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यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड चुनाव: कल होगा नामांकन, 7 मार्च को होगा मतदान; सीईओ बोले- चुनाव में बोर्ड के कर्मचारियों का कोई रोल नहीं


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लखनऊएक मिनट पहले

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मतदाता सूची में 7 सांसद सदस्य, 31 विधान मंडल सदस्य, दो बार काउंसिल सदस्य और 592 मुतवैलियों के नाम शामिल हैं।

  • 5 मार्च को नामांकन फॉर्मों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया होगी
  • 11 सदस्यीय बोर्ड में सदस्यों के 8 पदों पर चुनाव होना है

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मतदाता सूची पहले ही जारी हो चुकी है। 4 मार्च यानी कल नामांकन दाखिल किया जाएगा। 5 मार्च को नामांकन फॉर्मों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया होगी। जबकि 7 मार्च को मतदान होगा। बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सैय्यद मुहम्मद शोएब ने बताया कि मतदाता सूची में 7 सांसद सदस्य, 31 विधान मंडल सदस्य, दो बार काउंसिल सदस्य और 592 मुतवल्लियों के नाम शामिल हैं।

चुनावी प्रक्रिया के बारे में बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सैय्यद मुहम्मद शोएब ने बताया कि इस चुनाव में मुतवल्ली कोटे से 2 सदस्य, सांसद (सुन्नी मुस्लिम) कोटे से 2 सदस्य, विधानसभा / विधान परिषद (सुन्नी मुस्लिम) कोटे से 2 सदस्य, बार काउंसिल (सुन्नी मुस्लिम) 2 सदस्यों का चुनाव होता है। जबकि एक इस्लामिक स्कॉलर, एक सामाजिक कार्यकर्ता और शासन से सयुंक्त सचिव स्तर का एक सुन्नी मुस्लिम अधिकारी को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नामित किया जाता है।

सैय्यद मुहम्मद शोएब

सैय्यद मुहम्मद शोएब

चुनाव से सचिवरी मिनक कल की निगरानी में चुनाव होंगे

वक्फ बोर्ड का चुनाव शासन द्वारा नामित निर्वाचन अधिकारी विशेष सेक्रेटरी मिनक कल्याण शिवाकांत द्विवेदी और 2 सहायक निर्वाचन अधिकारी राहुल गुप्ता (पद कमेटी) और एके सिंह (उपसचिव) की निगरानी में होगा। बोर्ड का या इसके किसी भी कर्मचारी का बोर्ड के चुनाव में कोई रोल नहीं है। सिर्फ एक लाख रुपए से अधिक आय वाले वक्फों के मुतवल्ली की सूची सीईओ वक्फ बोर्ड द्वारा प्रदान की जाती है। जिन वक्फ जायदादों की आमदनी एक लाख या एक लाख रुपये सालाना से ज्यादा है, उसी के मुतवल्ली को मत देने का अधिकार होता है।

अभी तक बोर्ड की नियमावली नहीं बनी

वक्फ बोर्ड में कर्मचारी और अधिकारियों के रिश्तेदारों की नियुक्ति के सिलसिले में नियमों का पालन करने या न करने के सवाल पर सैय्यद मुहम्मद शोएब ने कहा कि बोर्ड में 104 पदों की अनुमति है। इसका सापेक्ष पुनर्वसन स्टाफ केवल 55 है। ये भी कई लोग बीमार हैं। संविदा पर कार्यरत कर्मचारी या रेुलर कर्मचारी हों, मेरा कोई राहत नहीं है। संविदा कर्मी एक वर्ष के अनुबंध (सविंदा) पर रखे गए। जिनका वेतन 10 हजार रुपये से लेकर 20 हजार रुपये है।

वक्फ बोर्ड एक स्वायतशासी संस्था है और वक्फ एक्ट 1995 की धारा 109 के अनुसार बोर्ड की नियमावली शासन को बनाना होता है, लेकिन अभी तक कोई नियमावली नहीं है। लेकिन वर्तमान की योगी सरकार ने इस ओर जरूर ध्यान दिया है और कार्यवाही चल रही है और शीघ्र ही नियमावली तैयार हो जाएगी। तब बोर्ड पुनर्विक्रय संबंधी याचिकाओं से संबंधित विचार करेगा। लेकिन अभी तक बोर्ड के पास कोई नियमावली नहीं है। हम कम स्टाफ से काम चला रहे हैं।

सरकार वक्फ की आमदनी बढ़ाने के लिए कर रही है कोशिश

सैय्यद मुहम्मद शोऐब ने कहा कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को शासन की ओर से कोई आवर्तक अनुदान भी नहीं मिलता है। हमें अपने ही स्रोत से व्यवस्था करनी पड़ती है। मुहम्मद शोएब ने कहा कि प्रसन्नता की बात ये है कि वर्तमान योगी सरकार विशेष कर मिनक विभाग के कैलकुलेटर मंत्री नंद गोपाल नंदी वक्फ प्रॉपर्टी की सुरक्षा और उसकी आमदनी को बढ़ाने के लिए पूरी लगन से कार्य करने के लिए पूरा सहयोग और मार्गदर्शन कर रहे हैं और चुनाव में शासन की ओर से पूरी निष्पक्षता बरती जा रही है। वक्फ बोर्ड का चुनाव में कोई रोल नहीं है।

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