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रंगेहाथ पकड़े जाने से पहले ही भागा सचिव: उज्जैन में पंचायत सचिव को तृप्त करने ग्रामीण वेशभूषा में पहुंचे लोकायुक्त डीएसपी, भनक लेता ही घर से भाग गया सचिव


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अजान6 मिनट पहले

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ग्राम पंचायत वनसिंग के ग्राम पंचायत सचिव रतनलाल को रंगेहाथ पकड़ने वाली लोकायुक्त पुलिस को चकबंदी देकर भेज दिया गया है

  • पंचायत सचिव को रिश्वत देने के लिए फरियादी पीछे-पीछे भागता रहा, सचिव बोला- मैं तुम्हारा काम कर दूंगा, मुझे पैसे नहीं चाहिए

उज्जैन में पंचायत सचिव को रंगेहाथ पकड़ने गई लोकायुक्त टीम को बैरंग लौटना पड़ा। कारण था कि लोकायुक्त डीएसपी वेदांत शर्मा ग्रामीण वेशभूषा में पहुंचे लेकिन गांव वालों ने उन्हें पहचान लिया। इसकी भनक पंचायत सचिव को भी लग गई। वह घर से भाग गई। लोकायुक्त टीम के साथ पहुंचे फरियादी घूस की रकम देने के लिए पैदल भाग रहे सचिव को आवाज लगाते हुए पीछा कर रहा था। फिर भी वह रुका नहीं। सचिव भी पलट कर बोलता- मैं तुम्हारा काम कर दूंगा। आपके पैसे नहीं चाहिए। लोकायुक्त पुलिस ने फरियादी से फोन पर रिश्वत की मांग को लेकर हुई बातचीत के आधार पर सचिव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा -7 के तहत केस दर्ज कर लिया। मामला झारड़ा तहसील की ग्राम पंचायत वनसिंग का है। यहां के ईश्वर सिंह ने कूप खनन योजना के तहत 2.40 लाख की लागत से कूप खोदवाया है। जिसमें से पंचायत सचिव रतन लाल चौहान ने 1.22 लाख रुपये का भुगतान किया है। शेष राशि का भुगतान करने के लिए सचिव ने ईश्वर सिंह से 24 फरवरी को 15 हजार की घूस मांगी थी। ईश्वर सिंह ने पांच सौवा एडवांस में दे दिए।

छह हजार रुपए देने के लिए सचिव ने घर बुलाया था

डीएसपी ने बताया कि ईश्वर ने सचिव की शिकायत लोकायुक्त पुलिस से की। उसके बाद सचिव की ओर से घूस मांगे जाने की वॉयस रिकॉर्डिंग कराई गई। जिसमें सचिव ने किसान ईश्वर सिंह को घूस की शेष राशि में से छह हजार रुपये देने के लिए बुधवार को अपने गांव बोलखेड़ा बुलाया था। सचिव को रंगेहाथ दबोचने की योजना के साथ लोकायुक्त डीएसपी वेदांत शर्मा के नेतृत्व में सिपाही हितेश ललावत, इसरार खान, नीरज राठौर और कलेक्ट्रेट दो कर्मचारी सचिव के गांव पहुंचे।

तौलिया ओढ़कर डीएसपी पहुंचे

डीएसपी ने अपनी गाड़ी गांव के बाहर खड़ी कर दी। उसके बाद ग्रामीणों की तरह सिर तौलिया ओढ़कर सचिव के घर से कुछ दूरी पर खड़े हो गए। उन्होंने ईश्वर सिंह को छह हजार रुपये के बारे में सचिव के घर भेजा। इस बीच गांव वालों को शक हो गया। सचिव रतनलाल चौहान को भी भनक लग गई। वह घर छोड़कर भाग गया। ईश्वर उसके पीछे-पीछे भागता रहा। लेकिन सचिव ने घूस की रकम लेने के बजाए कहा-मैं तुम्हारा काम कर दूंगा। पैसा नहीं लुंगा।

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