Home मध्य प्रदेश युवाओं की नसों में घुलता नशा: भोपाल में ऑफ़लाइन ड्रग्स तस्कर इंजीनियर...

युवाओं की नसों में घुलता नशा: भोपाल में ऑफ़लाइन ड्रग्स तस्कर इंजीनियर के पास एक हजार की डिमांड थी; पैसे की कमी के कारण 25% ही माल कॉल पाता था


विज्ञापन से परेशान है? बिना विज्ञापन खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

भोपाल22 मिनट पहले

  • कॉपी लिस्ट

पुलिस ने प्रखर के पास से इन डिब्बों में ड्रग्स बच की थी।

  • पुलिस की पूछताछ में आरोपी प्रखर ने खुलासा किया
  • नेटवर्क का पता लगाने साइबर सेल की मदद ली जाएगी

भोपाल में ड्रग्स के नशे का कारोबार बढ़ता जा रहा है। अकेले प्रखर के पास ही 15 दिन के अंदर एक हजार से अधिक युवा संपर्क कर इसकी डिमांड करते थे। पैसों की कमी होने के कारण तस्कर इंजीनियर प्रखर सिर्फ 25% मांग ही पूरी कर पाता है, क्योंकि ऑनलाइन डिमांड करने के बाद माल उस तक कम से कम 15 दिन बाद ही पहुंच पाता था।

यह पूरा ड्रग्स का कारोबार इंटरनेट के माध्यम से ऑफ़लाइन चल रहा है, जहां ना खरीदने वाला जानता है कि वह किस से माल ले रहा है और ना ही बेचने वाले को पता होता है कि उस तक माल कैसे पहुंचेगा। सब कुछ कुछ होता है। कोई भी पहलू नहीं होता है। सिर्फ एक मैसेज पर यह पूरा खेल चलता है। इसका खुलासा खुद प्रखर ने पिपलानी पुलिस की पूछताछ में किया।

महीने में दो बार बारता माल थी

उन्होंने बताया कि वह महीने में दो बार इस तरह का माल बुलाता था। इसके लिए साइबर कैफे का उपयोग करता था। वहाँ से एक ई-मेल के माध्यम से वह अपना आर्डर प्लेस करता था। नंबर होने के बाद वह ऑनलाइन ही पेमेंट करता था, जो डॉलर और बिटकॉइन के माध्यम से होता था।

उसे एडवांस में पैसा देना होता था। पैसों की कमी के कारण वह ज्यादा आर्डर नहीं ले पाता था। उसके पास संपर्क करने वाले युवाओं से वह 25% को ही माल सप्लाई कर पाता था। वह वाट्सअप के माध्यम से इन लोगों से जुड़ा रहता था और मुख्य रूप से रे भागों और लेट नाइट चलने वाली भागों में वह यह प्रचंडता थी।

तंरसों की नजर छात्रों पर

पिपलानी पुलिस के हत्थे चढ़ा ड्रग्स हाई सोसाइटी का ड्रग्स माना जाता है। इसके लिए ड्रग्स तस्कर छात्रों के संपर्क में रहते हैं। पहले उनसे दोस्ती की जाती है। उन्हें भागों में ले जाना जाता है। नशे की लत लगने के बाद उनमें शामिल ढकेल दिया जाता है। यह धंधे की खास बात यह है कि जो इस के ग्राहक हैं वही लोग भी बन जाते हैं।

इसमें लड़कियों का भी उपयोग किया जाता है। उन्हीं के माध्यम से पार्टी आयोजित की जाती है। इसमें छात्र-छात्राओं को बुलाया जाता है। जोड़ने लगने के बाद छात्र खुद ही नशे में पूरा करने के लिए दूसरों को भी इसमें शामिल होते हैं। इसके एवज में उसे कई बार मुफ्त में ड्रग्स मिल जाता है। इस तरह यह नेटवर्क बढ़ जाता है।

पुलिस की कमजोरी

ड्रगस मामले में पुलिस की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि मुख्य आरोपी तक कभी नहीं पहुंच पाते हैं। एक तो यह पूरा नेटवर्क ऑनलाइन चलता है। दूसरा इसमें मुख्य रूप से नशा करने वालों को ही शामिल किया जाता है। उनके संकेत के अलावा किसी और की जानकारी नहीं होती है।

ऐसे में उनके पकड़े जाने पर भी पुलिस को कोई खास जानकारी नहीं मिल पाती है। यही समस्या प्रखर को पकड़ने के बाद भी पुलिस के सामने आ रही है। 24 घंटे की पूछताछ के बाद भी पुलिस प्रखर से कोई खास जानकारी हासिल नहीं कर पाई है।

रेड जोन के क्षेत्र बन गए

भोपाल में ड्रग तस्करों की नजर में कुछ खास इलाके रिंगित है। इनमें अशोक गार्डन, पिपलानी, एमपी नगर, गोविंदपुरा, होशंगाबाद रोड और आउटर के इलाके, क्योंकि यहां कॉलेजों की संख्या अधिक है। बाकी क्षेत्रों में स्टूडेंट काफी मात्रा में रहते हैं।

इसी कारण तस्कर इन क्षेत्रों में ज्यादा सक्रिय है। क्राइम ब्रांच भी पिछले कुछ दिनों में अशोक गार्डन से कुछ तस्कर गिरफ्तार कर चुका है, जिसमें कई लड़कियों के भी नाम सामने आए हैं। पुलिस के लिए यह इलाका रेड जोन है।

पुलिस थाने के पास तक छिपकर रखते थे ड्रग्स

शिखर ने पुलिस को बताया कि भर्ती करने के बाद उसे पता नहीं होता कि माल कब और कहां होगा? ऑटोजेनरेट एक मैसेज आता था और उसे उस जगह का पता मिलता था। जहां वह माल रखता था वह था। कई बार तो माल थाने के पास भी रख दिया गया था।

इसका मुख्य कारण यह था कि इसमें काम करना बाकी है और दूसरा माल गायब होने की संभावना कम रहती है। आरोपी मुख्य रूप से अलग-अलग स्थानों का उपयोग ज्यादा करते थे। एसएमएस लगभग 1 घंटे के अंदर यह पूरा माल कैनवर हो जाता था।





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments