संस्थाना की सुरक्षा के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करना शुरु कर दिया है. दक्षिण-पश्चिम रेलवे ने सवारी डिब्बे के कारखाने की सुरक्षा और निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल शुरु कर दिया है. 32 लाख रुपये की कीमत से 9 ड्रोन खरीदे गए हैं. अब ड्रोन काफी बड़े और महंगे भी आने लगे हैं. इसलिए जैसे खेतों में पेस्टीसाइड का छिड़काव करने वाली कंपनियां, सिक्योरिटी के फील्ड में लगी एजेंसियों और रियल स्टेट के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट में भी ड्रोन का इस्तेमाल होने लगा है. ऑयल कंपनियों ने अपनी पाइप लाइन की निगरानी के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल शुरु कर दिया है.

वजन के हिसाब से ड्रोन के लिए ये होंगे मानक-ड्रोन को वजन के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में रखा गया है. 250 ग्राम या इससे कम वजन वाले नैनो ड्रोन कहे जाएंगे. जबकि इससे अधिक वजन वाले माइक्रो या मिनी ड्रोन के लिए यूआइडी के अलावा अन्य नियमों का पालन करना जरूरी होगा. नए नियमों के अनुसार 250 ग्राम से 2 किलो वजन तक के माइक्रो ड्रोन, 2 किलो से 25 किलो, 25 किलो-150 किलो और उससे ज्यादा वजन वाले मिनी एवं बड़े ड्रोन पर यूआइडी प्लेट के अलावा आरएफआइडी/सिम, जीपीएस, आरटीएच (रिटर्न टू होम) और एंटी कोलीजन लाइट लगाना जरूरी होगा. हालांकि 2 किलो से अधिक वजन वाले मानव रहित मॉडल एयरक्राफ्ट पर केवल आइडी प्लेट लगाना जरूरी होगा. साथ ही 250 ग्राम से अधिक के वजहन वाले ड्रोन को अब सिर्फ ट्रेंड ड्रोन पायलट ही उड़ा सकेंगे.

स्थानीय अधिकारियों की लेनी होगी इजाजत-प्रतिबंधित क्षेत्रों में नैनो तथा माइक्रो ड्रोन को बंद या कवर्ड परिसर के भीतर स्थानीय अधिकारियों की अनुमति लेकर उड़ाया जा सकता है. ड्रोन को चलते हुए वाहन, जलपोत, अथवा विमान से नहीं उड़ाया जा सकता. नैनो ड्रोन को 50 फीट तथा अन्य ड्रोन को 200 फीट की ऊंचाई पर उड़ाया जा सकता है.

नए नियम में है 5 किमी का प्रतिबंधित क्षेत्र-एयरपोर्ट के पांच किमी के दायरे के अंदर और ऊपर किसी ड्रोन को उड़ाने की अनुमति नहीं होगी. इसी तरह एयरपोर्ट अथारिटी की ओर से प्रतिबंधित, निषिद्ध तथा खतरनाक घोषित किए गए क्षेत्रों में भी इन्हें नहीं उड़ाया जा सकेगा. अंतरराष्ट्रीय सीमा, जिसमें नियंत्रण रेखा (एलओसी), वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) तथा वास्तविक भू स्थैतिक रेखा (एजीपीएल) शामिल हैं, के 50 किलोमीटर के दायरे में भी ड्रोन उड़ाने पर पाबंदी रहेगी.

ड्रोन को समुद्र और जमीन से कितनी दूरी और ऊंचाई पर उड़ाना है, इसकी सीमाएं भी निर्धारित की गई हैं. जैसे समुद्र तट से 500 मीटर क्षैतिज दूरी तक ही इन्हें उड़ाया जा सकता है. दिल्ली में लुटियन जोन के हाई सिक्यूरिटी इलाके के लिए भी सीमा बताई गई है. इसके अनुसार ड्रोन को हर समय हर तरफ से विजय चौक से पांच किलोमीटर दूर रखना होगा.

इसी प्रकार सैन्य प्रतिष्ठानों तथा गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित स्थानों से इनकी उड़ान दूरी हमेशा 500 मीटर या अधिक होनी चाहिए. जबकि पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों तथा वन्यजीव अभयारण्यों के ऊपर ड्रोन उड़ाने के लिए पूर्व अनुमति लेना जरूरी होगा.





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