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शस को नहीं ले जा सके तो बाघ की मूंछ के बाल काट ले गए शिकारी


बाघ के शव को देख वन विभाग और पुलिस के अफसर।
– फोटो: अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

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मोहम्मदी रेंज में शिकारियों के लगाए बिजली के तारों की चपेट में आकर बाघ की मौत का मामला
बांकेगंज / भीखमपुर। तराई के जंगलों में शातिर शिकारियों की सक्रियता से जंगल के दुर्लभ वन्यजीव ही नहीं, बल्कि बाघ और तेंदुए भी नहीं हैं। सोमवार को मोहम्मदी रेंज में शिकारियों के बिछाए हाईवोल्टेज प्रवाहित तार की चपेट में आने से एक बाघ और एक जंगली सुअर की मौत से वन विभाग सकते में है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि शिकारियों ने जंगली सुअर का शिकार करने के लिए तर बिछाए थे, जिनके चपेट में आने से एक जंगली सुअर तो मारा ही गया और एक बाघ की भी मौत हो गई। यही नहीं बाघ की मूंछों के बाल भी गायब मिले हैं।
दक्षिण खीरी वन रोड की मोहम्मदी रेंज के आंवला बीट के जंगल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर डोकरपुर गांव के निकट खेत में एक बाघ और एक जंगली सुअर का शव बरामद हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के आला हाकिम मौके पर पहुंच गए और छानबीन शुरू कर दी। दोनों शवों की जांच करने पर यह बात सामने आई कि बाघ और जंगली सुअर की मौत करंत लगने से हुई।
वनाधिकारियों को मौके पर बिजली के नंगे तार भी मिले हैं। अफसरों का अनुमान है कि जंगली सुअर का शिकार करने के लिए शिकारियों ने हाईवोल्टेज करंट प्रवाहित तार बिछाए थे, जिनके चपेट में बाघ और जंगली सुअर दोनों ही आ गए और उनकी मौत हो गई। शिकारी दोनों शवों को ले नहीं जा सके।
शिकारी बाघ की मूंछ के बाल उखाड़ ले गए हैं। इससे यह बात पूरी तरह साफ है कि इस वारदात को शिकारियों ने ही अंजाम दिया है, जिस जगह बाघ की मौत हुई है उस जगह कटीले तारों की बाड़ भी लगी है, जिसमें फंसकर बाघ की गर्दन में घाव हो गए हैं।
घटना की सूचना मिलते ही मुख्य वन संरक्षक (लखनऊ मंडल) आरके सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट टाइगर) कमलेश कुमार गुप्ता, दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / डाक निदेशक संजय पाठक, दुधवा टाइगर रिजर्व रिजर्वज उपनिदेशक डॉ। अनिल कुमार पटेल, डीएफओ साउथ समीर कुमार सहित वन विभाग का पूरा अमला मौके पर पहुंचा और छानबीन शुरू कर दी। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई बरेली भेजने की तैयारी की जा रही है।

एक साल के अंदर संदिग्ध हालात में मर चुके हैं कई बाघ हैं

कुछ दिन पहले दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे हरदुआ गांव के पास खेत में बाघिन का शव मिला था, जिसके गले में शेन रस्सी का फंदा फंसा हुआ था। इसके कुछ दिनों बाद दुधवा नेशनल पार्क की किशनपुर सेंक्चुरी में दो शिकारी पकड़े गए थे जिनके पास से रस्सी और शिकार के उपकरण बरामद हुए थे।
बाद में जंगल में लगे कैमरों में से एक कैमरे में एक ऐसे बाघ की तस्वीर ट्रैप हुई, जिसकी गर्दन में याहू रस्सी का फंदा पड़ा हुआ था। इस बाघ की गर्दन से अब फंदा नहीं निकाला जा रहा है। इससे पहले भी कई बार नहरों से बाघों के शव बरामद हुए हैं। अब एक और बाघ की मौत के बाद यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि तराई के जंगलों में शिकारी सक्रिय हैं और उनके स्कैनर पर बाघ और दूसरे दुर्लभ वन्यजीव हैं।

बाघों की सुरक्षा के वन विभाग के दावे फेल

एक तरफ जहां आंतरिक स्तर पर बाघों के संरक्षण, सुरक्षा और संवर्धन के लिए कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं और इस मद में अरबों रुपये खर्च हो रहे हैं, वहीं तराई के जंगलों में बाघों का शिकार थमने का नाम नहीं ले रहा है।
मोहम्मदी वन क्षेत्र में 12 बाघ जंगल के अंदर तो बहुत जंगल से सटे खेतों में
मोहम्मदी रेंज में लगभग छह हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र है, जिसमें 12 बाघ कैमरों में ट्रैप हो चुके हैं, जबकि इतने ही बाघ जंगल से सटे खेतों में चहलकदमी करते दिखाई देते हैं। खेतों में प्रवास करने वाले बाघों की वन विभाग गणना नहीं करता है। ग्रामीणों का अनुमान है कि इस जंगल में बाघों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा है। कई टुकड़ों में बंटे इस वन क्षेत्र की भौगोलिक संरचना कुछ ऐसी है कि कठिनाइयों नदी जंगल से बिल्कुल सटकर बहती है। यह इलाका बाघों के लिए बेहद अनुकूल प्राकृतवास माना जाता है। जंगल से सटे हुए खेतों में किसान गन्ने की फसल उगाते हैं। गन्ने के खेत वन्यजीवों को जंगल सरीके लगने से यहां जंगल से निकलकर जंगली सुअर, हिरन, पाड़ा चीतल, नीलगाय आदि भी पहुंच जाते हैं, जहां मौजूद बाघ भोजन के रूप में इन वन्यजीवों का शिकार करते हैं और कठिनाइयों नदी का पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं। हैं। बाघों की आवाजाही खेतों तक होने के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं भी आए दिन होती रहती हैं।

बोरी में मिला बेहाल तार

भीखमपुर। अधिकारियों सहित क्षेत्र के लोगों को 11 हजार लाइन के नीचे बोरी में बिना तार मिला है, जिसे वन विभाग ने कब्जे में ले लिया है। जंगल क्षेत्र के इलाके में ग्रामीण और किसान कम पाए जाते हैं। वन विभाग के आला अधिकारी भी समझ नहीं पा रहे थे कि इससे 250 किलो के बाघ की मौत हो सकती है।

वन्य जीव लो ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है

गोला गोकर्णनाथ। वन्य जीव प्रेमी, पर्यावरण एवं जन कल्याण समिति के अशोक कुमार मुन्ना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रेषित पत्र की जांच की मांग कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

मोहम्मदी रेंज में शिकारियों के लगाए बिजली के तारों की चपेट में आकर बाघ की मौत का मामला

बांकेगंज / भीखमपुर। तराई के जंगलों में शातिर शिकारियों की सक्रियता से जंगल के दुर्लभ वन्यजीव ही नहीं, बल्कि बाघ और तेंदुए भी नहीं हैं। सोमवार को मोहम्मदी रेंज में शिकारियों के बिछाए हाईवोल्टेज प्रवाहित तार की चपेट में आने से एक बाघ और एक जंगली सुअर की मौत से वन विभाग सकते में है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि शिकारियों ने जंगली सुअर का शिकार करने के लिए तर बिछाए थे, जिनके चपेट में आने से एक जंगली सुअर तो मारा ही गया और एक बाघ की भी मौत हो गई। यही नहीं बाघ की मूंछों के बाल भी गायब मिले हैं।

दक्षिण खीरी वन रोड की मोहम्मदी रेंज के आंवला बीट के जंगल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर डोकरपुर गांव के निकट खेत में एक बाघ और एक जंगली सुअर का शव बरामद हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के आला हाकिम मौके पर पहुंच गए और छानबीन शुरू कर दी। दोनों शवों की जांच करने पर यह बात सामने आई कि बाघ और जंगली सुअर की मौत करंत लगने से हुई।

वनाधिकारियों को मौके पर बिजली के नंगे तार भी मिले हैं। अफसरों का अनुमान है कि जंगली सुअर का शिकार करने के लिए शिकारियों ने हाईवोल्टेज करंट प्रवाहित तार बिछाए थे, जिनके चपेट में बाघ और जंगली सुअर दोनों ही आ गए और उनकी मौत हो गई। शिकारी दोनों शों को ले नहीं जा सके।

शिकारी बाघ की मूंछ के बाल उखाड़ ले गए हैं। इससे यह बात पूरी तरह साफ है कि इस वारदात को शिकारियों ने ही अंजाम दिया है, जिस जगह बाघ की मौत हुई है उस जगह कटीले तारों की बाड़ भी लगी है, जिसमें फंसकर बाघ की गर्दन में घाव हो गए हैं।

घटना की सूचना मिलते ही मुख्य वन संरक्षक (लखनऊ मंडल) आरके सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट टाइगर) कमलेश कुमार गुप्ता, दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / डाक निदेशक संजय पाठक, दुधवा टाइगर रिजर्व रिजर्वज उपनिदेशक डॉ। अनिल कुमार पटेल, डीएफओ साउथ समीर कुमार सहित वन विभाग का पूरा अमला मौके पर पहुंचा और छानबीन शुरू कर दी। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई बरेली भेजने की तैयारी की जा रही है।

एक साल के अंदर संदिग्ध हालात में मर चुके हैं कई बाघ हैं

कुछ दिन पहले दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे हरदुआ गांव के पास खेत में बाघिन का शव मिला था, जिसके गले में शेन रस्सी का फंदा फंसा हुआ था। इसके कुछ दिनों बाद दुधवा नेशनल पार्क की किशनपुर सेंक्चुरी में दो शिकारी पकड़े गए थे जिनके पास से रस्सी और शिकार के उपकरण बरामद हुए थे।

बाद में जंगल में लगे कैमरों में से एक कैमरे में एक ऐसे बाघ की तस्वीर ट्रैप हुई, जिसकी गर्दन में याहू रस्सी का फंदा पड़ा हुआ था। इस बाघ की गर्दन से अब फंदा नहीं निकाला जा रहा है। इससे पहले भी कई बार नहरों से बाघों के शव बरामद हुए हैं। अब एक और बाघ की मौत के बाद यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि तराई के जंगलों में शिकारी सक्रिय हैं और उनके स्कैनर पर बाघ और दूसरे दुर्लभ वन्यजीव हैं।

बाघों की सुरक्षा के वन विभाग के दावे फेल

एक तरफ जहां आंतरिक स्तर पर बाघों के संरक्षण, सुरक्षा और संवर्धन के लिए कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं और इस मद में अरबों रुपये खर्च हो रहे हैं, वहीं तराई के जंगलों में बाघों का शिकार थमने का नाम नहीं ले रहा है।

मोहम्मदी वन क्षेत्र में 12 बाघ जंगल के अंदर तो बहुत ही जंगल से सटे खेतों में

मोहम्मदी रेंज में लगभग छह हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र है, जिसमें 12 बाघ कैमरों में ट्रैप हो चुके हैं, जबकि इतने ही बाघ जंगल से सटे खेतों में चहलकदमी करते दिखाई देते हैं। खेतों में प्रवास करने वाले बाघों की वन विभाग गणना नहीं करता है। ग्रामीणों का अनुमान है कि इस जंगल में बाघों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा है। कई टुकड़ों में बंटे इस वन क्षेत्र की भौगोलिक संरचना कुछ ऐसी है कि कठिनाइयों नदी जंगल से बिल्कुल सटकर बहती है। यह इलाका बाघों के लिए बेहद अनुकूल प्राकृतवास माना जाता है। जंगल से सटे हुए खेतों में किसान गन्ने की फसल उगाते हैं। गन्ने के खेत वन्यजीवों को जंगल सरीके लगने से यहां जंगल से निकलकर जंगली सुअर, हिरन, पाड़ा चीतल, नीलगाय आदि भी पहुंच जाते हैं, जहां मौजूद बाघ भोजन के रूप में इन वन्यजीवों का शिकार करते हैं और कठिनाइयों नदी का पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं। हैं। बाघों की आवाजाही खेतों तक होने के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं भी आए दिन होती रहती हैं।

मोहम्मदी रेंज की आंवला बीट जंगल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर डोकरपुर गांव से सटे खेत में करंट लगने से एक बाघ की मौत हुई है। प्रथम दृष्टया यह शिकारियों की करतूत प्रतीत होती है। मामला की छानबीन की जा रही है।– समीर कुमार, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन

बोरी में मिला बेहाल तार

भीखमपुर। अधिकारियों सहित क्षेत्र के लोगों को 11 हजार लाइन के नीचे बोरी में अनिश्चित तार मिला है, जिसे वन विभाग ने कब्जे में ले लिया है। जंगल क्षेत्र के इलाके में ग्रामीण और किसान कम पाए जाते हैं। वन विभाग के आला अधिकारी भी समझ नहीं पा रहे थे कि इससे 250 किलो के बाघ की मौत हो सकती है।

वन्य जीव लो ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है

गोला गोकर्णनाथ। वन्य जीव प्रेमी, पर्यावरण एवं जन कल्याण समिति के अशोक कुमार मुन्ना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रेषित पत्र की जांच की मांग कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।





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