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लाइवम स्टडी: देश में 100 जातियों के 20 हजार लोगों की स्टडी हो रही है, पता चलेगा- कौन जाति में कौनसी बीमारी का खतरा, पर्सनलाइज दवा-छड़ी बेगी


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जोधपुर11 घंटे पहले

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डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेअमी जेनोम्स इंडिया प्रोजेक्ट के तहत जेनोम्स की स्टडी करवा रही है। यह अत्यंत महत्वाकांक्षी परियोजना का जिम्मा भारत विज्ञान संस्थान, AIIMS जोधपुर सहित देशभर के 20 संस्थानों को दिया गया है।

कोरोना ने स्वास्थ्य व मेडिकल साइंस को पूरी दुनिया में उच्च प्राथमिकताओं में ला दिया है। इसी का नतीजा है कि भारत सरकार भी अब फ्यूचर मेडिकल साइंस पर बेहद गंभीरता से काम कर रही है। डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलाजी जेनोम्स इंडिया प्रोजेक्ट के तहत देशभर की 100 जातियों के 20 हजार लोगों के जीनोम्स की स्टडी करवा रही है। इस अत्यंत महत्वाकांक्षी परियोजना का जिम्मा भारत विज्ञान संस्थान, एम्स जोधपुर सहित देशभर के 20 संस्थानों को दिया गया है।

यह क्रांतिकारी परियोजना इतनी महत्वपूर्ण है कि- इससे देश में कौन जाति में कौनसी बीमारी हो रही है आशंका अधिक व इससे कितनी बच सकती है, यह महत्वपूर्ण होगा। यदि किसी जाति में काेई बीमारी विशेष होने की अधिक आशंका है तो उसे पहले ही रोक दिया जाएगा। पर्सनलाइज इलाज होगा, जिसमें प्रत्येक रोगी को उसके अनुसार दवा और डोज दी जाएगी। इसके साथ ही यह स्टडी भविष्य में होने वाले इलाज के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

एम्स रेजिडेंट, यूपी, हरियाणा में 10 जातियों के सैंपल ले रहे हैं

एम्स के डीन डॉ। कुलदीप सिंह ने बताया कि 3 जनवरी 2020 से शुरू हुए इस स्टडी में AIIMS रेजिडेंट, हरियाणा व यूपी के कुछ इलाकों से सैंपल ले रहा है। राजपूत, ब्राह्मण, अग्रवाल, जाट, माहेश्वरी, जैन, माली, मुस्लिम, सिंधी, मीना, गुर्जर आदि 10 जातियों के जीन की स्टडी की इच्छा। यह स्टडी एम्स सहित 20 संस्थान देश के विभिन्न भागों में कर रहे हैं। एम्स विभिन्न जिलों से 500 व्यक्तियों के सैंपल ले चुका है।

जानिए- जीनोम स्टडी के परिणाम किस तरह मेडिकल साइंस को बदल देंगे

  • बीमारी होने की आशंका का पहले ही पता चलेगा।
  • एंटी नेटल, यानी गर्भ का भी इलाज हो सकेगा।
  • पर्सनलाइज इलाज, यानी किस व्यक्ति पर कौनसी दवा, बहुत डोज से असर पड़ेगा।
  • आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में जीनोम का डेटा डालने पर वह भविष्यवाणी बता देगी।
  • दवाओं का सॉल्ट व कॉम्बिनेशन बदला, छड़ी भी बनने लगेंगी।
  • यदि किसी व्यक्तिवाद में काई बीमारी विशेष की अधिक आशंका है तो उसे रोक दिया जाएगा।
  • बीमारी की सटीक व सूक्ष्मतम जानकारी मिलने से डॉ। बेहतरीन दवा-इलाज दे सकते हैं।
  • इंसान का निरोगी जीवन बढ़ जाता है।

इस तरह स्टडी हो रही है

  • व्यक्ति की सहमति के बाद ही उन पर स्टडी हो रही है। विभिन्न सैंपल के बारे में बायोकेमिकल जांच करते हैं।
  • इसमें बीपी, डायबिटिज या अन्य बीमारी मिलने पर उसे स्टडी से अलग कर उन्हें इंगित करते हैं।
  • व्यक्ति के 4 प्रकार से सैंपल लिए जा रहा है। व्यक्ति का वजन, लंबाई, आंखों का रंग आदि के लिए जाते हैं।
  • इसके बाद बॉडी कंपोजिशन, ब्लड टेस्ट और बाद में डीएनए एमबीए में अलग कर उस पर जीनोम स्टडी की जाती है।
  • डीएनए निकालने का काम एम्स की रायपुर में किया जाता है।
  • बॉडी कंपोजिशन टेस्ट में व्यक्ति का कितना मसल्स मांस और कितना फैट है, यह देखा जाता है।
  • विशेष मशीन को छान में ले जाकर यह टेस्ट वहीं मौके पर किए जा रहे हैं। जयपुर, बाड़मेर, सिरोही, जोधपुर में सैंपल के लिए है।

जातियों की जीनोम स्टडी इतनी आसान भी नहीं

जीनोम स्टडी इतनी जटिल होती है कि एक क्षेत्र विशेष में रहने वाली कम्युनिटी में डायबिटीज के जीन तो थे, लेकिन बीमारी नहीं। इसका कारण वहाँ के एनवमेंट का असर था।

एक व्यक्ति का जीन 40 जीबी तक का

जीन मैपिंग बेहद जटिल व स्तर स्तर की होती है। जीन के दो हिस्से, कोडिंग व नॉन कोडिंग होते हैं। जीनोम के सीक्वेंस से बीपी, डायबिटिज, कैंसर आदि का पहला पता चल सकता है। एक व्यक्ति का जीन डेटा 40 जीबी तक में आता है।

फ्लैश बैक- इस स्टडी ने ‘इलाज’ में सुधार किया

विश्व में सबसे पहले 1993 में जीनोम मैप पर कंसोर्टियम हुआ था। इसके बाद ही इंसान की जीनोम स्टडी सफलतापूर्वक की जाकी। वर्ष 2003 में जब जीनोम स्टडी के रिजल्ट आए, तब इस आधार पर बीमारियां जल्दी डायग्नोस होने लगीं, एंटी नेटल इलाज शुरू हो पाए। ये सभी को देखते हुए देश में ये परियोजना शुरू की गई है।

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