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व्यापम फर्जीवाड़ा: चिरायु मेडिकल कॉलेज के संचालक, तत्कालीन डीएमई सहित 60 के खिलाफ लॉजिक पेश किया गया; कोरोना के नेतृत्व में 5-5 कर प्रभारियों को आवेदन करने के आदेश


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ग्वालियर3 घंटे पहले

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प्रतीकात्मक फोटो

मेडिकल कॉलेज में फर्जीवाड़ा कर सीटों के खरीद फरोख्त मामले में गुरुवार को सीबीआई ने चिरायु मेडिकल कॉलेज के संचालक, तत्कालीन डीएमई सहित 60 आरोपियों के खिलाफ विशेष सत्र न्यायालय में याचिका पेश की है। को विभाजित के कारण संयोजन पेश करने में देर शाम हो गए। जिनके खिलाफ संग्रह प्रस्तुत किया गया है, उनमें से 57 आरोपी नए बनाए गए हैं। तीन आरोपी पुराने हैं। कोविड के कारण हाई कोर्ट ने आरोपियों को 5-5 कर बुलाने का आदेश दिया। हाई कोर्ट के आदेश आने के बाद आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं हो पाए हैं। परीक्षण के लिए अगली तारीख 28 जनवरी तय की है।

यह मामला है

चिरायु मेडिकल कॉलेज में शासन कोटे की 63 परीक्षा थी। वर्ष 2011 में 47 सीटों को नियम को ताक पर रखकर फर्जीवाड़ा कर खाली रखा गया था। बाद में इन सीटों को चिरायु मेडिकल कॉलेज का प्रबंधन ने बेच दिया था। ऐसे छात्रों को प्रवेश दिया गया, जिन्होंने काउंसलिंग में ही भाग नहीं लिया था। शुरू में इस मामले में पैमं कांड के खुलासे के समय झांसी रोड थाना में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। 2015 को मामले की जांच सीबीआई को मिली। सीबीआई ने इस मामले में 57 नए आरोपियों को शामिल किया है।

फर्जीवालिंग्स में इनकी भूमिका

कॉलेज के ट्रस्टियों की निगरानी में सीट खरीदने की बिक्री का खेल शुरू हुआ। में उसने MPPMT काउंसलिंग कमेटी को अपने कांगे की सीटों की गलत जानकारी दी। सीटों को साठगांठ कर खाली रखा गया। इसमें चिरायु के जनसंपर्क अधिकारी डॉ। गिरीश कानिटकर, चिरायु के प्रशासनिक अधिकारी डॉ। एसएन सक्सेना, तत्कालीन डीएमई डॉ। एससी तिवारी और डीन डॉ। तिवारी की भूमिका रही। उसने पैसे के बारे में चिरायु मेडिकल कालेज को सरकारी कोटे की बैठक भरने दीं।

ऐसे करते थे खाली सीट का नायडू

चिरायु मेडिकल कॉलेज का प्रबंधन कुछ ऐसे मेधावी छात्रों को प्री मेडिकल टेस्ट दिलाते थे, जो पहले से ही शासकीय कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे थे। सीट मिलने के बाद काउंसलिंग के आखिरी समय मे ये सीट नहीं ले रहे थे। उसके बाद सीट खाली रह जाती थी, जिसको मनमानी कीमत पर बेचा जाता था।





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