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वाराणसी में हजरत अली की जयंती पर जुलुस निकला, अली अली डे मनाया गया


दरगाह-ए-फतमान में हजरत अली की जयंती पर बोलते हुए संकट मोचन मंदिर के महंत विश्वंभरनाथ मिश्र
– फोटो: अमर उजाला

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शिया समुदाय के पहले इमाम हजरत अली की जयंती (अली डे) पर हर तरफ जश्न का माहौल छाया रहा। मस्जिदों व मौला अली के रौजे पर रोशनी की विशेष व्यवस्था रही। जगह-जगह महफिल-मीलाद कार्यक्रम हुआ। जिसमें हजरत अली की शान में कसीदे पढ़े गए। टाउनहाल मैदान से जुलुस निकाला गया।

जो बुलानाला, नीचीबाग, चौक, पुलमंडी, नई सड़क, काली महल, पितरकुंडा होते हुए जुलुस लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान पहुंचकर समाप्त हुआ। वहीं दुआख्वानी व जोहर की नमाज के बाद दरगाह फातमान स्थित सभागार में सभी धर्म प्रार्थना सभा होगी। जुलुस का रास्ता भर स्वागत हुआ। जुलुस में शामिल लोगों के लिए जलपान की व्यवस्था जगह-जगह की गई थी।

हजरत अली के लिए मजहब की दीवार नहीं
दरगाह-ए-फतमान में हजरत अली की जयंती पर सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें सभी धर्मों के धर्मगुरु मौजूद हैं। मंदिर मोचन मंदिर के महंत प्रो। विश्वंभर नाथिश ने कहा कि आज हम हजरत अली की पैदाइश का जश्न मना रहे हैं। लोग कहते हैं कि इस्लाम से खतरा है लेकिन सच्चाई तो ये है कि उन रिश्तों हैं जो मूल में मजहब को नहीं जानते, फिर चाहे वे जिस मजहब के हों।

फरमान हैदर ने कहा है कि अली के लिए मजहब की दीवार नहीं होनी चाहिए। अली सिर्फ मुसलमानों या शियाओं के नहीं हैं। हमारे लिए हजरत अली उसी तरह हैं जैसे भगवान राम और कृष्ण। फादर यूजीन ने कहा कि मौला सिर्फ़ मुसलमानों के नहीं बल्कि सभी के हैं। उन्होंने मोहब्बत का पैगाम दिया। इस मौके पर कई शायरों ने कलाम पेश किया।

शिया समुदाय के पहले इमाम हजरत अली की जयंती (अली डे) पर हर तरफ जश्न का माहौल छाया रहा। मस्जिदों व मौला अली के रौजे पर रोशनी की विशेष व्यवस्था रही। जगह-जगह महफिल-मीलाद कार्यक्रम हुआ। जिसमें हजरत अली की शान में कसीदे पढ़े गए। टाउनहाल मैदान से जुलुस निकाला गया।

जो बुलानाला, नीचीबाग, चौक, पुलमंडी, नई सड़क, काली महल, पितरकुंडा होते हुए जुलुस लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान पहुंचकर समाप्त हुआ। वहीं दुआख्वानी व जोहर की नमाज के बाद दरगाह फतमान स्थित सभागार में सभी धर्म प्रार्थना सभा होगी। जुलुस का रास्ता भर स्वागत हुआ। जुलुस में शामिल लोगों के लिए जलपान की व्यवस्था जगह-जगह की गई थी।

हजरत अली के लिए मजहब की दीवार नहीं

दरगाह-ए-फतमान में हजरत अली की जयंती पर सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें सभी धर्मों के धर्मगुरु मौजूद हैं। मंदिर मोचन मंदिर के महंत प्रो। विश्वंभर नाथिश ने कहा कि आज हम हजरत अली की पैदाइश का जश्न मना रहे हैं। लोग कहते हैं कि इस्लाम से खतरा है लेकिन सच्चाई तो ये है कि उन रिश्तों हैं जो मूल में मजहब को नहीं जानते, फिर चाहे वे जिस मजहब के हों।

फरमान हैदर ने कहा है कि अली के लिए मजहब की दीवार नहीं होनी चाहिए। अली सिर्फ मुसलमानों या शियाओं के नहीं हैं। हमारे लिए हजरत अली उसी तरह भगवान राम और कृष्ण हैं। फादर यूजीन ने कहा कि मौला सिर्फ़ मुसलमानों के नहीं बल्कि सभी के हैं। उन्होंने मोहब्बत का पैगाम दिया। इस मौके पर कई शायरों ने कलाम पेश किया।





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