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शहर काजी और उलेमाओं की बैठक में निर्णय: शादी में नाच-गाना, डीजे और पटाखे हुए तो निकाह नहीं पढ़ाएंगे काजी


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भोपाल13 घंटे पहले

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प्रतीकात्मक फोटो

  • जिन शादियों में फिजूलखर्ची नजर आई, उनमें शिरकत न करें

मुस्लिम समाज की जिस शादी में नाच-गाना, बैंड-बाजा, डीजे और पटाखे का इस्तेमाल किया जाएगा, वहां अब शहर काजी सहित अन्य निकाह खां निकाह नहीं पढ़ाएंगे। यह निर्णय शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी की बैठक में गुरुवार को हुई उलेमाओं की एक बड़ी बैठक में काम किया गया। बंदों से भी अपील की गई कि जिन शादियों में फिजूलखर्ची नजर आए, उनमें शिरकत न करें। इस संबंध में अब मस्जिदों से भी बंदों को पुन: हिदायत दी जाएगी।

मुस्लिम समाज में शादी-ब्याह के आयोजन अब सादगी के बदले भव्य रूप में होने से शहर काजी सहित अन्य उलेमा इससे सम्मानित हो चुके हैं। ऐसे आयोजन को वह शरीअत और मजहबी हिदायतों के खिलाफ मानते हैं। इस संबंध में पिछले 3 साल से शहर काजी सहित अन्य उलेमा मस्जिदों में अपनी तकरीरों में बंदों को समझने योग्य देने का काम कर रहे थे, लेकिन समीक्षा परिणाम दिखाई नहीं देने पर गुरुवार को मसाजिद कमेटी के दफ्तर में बैठक हुई।

मजहब सादगी पसंद है
इस्लाम सादगी पसंद मजहब है। हमारे पैगम्बर और कुरान का भी यही संदेश है। शादियों में फिजूलखर्ची से गुरबत से घिरे बंद हीन भावना का शिकार होता है। इस कारण से उलेमाओं ने आम राय से तय किया है कि ऐसे आयोजनों में हम लोग निकाह नहीं पढ़ाएंगे।
-सैयद मुश्ताक अली नदवी, शहर काजी

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