Home उत्तर प्रदेश व्यापारियों के पंजीकरण के बिना अनुचित

व्यापारियों के पंजीकरण के बिना अनुचित


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बांदा। कन्फेडरेशन ऑफ अली इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा कि बिना परीक्षण किए व्यापारियों का पंजीकरण रद्द करना देश के संविधान में दिए गए अधिकारों का बोझ है। व्यापारियों ने जीएसटी के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि इससे बड़े व्यापारी उनसे माल खरीदना पसंद नहीं करेंगे।
कैट शाखा ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट में डीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन में कहा कि 22 दिसंबर 2020 को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर और कस्टम विभाग ने अपने नोटिफिकेशन से जीएसटी में कई संशोधन किए हैं। इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट पर कुछ शर्तों के साथ अंकुश लगा दिया गया है। यह नैसर्गिग न्याय और सिद्धांत के विरुद्ध है। देश में ज्यादातर पंजीकृत मार्कर तिमाही आधार पर अपनी बिक्री रिटर्न भरते हैं। 50 लाख मासिक बिक्री करने वालों के इनपुट टैक्स क्रेडिट को 99 प्रतिशत पर स्थित कर देना न्याय संगत नहीं हो सकता है।
ई-वे बिल में प्रति 100 किमी के स्थान पर 200 किमी करना भी युक्ति संगत नहीं है। मांग की कि नोटिफिकेशन नंबर -94 को वापस लेकर सरकारी व्यापारियों के साथ बैठक करें और जीएसटी की पुन: समीक्षा कर एक मुशायरे को दुरुस्त करें। ज्ञापन देने वालों में कैट जिलाध्यक्ष अमित सेठ भोलू, प्रदेश उपाध्यक्ष राजकुमार राज, नगर अध्यक्ष अमित गुप्ता, मनीष, निशान्त खैरा, मनोज जैन, गौरव अग्रवाल, सुरेश कान्हा, न्यूम नेता, अरविंद बड़ौनिया, अशोक गुप्ता, मोहम्मद यार खां, पीयूष गुप्ता, पीयूष गुप्ता शामिल थे। अनमोल जड़िया, प्रदीप जड़िया, अवधेश गुप्ता, मुन्ना राईन, अलहयात हसन आदि शामिल थे। ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट केशवनाथ को दिया गया।

बांदा। कन्फेडरेशन ऑफ अली इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा कि बिना परीक्षण किए व्यापारियों का पंजीकरण रद्द करना देश के संविधान में दिए गए अधिकारों का बोझ है। व्यापारियों ने जीएसटी के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि इससे बड़े व्यापारी उनसे माल खरीदना पसंद नहीं करेंगे।

कैट शाखा ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट में डीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन में कहा कि 22 दिसंबर 2020 को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर और कस्टम विभाग ने अपने नोटिफिकेशन से जीएसटी में कई संशोधन किए हैं। इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट पर कुछ शर्तों के साथ अंकुश लगा दिया गया है। यह नैसर्गिग न्याय और सिद्धांत के विरुद्ध है। देश में ज्यादातर पंजीकृत मार्कर तिमाही आधार पर अपनी बिक्री रिटर्न भरते हैं। 50 लाख मासिक बिक्री करने वालों के इनपुट टैक्स क्रेडिट को 99 प्रतिशत पर स्थित कर देना न्याय संगत नहीं हो सकता है।

ई-वे बिल में प्रति 100 किमी के स्थान पर 200 किमी करना भी युक्ति संगत नहीं है। मांग की कि नोटिफिकेशन नंबर -94 को वापस लेकर सरकारी व्यापारियों के साथ बैठक करें और जीएसटी की पुन: समीक्षा कर एक मुशायरे को दुरुस्त करें। ज्ञापन देने वालों में कैट जिलाध्यक्ष अमित सेठ भोलू, प्रदेश उपाध्यक्ष राजकुमार राज, नगर अध्यक्ष अमित गुप्ता, मनीष, निशान्त खैरा, मनोज जैन, गौरव अग्रवाल, सुरेश कान्हा, न्यूम नेता, अरविंद बड़ौनिया, अशोक गुप्ता, मोहम्मद यार खां, पीयूष गुप्ता, पीयूष गुप्ता शामिल थे। अनमोल जड़िया, प्रदीप जड़िया, अवधेश गुप्ता, मुन्ना राईन, अलहयात हसन आदि शामिल थे। ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट केशवनाथ को दिया गया।





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