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वॉट्सएप के एक मैसेज ने 1 लाख करोड़ रुपये की पॉल्ट्री इंडस्ट्री की कमर तोड़ी, जानिए कैसे


भारत की पॉल्ट्री इंडस्ट्री करीबब 1 लाख करोड़ रुपये की है. ये 50 लाख लोगों को सीधे रोजगार देती है. वहीं. इससे करीब 2.5 करोड़ किसान जुड़े हुुए है.

भारत की पॉल्ट्री इंडस्ट्री करीबब 1 लाख करोड़ रुपये की है. ये 50 लाख लोगों को सीधे रोजगार देती है. वहीं. इससे करीब 2.5 करोड़ किसान जुड़े हुुए है.

नई दिल्ली. फरवरी महीने की शुरुआत में महाराष्ट्र में पॉल्ट्री फार्मिंग (Poultry Farming) करने वाले एक किसान के फोन पर मैसेज आता है. इसमें अंडे और चिकन से कोरोना वायरस (Coronavirus) फैलने की बात कहीं गई. देखते ही देखते ये फेक मैसेज तेजी से वॉट्सएप (Whatts App) पर शेयर होने लगा और कुुछ ही दिनों में अंडे और चिकन के दाम 90 फीसदी तक गिर गए. ऐसे में इससे जुड़े लाखों किसानों के लिए आमदनी पर बहुत बुरा असर पड़ा. हर महीने 25-35 हजार रुपये की आमदनी वाले किसानों के लिए घर को चलाना मुश्किल हो गया है.

अंग्रेजी के बिजनेस न्यूज पेपर लाइव मिंट को दिए एक इंटरव्यु में ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट सुरेश चितपुरी कहते हैं कि डिमांड गिरने की वजह मार्च की शुरुआत में ही देश के सभी हिस्सा में चिकन के दाम गिरकर 5-10 रुपये पर आ गए. वहीं, एक दर्जन यानी 12 अंडों की कीमत 48 रुपये से गिरकर 24 रुपये पर आ गई, जबकि मटन की डिमांड में बड़ा इजाफा हुआ है. इससे 160 करोड़ रुपये प्रति दिन का नुकसान हो रहा है.

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देश के जिस राज्य में सबसे ज्यादा कोरोना वायरस के केस सामने आए हैं वो है महाराष्ट्र. समूचे महाराष्ट्र में पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े लोगों को भारी नुकसान हो रहा है. लोगों ने चिकन खाना ही बंद कर दिया है. व्यवसायी यहां 10 से 15 रुपये में मुर्गा बेचते नजर आ रहे हैं. हालत यहां तक पहुंच गई कि महाराष्ट्र के बुलढाणा में पोल्ट्री व्यवसायी अपने नुकसान की भरपाई की मांग लेकर सड़कों पर उतर आए. यहां जिलाधीश कार्यालय के मेन गेट पर मुर्गे छोड़कर आंदोलन किया गया. पुलिस ने सभी आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया है.महाराष्ट्र के ही कोल्हापुर जिले में कोरोना वायरस के डर के चलते मुर्गों की सेल लग गई. यहां सिर्फ सौ रुपऐ में 4 मुर्गे बेचे जा रहे हैं. ऐसी सेल कई इलाकों में लगी हुई हैं.

पंजाब जैसे राज्य में जहां चिकन 65 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा था, वहां अब यह 15 रुपये बिक रहा है. पंजाब में भी पोल्ट्री फार्म मालिक बेहद दुखी है उनका कहना है कि एक किलो पर 50 रुपये का नुकसान हो रहा है. सरकार को हमारा भी ध्यान रखना चाहिए और मुआवजा देना चाहिए.

पॉल्ट्री एसोसिएशन ने ना सिर्फ लोगों के मन से चिकन को लेकर भ्रांतियां दूर कीं, बल्कि एसोसिएशन ने यहां पूरे इलाके में चिकन की एक फुल प्लेट मात्र 30 रुपये में सबको बांटी गई.

अब सवाल यह है कि क्या चिकन या अंडे खाने से सच में कोरोना वायरस फैलता है. ऐसा बिलकुल नहीं है. डॉक्टर्स ने बकायदा कई बार यह जानकारी दी है कि साफ-सफाई बनाई रखें, अफवाहों पर ध्यान ना दें. लेकिन चिकन से वायरस फैलने की अफवाह देश के कई हिस्सों में फैल गई है.

महाराष्ट्र के पशुपालन मंत्री सुनील केदार स्पष्ट किया कि कोरोना वायरस का पॉल्ट्री (कुक्कुट) उत्पादों के सेवन से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि ये दावे निराधार हैं कि चिकन या अन्य पॉल्ट्री उत्पादों के सेवन से कोई व्यक्ति कोरोना वायरस की चपेट में आ सकता है. केदार ने कहा, पॉल्ट्री उत्पादन से जुड़े किसानों का इन अफवाहों से बहुत नुकसान हुआ है कि पॉल्ट्री के जरिये कोरोना वायरस फैलता है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी गलत सूचनाएं फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.








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