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लोकसभा चुनावों में कालाधन का संक्रमण: SC के पुराने फैसलों का हवाला देकर कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में आरोपी अफसर, सरकार को आरोप पत्र का जवाब भी देंगे


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भाेपाल2 घंटे पहले

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लोकसभा चुनाव में कालाधन के हस्तांतरण मामले में आरोपी अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देकर सरकार की लापरवाही को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर ली है।

  • गृह विभाग ने 10 जनवरी को सीबीडीटी की रिपोर्ट सचिवालय भेजकर आगे की कार्रवाई करने की अनुमति मांगी थी, केंद्र सरकार ने 8 जनवरी को तीनों आईपीएस अफसरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की अनुमति दी थी।

लोकसभा चुनाव में कालाधन के हस्तांतरण मामले में आरोपी अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देकर सरकार की लापरवाही को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर ली है। इसके साथ ही ये अफसर सरकार द्वारा दिए गए आरोप पत्र का जवाब भी देंगे। दो दिन पहले गृह विभाग ने 3 आईपीएस अफसर वी। मधुकुमार, सुशोवन बनर्जी व संजय वी। माने और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अस्रन मिश्रा को आरोप पत्र देकर 15 दिन में जवाब मांगा था।

मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार केंद्रीय प्रत्यक्षकर बोर्ड (सीबीडीटी) की रिपोर्ट के आधार पर इन अफसरों से लेनदेन को लेकर सवाल उठाया गया है।) इससे पहले आरोपी अफसरों ने भी अपने बचाव में सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि शिशु की अप्रेजल रिपोर्ट के आधार पर सरकार को कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि अप्रेजल रिपोर्ट के आधार पर आपराधिक अवधि दर्ज नहीं की जा सकती है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला भी दिया गया था।

इन अफसरों को आरोप पत्र देने में गृह विभाग ने डेढ़ महीने का वक्त लगा दिया। दरअसल, विभागीय कार्रवाई की फाइल एक महीने से मुख्यमंत्री कार्यालय में अटकी हुई थी। इसके चलते गृह विभाग इन अफसरों को आरोप पत्र जारी नहीं कर पा रहा था। गृह विभाग ने 10 जनवरी को सीबीडीटी (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) की रिपोर्ट के साथ आगे की कार्रवाई करने की अनुमति के लिए प्रस्ताव सीएम सचिवालय को भेजा था।

बता दें कि इस मामले में केंद्र सरकार ने 8 जनवरी को तीनों आईपीएस अफसरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की अनुमति राज्य सरकार को दी थी। लेकिन हालत यह है कि एक महीने बाद भी इन अफसरों की विभागीय जांच शुरू नहीं हो पाई है। इससे पहले चुनाव आयोग ने सरकार से सीबीडीटी की रिपोर्ट पर एक्शन लेने के निर्देश दिए थे। इस पर सरकार ने आर्थिक अपराध प्रवर्तन ब्यूरो (EOW) को एफआईआर दर्ज करने को कहा था। ईओडब्ल्यू ने 2 जनवरी को इसकी आलमिकी दर्ज कर ली थी।

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