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यूपी: बच्चों के नामों पर स्याही पोतने की पारितंत्रियों, न्यायालय में दाखिल चार्जशीट मामले में सीबीआई ने दी अर्जी


सीबीआई ने जेई को कोर्ट में पेश किया
– फोटो: अमर उजाला

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बांदा में यौन उत्पीड़न के आरोपी सिंचाई विभाग के निलंबित अवर अभियंता रामभवन मामले में सीबीआई ने शिकार बच्चों को बदनामी और धमकी से बचाने के लिए अदालत से पारितकर्ताओं की कि चार्जशीट में दर्ज बच्चों के नामों को उजागर न किया जाए। उनके नामों पर स्याही पोत दिया जाए।

विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) मोहम्मद रिजवान अहमद के समक्ष शुक्रवार को यहां सीबीआई के उपाधीक्षक और इस मामले के विवेचक अमित कुमार ने अर्जी देकर अनुरोध किया कि यौन उत्पीड़न का शिकार हुए बच्चे नाबालिग हैं। उनके बयान आदि के लिए गए हैं। दाखिल की जा चुकी चार्जशीट में इन बच्चों के नाम और पते आदि का उल्लेख है।

सीबीआई ने कहा कि चार्जशीट देखकर इन बच्चों के नाम उजागर होने से आरोपी पक्ष उन पर दबाव बना सकता है। सीबीआई ने सुझाव दिया कि बच्चों के नाम और पिट्स पर स्याही पुतवा दी जाए, ताकि वह न पढ़ सके। सीबीआई की इस अर्जी की प्रति न्यायाधीश ने आरोपी के अधिवक्ता भूरा प्रसाद निषाद को उपलब्ध कराया। साथ ही उनके राय ने भी पूछा। इस पर निषाद ने आपत्ति दाखिल करने के लिए मोहलत से पूछा। अंतत: अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 10 मार्च निर्धारित कर दी। चार्जशीट की कापी आरोपियों के अधिवक्ता को 10 मार्च को मिल सकती है। इसी के बाद वह जमानत अर्जी दाखिल कर सकते हैं।

दो आरोपियों की रिमांड पर सुनवाई 10 को
बच्चों के यौन उत्पीड़न के चिरचित केस की सह आरोपी और मुख्य आरोपी जेई रामभवन की पत्नी दुर्गावती और हाल ही में सीबीआई द्वारा दिल्ली से गिरफ्तार किए गए एक अन्य आरोपी मोहम्मद आकिब की अदालत कस्तडी रिमांड 10 मार्च तक बढ़ा दी गई है। शुक्रवार को आरोपियों के वकील भूरा प्रसाद निषाद के अनुरोध पर कोर्ट ने रिमांड पेशी के लिए 10 मार्च निर्धारित की।

परीक्षण के दौरान पाक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रिजवान, सीबीआई के उपाधीक्षक अमित कुमार, आरोपियों के अधिवक्ता भूरा प्रसाद निषाद व देवदत्त तिवारी अदालत परिसर में स्थित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में गए। वहाँ अधिवक्ता भूरा प्रसाद ने वीडियो के जरिए आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती से बातचीत की। बचाव पक्ष के एक अन्य अधिवक्ता अनुराग पटेल मौजूद नहीं थे।

बांदा में यौन उत्पीड़न के आरोपी सिंचाई विभाग के निलंबित अवर अभियंता रामभवन मामले में सीबीआई ने शिकार बच्चों को बदनामी और धमकी से बचाने के लिए अदालत से पारितकर्ताओं की कि चार्जशीट में दर्ज बच्चों के नामों को उजागर न किया जाए। उनके नामों पर स्याही पोत दिया जाए।

विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) मोहम्मद रिजवान अहमद के समक्ष शुक्रवार को यहां सीबीआई के उपाधीक्षक और इस मामले के विवेचक अमित कुमार ने अर्जी देकर अनुरोध किया कि यौन उत्पीड़न का शिकार हुए बच्चे नाबालिग हैं। उनके बयान आदि के लिए गए हैं। दाखिल की जा चुकी चार्जशीट में इन बच्चों के नाम और पते आदि का उल्लेख है।

सीबीआई ने कहा कि चार्जशीट देखकर इन बच्चों के नाम उजागर होने से आरोपी पक्ष उन पर दबाव बना सकता है। सीबीआई ने सुझाव दिया कि बच्चों के नाम और पिट्स पर स्याही पुतवा दी जाए, ताकि वह न पढ़ सके। सीबीआई की इस अर्जी की प्रति न्यायाधीश ने आरोपी के अधिवक्ता भूरा प्रसाद निषाद को उपलब्ध कराया।





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