Home उत्तर प्रदेश राकेश सिंह तो असली 'टिकैत' निकले, सरकार के सामने टिक गए

राकेश सिंह तो असली ‘टिकैत’ निकले, सरकार के सामने टिक गए


गाजीपुर बॉर्डर पर किसान
– फोटो: अमर उजाला

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राकेश सिंह टिकैत के नाम में जुड़ा ‘टिकैत’ शब्द किसी जाति का सूचक नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब-हरियाणा के क्षेत्रों में इस शब्द का प्रयोग उन जातीय नेताओं के लिए किया गया था, जिनके चयन जाति विशेष के नेता एक पंचायत के माध्यम से किए गए थे। माना जाता था कि यह नेता नैतिक नीतियों-परंपराओं की रक्षा के लिए अपनी कही गई बात पर हमेशा ताल रहता है। इसीलिए उसे टिकैत का नाम दिया गया था इसका अर्थ होता था जो अपनी बात पर टांगें रखता था।

चुनाव के बाद टिकैत चौधरी चुनने की परंपरा भी वंशानुगत हो गई, जिससे पहले तो राकेश सिंह टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत ने अपनाई। उपनामों के चयन पर कोई प्रतिबंध न होने के कारण के बाद महेंद्र सिंह टिकैत के सभी बेटों ने भी इसे अपने नाम के साथ जोड़ लिया। राकेश सिंह के नाम में ‘टिकैत’ शब्द इसी क्रम में शामिल किया गया है।

असली ‘टिकैत’ निकले राकेश सिंह

भारतीय किसान यूनियन बागपत के नेता किशोर सिंह ने अमर उजाला को बताया कि गाजियाबाद प्रशासन सख्ती से किसान आंदोलन खत्म करने की तैयारी कर रहा है। आंदोलन से कुछ लोगों के पीछे होने की भ्रामक खबरों के बाद कुछ किसान नेताओं को भी लगा कि उनकी अब तक की मेहनत पानी में जाने वाली है। इसके बाद भावुक हुए राकेश सिंह टिकैत ने रोते हुए किसानों से यूपी बॉम्ब पहुंचने की अपील की और आंदोलन से पीछे न हटने की बात कही।

किशोर सिंह के मुताबिक राकेश सिंह की इस अपील का किसानों पर बड़ा असर हुआ और रातोंरात हजारों किसान यूपी बॉर्डर की ओर चले गए। किसानों के आने का यह क्रम अभी भी जारी है और शनिवार तक इसके बने रहने की उम्मीद है। किसान नेता के मुताबिक इसके बाद पून क्षेत्र में राकेश सिंह टिकैत के पक्ष में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। किसानों को लग रहा है कि यह असली टिकैत है जो किसानों के हितों के लिए अड़े हुए हैं।

सरकार ने किसानों का पानी बंद कर दिया है। इसे देखते हुए राकेश सिंह टिकैत ने घोषणा की थी कि अब उनके घर से पानी जाएगा और वे जल ग्रहण करेंगे। इस अपील को देखते हुए यूपी बॉर्डर पहुंच रहे किसान अपने साथ पानी की बोतलें लेकर पहुंच रहे हैं। कई किसान खुद के साथशेठे, छाछ, दही, चूड़ा और अन्य सामान लेकर पहुंच रहे हैं। यूपी बॉर्डर पर राकेश सिंह टिकैत की गिरफ्तारी और किसानों को धरना स्थल से हटाने की तैयारी वर्तमान में रुकती रही है।

तेज हो रही है आंदोलन की आंच

आंदोलनकारियों के लिए पानी जैसी बुनियादी सुविधा हटा के लिए जाने के बाद यह संदेश गया है कि सरकार ने अपनी तरफ से आंदोलनकारियों को कोई भी सहयोग देना बंद कर दिया है। लेकिन सरकार के इस रुख का आंदोलनकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा है। सहारनपुर से आंदोलन के समर्थन में यूपी बॉर्डर पहुंचे किसान चौधरी हरिपाल सिंह ने कहा कि वे आंदोलन को और तेज करने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी आंच डायमे-डायमे और तेज की जा रही है। सरकार से अगले दौर की वार्ता के पूर्व किसान नेता इस पर जल्दी ही बड़ा निर्णय ले सकते हैं।

मनीष सिसोदिया, जयंत चौधरी के पहुंचने से आंदोलन को मजबूती मिली

सरकार से आंदोलन को सहयोग मिलना बंद होने के बाद राकेश सिंह टिकैत ने दिल्ली सरकार से पानी और अन्य सुविधाओं की मांग की। इसके बाद दिल्ली सरकार ने किसानों को पूरी मदद देने का आश्वासन दिया। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को यूपी बॉर्डर पहुंचकर किसानों का पूरा समर्थन किया। उन्होंने किसानों को हर संभव मदद देने की बात भी कही।

इसके पहले आरएलडी नेता जयंत चौधरी भी धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों को अपना समर्थन दिया। आरएलडी की जमीन भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान शेटरों पर ही निर्भर करती है और उसकी बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में समर्थक मौजूद हैं। ऐसे में जयंत चौधरी के राकेश सिंह टिकैत के साथ आने से किसान आंदोलन को नई मजबूती मिली है।

सार

  • राकेश सिंह की अपील के बाद लगातार यूपी बॉर्डर पहुंच रहे हैं किसान,
  • अपने साथ कोई ला रहा है और न ही पानी की बोतलें

विस्तार

राकेश सिंह टिकैत के नाम में जुड़ा ‘टिकैत’ शब्द किसी जाति का सूचक नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब-हरियाणा के क्षेत्रों में इस शब्द का प्रयोग उन जातीय नेताओं के लिए किया गया था, जिनके चयन जाति विशेष के नेता एक पंचायत के माध्यम से किए गए थे। माना जाता था कि यह नेता नैतिक नीतियों-परंपराओं की रक्षा के लिए अपनी कही गई बात पर हमेशा ताल रहता है। इसीलिए उसे टिकैत का नाम दिया गया था इसका अर्थ होता था जो अपनी बात पर टांगें रखता था।

चुनाव के बाद टिकैत चौधरी चुनने की परंपरा भी वंशानुगत हो गई, जिससे पहले तो राकेश सिंह टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत ने अपनाई। उपनामों के चयन पर कोई प्रतिबंध न होने के कारण के बाद महेंद्र सिंह टिकैत के सभी बेटों ने भी इसे अपने नाम के साथ जोड़ लिया। राकेश सिंह के नाम में ‘टिकैत’ शब्द इसी क्रम में शामिल किया गया है।

असली ‘टिकैत’ निकले राकेश सिंह

भारतीय किसान यूनियन बागपत के नेता किशोर सिंह ने अमर उजाला को बताया कि गाजियाबाद प्रशासन सख्ती से किसान आंदोलन खत्म करने की तैयारी कर रहा है। आंदोलन से कुछ लोगों के वापस होने की भ्रामक खबरों के बाद कुछ किसान नेताओं को भी लगा कि उनकी अब तक की मेहनत पानी में जाने वाली है। इसके बाद भावुक हुए राकेश सिंह टिकैत ने रोते हुए किसानों से यूपी बॉम्ब पहुंचने की अपील की और आंदोलन से पीछे न हटने की बात कही।

किशोर सिंह के मुताबिक राकेश सिंह की इस अपील का किसानों पर बड़ा असर हुआ और रातोंरात हजारों किसान यूपी बॉर्डर की ओर चले गए। किसानों के आने का यह क्रम अभी भी जारी है और शनिवार तक इसके बने रहने की उम्मीद है। किसान नेता के मुताबिक इसके बाद पून क्षेत्र में राकेश सिंह टिकैत के पक्ष में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। किसानों को लग रहा है कि यह असली टिकैत है जो किसानों के हितों के लिए अड़े हुए हैं।

सरकार ने किसानों का पानी बंद कर दिया है। इसे देखते हुए राकेश सिंह टिकैत ने घोषणा की थी कि अब उनके घर से पानी जाएगा और वे जल ग्रहण करेंगे। इस अपील को देखते हुए यूपी बॉर्डर पहुंच रहे किसान अपने साथ पानी की बोतलें लेकर पहुंच रहे हैं। कई किसान खुद के साथशेठे, छाछ, दही, चूड़ा और अन्य सामान लेकर पहुंच रहे हैं। यूपी बॉर्डर पर राकेश सिंह टिकैत की गिरफ्तारी और किसानों को धरना स्थल से हटाने की तैयारी वर्तमान में रुकती रही है।

तेज हो रही है आंदोलन की आंच

आंदोलनकारियों के लिए पानी जैसी बुनियादी सुविधा हटा के लिए जाने के बाद यह संदेश गया है कि सरकार ने अपनी तरफ से आंदोलनकारियों को कोई भी सहयोग देना बंद कर दिया है। लेकिन सरकार के इस रुख का आंदोलनकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा है। सहारनपुर से आंदोलन के समर्थन में यूपी बॉर्डर पहुंचे किसान चौधरी हरिपाल सिंह ने कहा कि वे आंदोलन को और तेज करने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी आंच धीमे-धीमे और तेज की जा रही है। सरकार से अगले दौर की वार्ता के पूर्व किसान नेता इस पर जल्दी ही बड़ा निर्णय ले सकते हैं।

मनीष सिसोदिया, जयंत चौधरी के पहुंचने से आंदोलन को मजबूती मिली

सरकार से आंदोलन को सहयोग मिलना बंद होने के बाद राकेश सिंह टिकैत ने दिल्ली सरकार से पानी और अन्य सुविधाओं की मांग की। इसके बाद दिल्ली सरकार ने किसानों को पूरी मदद देने का आश्वासन दिया। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को यूपी बॉर्डर पहुंचकर किसानों का पूरा समर्थन किया। उन्होंने किसानों को हर संभव मदद देने की बात भी कही।

इसके पहले आरएलडी नेता जयंत चौधरी भी धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों को अपना समर्थन दिया। आरएलडी की जमीन भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान शेटरों पर ही निर्भर करती है और उसकी बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में समर्थक मौजूद हैं। ऐसे में जयंत चौधरी के राकेश सिंह टिकैत के साथ आने से किसान आंदोलन को नई मजबूती मिली है।





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