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लघुकथा: सुनील अपने पिता जी का वास्तव ख़्याल रखने वाली थी या फिर मजबूरी वश उसे ऐसा करना पड़ रहा था, आख़िर इतनी परवाह करने का कारण क्या था …


  • हिंदी समाचार
  • मधुरिमा
  • सुनील वास्तव में अपने पिता की देखभाल कर रहा था या उसे ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया था, इतना ध्यान रखने का क्या कारण था …

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मीरा जैन3 घंटे पहले

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  • पिता को बलिदान देने का निश्चय कर चुके सुनील को यकायक पिता का बेहद ख़्याल रखते हुए सीमा का हैरान होना वाजिब है। आख़िर कारण क्या था?

‘शुरूवाती बाबा! आपको खांसी बहुत हो रही है, डॉ। को लाऊं दिखा रहा है। ‘ महिनों बात नहीं करने वाले बेटे को आज अचानक इतना मेहरबान देख मोतीलाल जी हतप्रभ थे। जो भी हो मोतीलालजी झटपट तैयार हो ख़ुशी-ख़ुशी सुनील के साथ चल दिए। आज ही नहीं ये पूछ-पूछ का सिलसिला अनवरत जारी था जिसे देखने की सीमा अंदर तक विचलित थी। कहां ससुर जी को वृद्धश्रम पहुंचाने की तैयारी थी, कहां ये तिमारदारी? ताना मारते हुए आखिर कर सीमा ने पूछा ही लिया- ‘क्यों जी! अचानक पिताजी पर इतना प्यार क्यों उमड़ आया मैं भी तो जानूं? ‘ पहले तो सुनील टालता रहा जब सीमा ज़िद पर अड़ गई तो सुनील ने अपनी विवशता कुछ यूं जाहिर की – ‘सीमा! बात दरअसल यह है कि कुछ दिनों पूर्व मैं अपने जन्म कुंडली के बारे में शहर मे पधारे प्रकंड ज्योतिष शास्त्र्य के पास गया और अपनी उम्र आदि के बारे में जानकारी चाही, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि! बेटा! आप ख़ुशकिस्मत हो। तुम्हारी उम्र भी तुम्हारे पिता के साथ ही होगी और जीवन भी हू ब हू वैसा ही होगा जैसा तुम्हारे पिता का रहेगा। ‘

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