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रेलवे के लिए वरदान बने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जानिए 3 साल में कितनी हुई कमाई


इस कॉरिडोर के डेवलप होने से रेलवे के जरिए माल ढुलाई के लिए कारोबारियों का भरोसा भी बढ़ रहा है.

भारत में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का कुछ हिस्सा बनकर तैयार हो चुका है. जिन हिस्सों पर माल ढुलाई शुरू हो चुकी है, उससे रेलवे को हज़ारों करोड़ रुपये की कमाई हो रही है. इसे आगे और भी बढ़ाने के लिए रेलवे कई तरह के सामानों पर सब्सिडी पर दे रहा है

नई दिल्ली. कुछ डेडिकेटेड रेल फ्रेट कॉरि़डोर (Dedicated Rail Freight Corridor) बनकर तैयार हो चुके हैं. लगातार माल की ढुलाई भी कर रहे हैं. वहीं कुछ ऐसे भी रेल कॉरि़डोर हैं जिन पर अभी काम चल रहा है. रेल कॉरिडोर भारतीय रेलवे (Indian Railway) के लिए वारदान साबित हो रहे हैं. इसे रेलवे को हज़ारों करोड़ रुपये की कमाई हो रही है. हर साल कमाई में 10 हज़ार करोड़ से ज़्यादा की बढ़ोतरी भी हो रही है. माल की मात्रा भी बढ़ रही है. जो यह बताता है कि माल वक्त से पहुंचने के चलते कारोबारियों का विश्वास भी रेलवे में बढ़ रहा है. जल्द ही रेल कॉरिडोर (Rail Corridor) के दूसरे सेक्शन भी चालू हो जाने की उम्मीद है.

रेलवे की ओर से हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे ने साल 2017-18 में 1159 मिलियन टन सामान की ढुलाई की थी. वहीं इस ढुलाई से रेलवे को 1.17 लाख करोड़ रुपये मिले थे. वहीं 2018-19 में 1221 मिलियन टन सामान की ढुलाई करने पर 1.27 लाख करोड़ रुपये मिले थे. जबकि साल 2019-20 में 1208 मिलियन टन सामान की ढुलाई करने पर 1.13 लाख करोड़ रुपये मिले थे.

अपने इस कारोबार को और बढ़ाने के लिए रेल तमाम तरह के सामान पर सब्सिडी भी दे रहा है. फल और सब्जी की ढुलाई पर 50 फीसद की सब्सिडी दी जा रही है. इसके साथ ही दूसरे सामान की ढुलाई पर भी कई दूसरी तरीकों से छूट दी जा रही है.

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भारतीय रेलवे देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के औद्योगिक क्षेत्रों को दक्षिण भारत से जोड़ने के लिए करीब 4 हज़ार किलोमीटर का डेडिकेटेड रेल फ्रेट कॉरि़डोर का निर्माण करेगा. यह प्रस्तावित कॉरिडोर रेलवे के अगले बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का हिस्सा है. इसमें देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को दक्षिण भारत के साथ ओड़िशा और आंध्र प्रदेश के प्रमुख बंदरगाहों के जरिए जोड़ा जाएगा.

ऐसा होगा 4 हज़ार किमी का रेल कॉरिडोर
डीएफसी रेलवे की अगली बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का हिस्सा हैं. ये डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तीन रूट पर बनेंगे. इनमें खड़गपुर (प. बंगाल) से विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) को जोड़ने वाला 1,115 किलोमीटर का पूर्वी तटीय कॉरिडोर, भुसावल नागपुर खड़गपुर दानकुनी (कोलकाता के पास) मार्ग को जोड़ने वाला 1,673 किलोमीटर का पूर्व पश्चिम कॉरिडोर और 195 किलोमीटर का राजखर्सवान कालीपहाड़ी अंडाल (प. बंगाल) को जोड़ने वाला कॉरिडोर शामिल हैं. तीसरा 975 किलोमीटर का नॉर्थ साउथ सब कॉरिडोर है. यह विजयवाड़ा नागपुर इटारसी (मध्य प्रदेश) मार्ग को जोड़ेगा.

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि़ (DFCCIL) जल्द इन कॉरिडोर के सर्वे का काम शुरू करेगी. वह इस प्रक्रिया को एक साल में पूरा करेगी. ये गलियारे ओड़िशा के पारादीप, धामरा, गोपालपुर बंदरगाहों तथा आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम, गंगावरम, काकीनाडा, कृष्णापत्तनम और मछलीपत्तनम बंदरगाहों को संपर्क उपलब्ध कराएंगे. इनसे माल की ढुलाई तेज हो सकेगी और रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ सकेगी. इसमें 81 हजार करोड़ रुपये की लागत आएगी.








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